तमिलनाडु में कुरुवई धान की खेती पर सिंचाई का संकट गहराया, भूजल स्तर गिरने से कावेरी डेल्टा के किसान परेशान
खबर सार :-
तमिलनाडु के कावेरी डेल्टा के किसान सिंचाई की समस्याओं से जूझ रहे हैं। भूजल का गिरता स्तर, भूजल में बढ़ता खारापन और मेट्टूर बांध से कावेरी नदी में पानी न छोड़े जाने से किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इस सीजन में कुरुवई धान की फसल की सिंचाई के लिए भूजल की आवश्यकता है।
खबर विस्तार : -
तंजावुर: कावेरी डेल्टा के कुछ हिस्सों में कुरुवई धान की खेती गंभीर संकट का सामना कर रही है। किसानों के सामने तेजी से घटते भूजल स्तर, भूजल मे बढ़ता खारापन और मेट्टूर बांध से पानी न छोड़े जाने की समस्याओं से जूझ रहे हैं।
तेज गर्मी ने स्थिति को और खराब कर दिया है, जिससे खेतों से पानी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है। इस बीच, कृषि पंपों के लिए मुफ्त बिजली आपूर्ति की अवधि में कटौती ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। तंजावुर जिले के पापनासम, तिरुवैयारु और आसपास के इलाकों के किसानों का कहना है कि वे इस सीजन में अपनी खड़ी कुरुवई फसल को बचाने के लिए लगभग पूरी तरह से भूजल पर निर्भर हैं।
बिजली आपूर्ति में कमी से बढ़ी चिंता
बुधवार को TANGEDCO द्वारा यह बताए जाने के बाद उनकी चिंता और बढ़ गई कि कृषि पंप सेटों के लिए दैनिक मुफ्त बिजली आपूर्ति 18 घंटे से घटाकर 14 घंटे कर दी जाएगी। इस कदम से सिंचाई के लिए भूजल निकालने की उनकी क्षमता सीमित हो जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, तंजावुर जिले में लगभग एक लाख एकड़ जमीन पर भूजल का उपयोग करके कुरुवई की खेती की गई है।
भूजल स्तर गिरा, कावेरी नदी सूखी
सामान्य परिस्थितियों में किसान शुरू में भूजल का उपयोग करके सिंचाई करते हैं और बाद में फसल को बनाए रखने के लिए मेट्टूर बांध से छोड़े गए कावेरी के पानी पर निर्भर रहते हैं। हालांकि, इस साल, जलाशय में अपर्याप्त भंडारण के कारण हर साल 12 जून को पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। नतीजतन, किसान पूरी तरह से भूजल पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है क्योंकि नदी लंबे समय से नहीं बही है।
ये भी पढ़ेंः- अभी महंगा ही रहेगा टमाटर, बरसात में आएगी ज्यादा दिक्कत
पापनासम ब्लॉक में स्थिति सबसे गंभीर
पापनासम के गणपति अग्रहारम के किसान आर. अरुलसामी ने कहा कि भीषण गर्मी के कारण खेतों से पानी तेजी से भाप बनकर उड़ रहा है, जबकि कावेरी में छह महीने से अधिक समय से पानी का बहाव नहीं हुआ है। भूजल स्तर रोजाना गिर रहा है। स्थिति पापनासम ब्लॉक में सबसे गंभीर है, जहां लगभग 8,400 एकड़ में कुरुवई धान की खेती की गई है। हालांकि इनमें से लगभग 2,000 एकड़ में कटाई पूरी हो चुकी है, लेकिन बाकी खेतों की देखभाल करने वाले किसान सिंचाई के आसन्न संकट का सामना कर रहे हैं।
कई गांवों के भूजल में बढ़ रहा खारापन
