भारत की विकास गाथा में कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगी सबसे बड़ी ताकत: Summer Davos में विशेषज्ञों का बड़ा संदेश

खबर सार :-

समर दावोस में विशेषज्ञों ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारत की आर्थिक प्रगति का अगला चरण कृषि और तकनीक के समन्वय पर आधारित होगा। AI, डिजिटल नवाचार और टिकाऊ कृषि पद्धतियां न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेंगी, बल्कि भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में भी मजबूत आधार प्रदान करेंगी। आने वाले वर्षों में यही क्षेत्र विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।
भारत की विकास गाथा में कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगी सबसे बड़ी ताकत: Summer Davos में विशेषज्ञों का बड़ा संदेश

खबर विस्तार : -

Summer Davos 2026: भारत आने वाले वर्षों में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सकता है। चीन के डालियान शहर में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ‘एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग’ यानी ‘समर दावोस’ में वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कृषि और टेक्नोलॉजी की निर्णायक भूमिका होगी।

भारत वैश्विक विकास का प्रमुख इंजन

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मिरेक डुसेक ने कहा कि भारत वर्तमान समय में दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार वैश्विक विकास दर में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और आने वाले वर्षों में भी इसकी विकास यात्रा मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। डुसेक के अनुसार, भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार, युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियां इसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत भविष्य में वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित करने वाली प्रमुख शक्तियों में शामिल होगा।

Summer Davos बना वैश्विक विचार-विमर्श का मंच

डुसेक ने बताया कि समर दावोस सम्मेलन दुनिया भर के इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को एक मंच पर लाने का काम कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाशना, सहयोग को बढ़ावा देना और भविष्य की आर्थिक रणनीतियों पर चर्चा करना है। सम्मेलन में डिजिटल परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विनिर्माण क्षेत्र के आधुनिकीकरण और सतत विकास जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हो रही है।

Indian Economy-Summer Davos 2026

AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी उत्पादकता

डुसेक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकें वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। ये तकनीकें न केवल उत्पादकता बढ़ाएंगी, बल्कि नए रोजगार, बेहतर सेवाएं और अधिक प्रतिस्पर्धी औद्योगिक ढांचा भी तैयार करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी अपनाने के क्षेत्र में जो प्रगति हासिल की है, वह भविष्य में आर्थिक विकास को और गति दे सकती है।

Agricultural Sector रहेगा विकास का मजबूत आधार

पद्मश्री से सम्मानित और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मृदा विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर प्रो. रतन लाल ने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उनके अनुसार, कृषि केवल खाद्य सुरक्षा का आधार नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ भी है। यदि खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और तकनीक आधारित बनाया जाए तो भारत की आर्थिक प्रगति को नई गति मिल सकती है।

मिट्टी की सेहत और तकनीक का होगा बड़ा योगदान

प्रो. रतन लाल ने खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और भूमि के टिकाऊ प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी बेहतर उत्पादन की कुंजी है और इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल टूल्स किसानों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। इन तकनीकों की मदद से मिट्टी की जांच तेजी से, कम लागत में और अधिक सटीक तरीके से की जा सकती है। इससे किसान सही समय पर सही निर्णय ले सकेंगे, उत्पादन लागत घटेगी और फसल की पैदावार में वृद्धि होगी।

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