झांसी में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या बनी यातायात के लिए चुनौती, व्यवस्था फेल

खबर सार :-

झांसी में ई-रिक्शा की संख्या 8,500 से अधिक पहुंच गई है। बढ़ते ई-रिक्शा और बेतरतीब संचालन से शहर की यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। लगातार बढ़ रह संख्या के चलते यातायात व्यवस्था पूरी तरह फे हो गई है।
झांसीः तेजी से बढ़ी संख्या, ऑटो से लगभग दोगुने हुए ई-रिक्शा

खबर विस्तार : -

झांसी: महानगर में बीते कुछ वर्षों में ई-रिक्शा की संख्या में तेजी से हुई बढ़ोतरी अब शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सीमित चौड़ाई वाली सड़कों पर बढ़ते निजी वाहनों के बीच बेतरतीब तरीके से संचालित हो रहे हजारों ई-रिक्शा प्रमुख चौराहों, बाजारों और व्यस्त मार्गों पर जाम का कारण बन रहे हैं। वर्ष 2016 में झांसी की सड़कों पर पहला ई-रिक्शा दौड़ा था, लेकिन महज एक दशक में इनकी संख्या बढ़कर करीब साढ़े आठ हजार से अधिक हो गई है।

अगर ई-रिक्शा की संख्या की तुलना ऑटो रिक्शा से की जाए तो स्थिति और स्पष्ट होती है। महानगर में जहां करीब 8,500 से अधिक ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, वहीं ऑटो रिक्शा की संख्या लगभग 4,500 है। यानी ई-रिक्शा की संख्या ऑटो रिक्शा के मुकाबले लगभग दोगुनी हो चुकी है। सड़कों की क्षमता सीमित होने के कारण इन वाहनों की बढ़ती संख्या का सीधा असर यातायात व्यवस्था पर पड़ रहा है।

दो वर्षों में करीब चार हजार नए ई-रिक्शा

परिवहन विभाग के आंकड़े भी ई-रिक्शा की तेजी से बढ़ती संख्या की तस्वीर सामने रखते हैं। वर्ष 2022-23 में 752 ई-रिक्शा पंजीकृत हुए थे। इसके अगले वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह संख्या तेजी से बढ़ी और करीब 1,800 नए ई-रिक्शा पंजीकृत किए गए। इसके बाद वर्ष 2024-25 में भी लगभग 2,000 ई-रिक्शा का पंजीयन हुआ। इस तरह महज दो वित्तीय वर्षों में करीब चार हजार नए ई-रिक्शा सड़कों पर उतर गए। शहर के प्रमुख चौराहों और बाजारों में सवारी के इंतजार में सड़क किनारे या मार्ग पर खड़े ई-रिक्शा यातायात के लिए परेशानी पैदा कर रहे हैं। कई स्थानों पर एक ई-रिक्शा के रुकते ही उसके पीछे वाहनों की कतार लग जाती है। कुछ ही देर में यह स्थिति जाम में बदल जाती है। व्यस्त समय में समस्या और गंभीर हो जाती है।

रोजी-रोटी का साधन भी बने ई-रिक्शा

ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या को केवल यातायात समस्या के तौर पर देखना भी आसान नहीं है। हजारों परिवारों के लिए यह रोजगार और रोजी-रोटी का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। कम दूरी की यात्रा के लिए यात्रियों को भी ई-रिक्शा सस्ता और आसानी से उपलब्ध परिवहन साधन लगता है। यही वजह है कि इनकी मांग लगातार बनी हुई है। हालांकि, सुविधा और रोजगार के इस साधन की बढ़ती संख्या अब यातायात व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। ई-रिक्शा चालकों के लिए अलग रूट निर्धारित करने की योजना भी बनाई गई थी, ताकि उनके संचालन को व्यवस्थित किया जा सके और मुख्य मार्गों पर दबाव कम किया जा सके। यातायात पुलिस की यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।

अपनी सुविधा के अनुसार चुन रहे मार्ग

अलग रूट व्यवस्था लागू नहीं होने के कारण ई-रिक्शा चालक सवारी की उपलब्धता और अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी मार्ग पर वाहन चला रहे हैं। इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर ई-रिक्शा का दबाव लगातार बढ़ रहा है। जरूरत इस बात की है कि इनके संचालन के लिए व्यावहारिक रूट निर्धारित किए जाएं और प्रमुख बाजारों व चौराहों पर खड़े होने की व्यवस्था भी तय की जाए। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. सुजीत कुमार सिंह का कहना है कि निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले वाहनों का पंजीयन रोका नहीं जा सकता। हालांकि, पहले की तुलना में अब ई-रिक्शा के पंजीयन में कमी आई है। इसके बावजूद शहर में पहले से मौजूद बड़ी संख्या और इनके बेतरतीब संचालन के कारण यातायात व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।

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