एक और बड़ी चिंता वेल्लम पेराम्बुर, थेन पेराम्बुर, अल्लूर अजीसिकुडी और पनावेली जैसे गांवों में भूजल का बढ़ता खारापन है। किसानों का कहना है कि पिछले सालों में मेट्टूर बांध से समय पर पानी छोड़े जाने से नहरों के जरिए भूजल (groundwater) का स्तर फिर से बढ़ जाता था, जिससे खारापन भी कम होता था। इस बार ऐसा न होने के कारण, खारा भूजल सिंचाई पर असर डाल रहा है और फसलों की सेहत के लिए खतरा बन गया है। कई किसानों ने तमिलनाडु सरकार से अपील की है कि वे 3 अगस्त को होने वाले 'आदि पेरुक्कू' त्योहार से पहले मेट्टूर बांध से कम से कम थोड़ी मात्रा में पानी छोड़ें, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके।
कृषि विशेषज्ञों ने बारिश से जताई उम्मीद
हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पानी के मौजूदा भंडार को देखते हुए ऐसा होने की संभावना कम है। सीनियर एग्रो-टेक्नोलॉजिस्ट फोरम के पी. कलाईवानन ने बताया कि मेट्टूर जलाशय में अभी सिर्फ 35 TMC फीट पानी है, जबकि इसकी कुल क्षमता 93.47 TMC फीट है। उन्होंने कहा कि हालांकि शुरू में बांध के अगस्त में खुलने की उम्मीद थी, लेकिन पानी के मौजूदा स्तर को देखते हुए सितंबर से पहले पानी छोड़े जाने की संभावना कम है। उन्होंने आगे कहा कि अगर उत्तर-पूर्वी मानसून में अच्छी बारिश होती है, तो किसान सितंबर में मध्यम अवधि वाली सांबा धान की सीधी बुवाई करके आने वाले सीजन को बचा सकते हैं।
ये भी पढ़ेंः- कावेरी जल विवादः कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार की पहल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से करेंगे बातचीत
अन्य प्रमुख खबरें
-
दिल्ली के वसंत कुंज में दर्दनाक हादसा, सेना अधिकारी के बेटे की मौत, महिला मित्र की स्थिति गंभीर
2026-07-25
-
गोंडा में दर्दनाक सड़क हादसा: बेटे को बचाने दौड़ी मां भी कंटेनर की चपेट में आई, दोनों की मौत
2026-07-25
-
Uttarakhand IAS Transfers: उत्तराखंड में 11 IAS और IFS अधिकारियों का तबादला, ये रही पूरी लिस्ट
2026-07-24
-
Jhansi: मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 270 जोड़ों का विवाह, सरकार ने दी आर्थिक सहायता
2026-07-24
-
बिहार के मुजफ्फरपुर में Internet Service Shutdown, जहानाबाद हिंसा में 15 गिरफ्तार
2026-07-24
-
Jhansi: रेस्टोरेंट में एलएलबी छात्र की गोली मारकर हत्या, आरोपी की तलाश में तीन पुलिस टीमें
2026-07-24
-
Shahjahanpur: कांवड़ यात्रा-2026 से पहले पुलिस अलर्ट, डीजे संचालकों को जारी किए दिशा-निर्देश
2026-07-24
-
केवल एक्स-रे के भरोसे न करें टीबी (TB Diagnosis) का इलाज, 30 फीसदी मामलों में हो रही चूक
2026-07-24
-
2026-07-24
-
शाहपुरा पुलिस अलर्ट, त्योहारों से पहले सीएलजी बैठक, नशा तस्करों पर सख्ती के निर्देश
2026-07-24
-
चाकसू रोडवेज बस स्टैंड का विधायक रामावतार बैरवा ने किया निरीक्षण, यात्री सुविधाओं पर दिए निर्देश
2026-07-24
-
पुलकसागरजी महाराज बोले- स्वयं बदलेंगे तभी समाज बदलेगा, 25 जुलाई को भीलवाड़ा में चातुर्मास प्रवेश
2026-07-24
-
हिमाचल में बड़ा हादसा: लैंडस्लाइड के बाद सूमो पर गिरी चट्टान, 13 लोगों की मौत
2026-07-24
-
जम्मू-कश्मीरः किश्तवाड़-गुलाबगढ़ सड़क पर भूस्खलन का खतरा, श्री मचैल माता यात्रा स्थगित
2026-07-24
-
हिमाचल में पहाड़ों पर बर्फबारी, 27 से 29 जुलाई तक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
2026-07-24