Burhanpur के Banana को मिला GI टैग: 18 हजार किसानों की बदलेगी तकदीर, दुनिया में बनेगी नई पहचान
खबर सार :-
बुरहानपुर के केले को मिला GI टैग जिले के किसानों, व्यापारियों और प्रसंस्करण उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे उत्पाद की विशिष्ट पहचान मजबूत होगी, किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी और निर्यात के नए अवसर खुलेंगे। यह सम्मान न केवल बुरहानपुर की कृषि समृद्धि को नई ऊंचाई देगा, बल्कि मध्य प्रदेश को वैश्विक कृषि मानचित्र पर भी अधिक मजबूत पहचान दिलाएगा।
खबर विस्तार : -
Burhanpur Banana GI Tag: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अपनी खास मिठास, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध बुरहानपुर के केले को आखिरकार भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिल गया है। यह उपलब्धि जिले के करीब 18 हजार से अधिक केला किसानों के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं मानी जा रही है। GI टैग मिलने से अब बुरहानपुर के केले को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अलग और विशिष्ट पहचान प्राप्त होगी।
जनवरी 2024 में किया गया था आवेदन
बुरहानपुर के केले को GI टैग दिलाने की प्रक्रिया पिछले वर्ष शुरू हुई थी। इसके लिए जनवरी 2024 में खकनार कृषि विकास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने आवेदन प्रस्तुत किया था। लंबे परीक्षण और मूल्यांकन के बाद अब इस विशेष कृषि उत्पाद को GI टैग प्रदान किया गया है। इससे क्षेत्र के किसानों की वर्षों की मेहनत और उत्पाद की विशिष्ट गुणवत्ता को औपचारिक मान्यता मिल गई है।
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा केला उत्पादक जिला
बुरहानपुर को मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा केला उत्पादक जिला माना जाता है। जिले में प्रदेश की एकमात्र केला मंडी भी संचालित होती है, जिसके कारण यह क्षेत्र लंबे समय से केले के व्यापार का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां हजारों हेक्टेयर में फैले केले के बागान प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। जिले के किसान आधुनिक तकनीकों के साथ पारंपरिक खेती पद्धतियों का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाले केले का उत्पादन करते हैं। यही वजह है कि बुरहानपुर के केले की मांग देश के कई राज्यों में लगातार बनी रहती है।
देश के साथ विदेशों में भी बढ़ रही मांग
बुरहानपुर के केले अपनी प्राकृतिक मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण बाजार में विशेष स्थान रखते हैं। उत्तर भारत के कई राज्यों में इनकी बड़ी खपत होती है। इसके अलावा खाड़ी देशों में भी यहां के केले की लगातार मांग देखी जा रही है। GI टैग मिलने के बाद निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पाद की ब्रांडिंग करने में और अधिक आसानी होगी। इससे विदेशी बाजारों में बुरहानपुर के केले की पहुंच बढ़ने की संभावना है, जिससे किसानों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।

18,640 किसानों को होगा सीधा लाभ
जिले में वर्तमान समय में लगभग 18,640 किसान केला खेती से जुड़े हुए हैं। ये किसान करीब 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार हर वर्ष लगभग 18,28,400 मीट्रिक टन केले का उत्पादन किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने के बाद किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। साथ ही बाजार में नकली या मिलते-जुलते उत्पादों से भी बुरहानपुर केले की पहचान सुरक्षित रहेगी। इससे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिलेगी।
केला प्रसंस्करण उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार
बुरहानपुर केवल केला उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां केला आधारित प्रसंस्करण उद्योग भी तेजी से विकसित हो रहा है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत जिले में 55 से अधिक केला प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इन इकाइयों में केले से चिप्स, स्नैक्स और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की विश्वसनीयता और मांग दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी और रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी सृजित होंगे।
GI Tag: ब्रांड वैल्यू बढ़ने से मजबूत होगी स्थानीय अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञों के अनुसार GI टैग किसी भी उत्पाद की विशिष्ट पहचान को सुरक्षित करने का प्रभावी माध्यम होता है। इससे उत्पाद की ब्रांड वैल्यू बढ़ती है और उसे बाजार में अलग स्थान मिलता है। बुरहानपुर के केले को मिला यह सम्मान कृषि, व्यापार, निर्यात और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।
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