अभी महंगा ही रहेगा टमाटर, बरसात में आएगी ज्यादा दिक्कत
खबर सार :-
टमाटर की फसल भारत की महत्तवपूर्ण व्यापारिक फसल है। यह फसल दुनिया भर में आलू के बाद दूसरे नंबर की फसल मानी जाती है। इसे फल की तरह कच्चा भी खाया जा सकता है। टमाटर विटामिन ए, सी, पोटाश्यिम और अन्य खनिजों से भरा होता है।
खबर विस्तार : -
लखनऊ, टमाटर की फसल भारत की महत्तवपूर्ण व्यापारिक फसल है। यह फसल दुनिया भर में आलू के बाद दूसरे नंबर की फसल मानी जाती है। इसे फल की तरह कच्चा भी खाया जा सकता है। टमाटर विटामिन ए, सी, पोटाश्यिम और अन्य खनिजों से भरा होता है। इससे जूस, सूप, पाउडर और कैचअप भी बनाया जाता उत्तर प्रदेश के अलावा यह कई राज्यों में बोया जाता है। भरपूर कमाई होने के बाद भी इसकी कीमत आसमान पर है। इसलिए सलाह यह कि नई फसल आने तक बाजार के साथ संतुलन बनाकर चलें।
बाजार में हैं कई तरह की किस्में
टमाटर की खेती अलग-अलग मिट्टी की किस्मों में की जा सकती है। रेतली, चिकनी, दोमट, काली, लाल मिट्टी, जिसमें पानी के निकास का सही प्रबंध हो। पैदावार के लिए टमाटर को अच्छे निकास वाली रेतली मिट्टी में उत्तम जैविक तत्वों से उगाया जा सकता है। यह तेजाबी और खारी मिट्टी में भी उगने योग्य फसल है। अगेती फसल के लिए हल्की मिट्टी लाभदायक है, जबकि अच्छी पैदावार के लि टमाटर दोमट, चिकनी और बारीक रेत वाली मिट्टी में तैयार हो जाता है। अब बरसात के दिन है। इसमें टमाटर प्रभावित होता है। कुछ लोगों ने पौधे तैैयार कर रखे हैं। यही दाम घटाने में काम आएंगे। इस किस्म की पहली तुड़ाई 90 दिनों में होती है। इसकी औसतन पैदावार 225 क्विंटल प्रति एकड़ मानी जाती है। यह किस्म कईं तरह के उत्पाद तैयार करने के लिए प्रयोग की जाती है।
समतल मिट्टी की होती है जरूरत
किस्मों के आधार पर टमाटर का आकार बड़ा और गोल होता है और यह गुच्छों में लगते हैं। इसकी औसतन पैदावार 90-95 क्विंटल प्रति एकड़ तक होती है। बाजार में कई तरह की किस्में हैं। अधिकांष लोग पंजाब का बीज खरीदते हैं। इसकी बिजाई जुलाई के मध्य, अगस्त या सितंबर में की जाती है। टमाटर के पौधे लगाने के लिए अच्छी जोताई और समतल मिट्टी की जरूरत होती है। मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 5 बार जोताई करें। मिट्टी को समतल करने के लिए सुहागा लगाएं। अंतिम बार जोताई करते समय इसमें अच्छी किस्म की खाद और कार्बोफिउरॉन 4 किलो प्रति एकड़ या नीम केक 8 किलो प्रति एकड़ डालें। टमाटर की फसल को बैड में लगाया जाता है। इसकी चैड़ाई 80-90 सैं.मी. होती है। मिट्टी के अंदरूनी रोगाणुओं, कीड़ों और जीवों को नष्ट करने के लिए मिट्टी को सूरज की किरणों में खुला छोड़ दें।
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