वैश्विक उर्वरक संकट के बीच भारत की बड़ी तैयारी, किसानों पर नहीं पड़ेगा महंगाई का असर: पीयूष गोयल
खबर सार :-
वैश्विक उर्वरक संकट और बढ़ती कीमतों के बीच भारत ने किसानों को राहत देने की प्रभावी रणनीति अपनाई है। केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी, बढ़े हुए भंडारण, घरेलू उत्पादन और आयात प्रबंधन के जरिए खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पीयूष गोयल के बयान से साफ है कि सरकार खेती को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर तेजी से काम कर रही है।
खबर विस्तार : -
India Fertilizer Stock: नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए सब्सिडी के माध्यम से किसानों को राहत प्रदान की है।
गोयल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल खाद उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि खेती को आर्थिक रूप से सुरक्षित और टिकाऊ बनाना भी है। वैश्विक अस्थिरता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद भारत ने उर्वरक आपूर्ति की मजबूत व्यवस्था बनाए रखी है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध हो रही है और खेती की लागत नियंत्रित बनी हुई है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मजबूत कदम
मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया के सामने आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में सरकार ने ऐसे कई संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं, जिनसे भारत की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हुई है। गोयल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में लक्षित रणनीतियों, परिणाम आधारित कार्यों और परिवर्तनकारी योजनाओं ने देश को नई दिशा दी है। यही कारण है कि भारत अब वैश्विक मंच पर समान और निष्पक्ष शर्तों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और हाल में प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्राएं इस बदलते भारत की झलक हैं। इन यात्राओं और समझौतों से व्यापार, निवेश, तकनीक और उद्योग के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
India-Canada FTA से खुलेंगे निवेश के नए रास्ते
पीयूष गोयल ने भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत में निवेश के नए अवसर पैदा करेगा और उद्योगों को वैश्विक बाजार तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में एफटीए भारत की निर्यात क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएंगे। इससे भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और देश की आर्थिक वृद्धि को नई गति प्राप्त होगी।
उर्वरक सुरक्षा के मोर्चे पर भारत मजबूत
मध्य पूर्व संकट और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच भी भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात में भी तेजी लाई है, जिससे किसानों की जरूरतों से अधिक उर्वरक उपलब्ध कराया जा सका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में इस समय 199.65 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। यह मौसमी मांग के 51 प्रतिशत से अधिक की पूर्ति करने में सक्षम है। सामान्य परिस्थितियों में यह बफर स्तर लगभग 33 प्रतिशत माना जाता है, लेकिन वर्तमान भंडारण इससे कहीं अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सरकार की बेहतर अग्रिम योजना और प्रभावी लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम है। समय रहते आयात बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन देने से संभावित संकट को काफी हद तक टाल दिया गया।
घरेलू उत्पादन और आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
हालिया संकट के बाद सरकार ने उर्वरक उत्पादन और आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसके परिणामस्वरूप कुल उपलब्धता में लगभग 97 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें घरेलू उत्पादन का योगदान 76.78 लाख मीट्रिक टन रहा, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर आयातित उर्वरकों का योगदान 19.94 लाख मीट्रिक टन दर्ज किया गया। इससे साफ है कि सरकार ने केवल आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू क्षमता को भी मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इसी तरह उत्पादन और भंडारण की रणनीति जारी रही तो आने वाले समय में भारत उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सकता है।
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