कावेरी जल विवादः कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार की पहल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से करेंगे बातचीत

खबर सार :-

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे कावेरी नदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में सीएम शिवकुमार ने बड़ी पहल की है। सीएम ने कहा है कि वे मुद्दे पर तमिलनाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय से बातचीत करने को तैयार हैं। इससे पहले डीएमके और एआईडीएमके के नेतृत्व वाली पिछली सरकारें कावेरी जल विवाद पर सीधी बातचीत से बचती रही हैं। इसके अलावा सीएम शिवकुमार ने नीट परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का भी स्वागत किया।
कावेरी जल विवादः कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार की पहल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से करेंगे बातचीत

खबर विस्तार : -

बेंगलुरु: कर्नाटक के सीएम डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को कहा कि वह कावेरी नदी के पानी के बंटवारे के विवाद से जुड़े मुद्दों पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करने को तैयार हैं। उन्होंने NEET को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करने के केंद्र सरकार के फैसले का भी स्वागत किया।

बेंगलुरु टेक समिट से पहले CEO ब्रेकफास्ट मीटिंग में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार तमिलनाडु सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों के साथ कावेरी नदी विवाद से जुड़े मामलों पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

'सभी से बात करने के लिए तैयार'

शिवकुमार ने आगे कहा, "मैं इस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पत्र की बातें बताना नहीं चाहता। हम इस हफ्ते कैबिनेट विस्तार और अन्य मामलों में व्यस्त रहे हैं। हम सभी से बात करने, जानकारी साझा करने और कुछ मुद्दों पर मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।" उनकी यह टिप्पणी कावेरी मुद्दे को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा कथित तौर पर भेजे गए एक पत्र के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब में आई। 

मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना पर चर्चा की उम्मीद

हालांकि, सूत्रों ने पुष्टि की है कि कावेरी जल-बंटवारे के चल रहे विवाद के बीच कर्नाटक के सीएम डी.के. शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बीच बातचीत की तैयारी चल रही है। बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिसमें दोनों मुख्यमंत्रियों द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना भी शामिल है। अगर यह बैठक होती है, तो यह दशकों में ऐसे दुर्लभ मौकों में से एक होगा जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कावेरी मुद्दे और आपसी हित के अन्य मामलों पर सीधी बातचीत के लिए एक साथ आएंगे।

तमिलनाडु के सीएम के बेंगलुरु आने की संभावना

सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु सरकार ने बैठक का अनुरोध किया था और इसके जवाब में सीएम शिवकुमार ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री विजय को 3 अगस्त को बातचीत के लिए बेंगलुरु आमंत्रित किया। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने निमंत्रण स्वीकार किया है या नहीं।

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कावेरी जल-बंटवारे पर बातचीत से बचती रहीं सरकारें

ऐतिहासिक रूप से, DMK और AIADMK के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की सरकारों ने कावेरी जल-बंटवारे के मुद्दे पर कर्नाटक के साथ सीधी बातचीत से लगातार इनकार किया है। तमिलनाडु का आधिकारिक रुख यह रहा है कि कावेरी विवाद का समाधान कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही किया जा चुका है। 

NEET परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत

इस बीच, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने NEET परीक्षा को लेकर छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शन के बाद शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं पर विचार-विमर्श करने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत किया। शिवकुमार ने कहा कि यह अच्छी बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार आखिरकार एक महीने बाद शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए आगे आए हैं। अब पूरा देश इस मुद्दे से वाकिफ हो गया है; हम सभी देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य के लिए काम कर रहे हैं।

ये बातें NEET परीक्षा के आयोजन को लेकर चल रही बहस और देशभर में छात्रों व विपक्षी दलों की ओर से परीक्षा और दाखिला प्रक्रियाओं में सुधार की बढ़ती मांगों के बीच कही गई हैं। शिवकुमार ने फिर कहा कि कर्नाटक सरकार राज्य के लोगों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ अंतर-राज्यीय मुद्दों पर पड़ोसी राज्यों के साथ बातचीत और सहयोग बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

FAQ

कावेरी जल विवाद क्या है?

कावेरी जल विवाद मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दक्षिण भारत की कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक सदी से भी ज्यादा समय से चला आ रहा झगड़ा है। इसका मुख्य कारण कम बारिश वाले वर्षों में दोनों राज्यों में खेती और पीने के लिए पानी की बढ़ती मांग है।

क्या है विवाद का मुख्य कारण?

कावेरी नदी के पानी को लेकर ब्रिटिशकाल के दौरान तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी और मैसूर रियासत के बीच समझौता हुआ था। कर्नाटक का कहना है कि उसे अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अधिक पानी चाहिए, जबकि तमिलनाडु भी इसी मांग पर अडिग है।

मेकेदातु जलाशय परियोजना क्या है?

कर्नाटक सरकार द्वारा कावेरी और अर्कावती नदियों के संगम के पास एक पेयजल और जलविद्युत परियोजना है। इस परियोजना से बेंगलुरु को 4.75 टीएमसी पेयजल और 400 मेगावाट बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य है। तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध कर रहा है। 

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