तमिलनाडु विधानसभा में द्रमुक का वॉकआउट, मुख्यमंत्री विजय के जवाब के दौरान बोलने का मौका नहीं मिलने पर हंगामा

खबर सार :-

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर जवाब के दौरान द्रमुक सदस्यों ने बोलने का मौका नहीं मिलने पर वॉकआउट किया।
तमिलनाडु विधानसभा में हंगामा, बोलने का मौका न मिलने पर वॉकआउट

खबर विस्तार : -

चेन्नईः तमिलनाडु विधानसभा का सत्र तीन दिनों के अवकाश के बाद सोमवार सुबह 9:30 बजे दोबारा शुरू हुआ। मौजूदा विधानसभा सत्र का यह 14वां दिन रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों और उनसे जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विजय ने पुलिस एवं अग्निशमन विभाग की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इसी दौरान विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के सदस्यों ने बोलने का अवसर नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए विरोध किया और बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया।

सोमवार की कार्यवाही के दौरान सरकार की ओर से तीन महत्वपूर्ण विधेयक विधानसभा में पेश किए गए। इनमें तमिलनाडु वेतन भुगतान कानून संशोधन विधेयक, 2026, तमिलनाडु पंचायत द्वितीय संशोधन विधेयक, 2026 और तमिलनाडु मूल्य वर्धित कर (वैट) द्वितीय संशोधन विधेयक, 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार की ओर से विधेयक पेश किए जाने के साथ सदन में विभिन्न विभागों के कामकाज और बजटीय प्रावधानों पर भी चर्चा हुई। विधायकों ने वाणिज्यिक कर, स्टांप एवं पंजीकरण, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और वन विभाग से जुड़े विषयों को सदन में उठाया। विभागों की योजनाओं, कामकाज और अनुदान से संबंधित मुद्दों पर सदस्यों ने सरकार से सवाल किए और अपनी मांगें रखीं।

पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर मुख्यमंत्री का जवाब

सदन में सोमवार को सबसे महत्वपूर्ण चर्चा पुलिस एवं अग्निशमन विभाग की अनुदान मांगों को लेकर रही। इस पर मुख्यमंत्री विजय ने सरकार की ओर से जवाब दिया। मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान ही द्रमुक सदस्यों ने अपनी बात रखने की मांग शुरू कर दी। द्रमुक विधायकों का कहना था कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। सदस्यों की ओर से लगातार विरोध और हंगामा किए जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान यदि द्रमुक सदस्य शांत रहते, तो उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता। हालांकि, सदस्यों के लगातार विरोध के बीच अध्यक्ष ने तत्काल उन्हें बोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद द्रमुक सदस्यों ने इस फैसले के खिलाफ नाराजगी जताई और सदन की कार्यवाही से बाहर निकलने का फैसला किया।

द्रमुक विधायकों ने किया वॉकआउट

अध्यक्ष की ओर से तत्काल बोलने की अनुमति नहीं मिलने के बाद द्रमुक सदस्यों ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। उनके सदन से बाहर जाने के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव देखने को मिला। द्रमुक सदस्यों के वॉकआउट के बावजूद मुख्यमंत्री विजय ने पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर अपना जवाब जारी रखा और विधानसभा की कार्यवाही निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती रही। वॉकआउट को विधानसभा सत्र के अंतिम चरण में विपक्ष की ओर से सरकार के खिलाफ विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सोमवार की कार्यवाही में विधायी और वित्तीय कामकाज भी जारी रहा और सरकार ने महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए।

मंगलवार को समाप्त होगा विधानसभा सत्र

तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा सत्र मंगलवार को समाप्त होने वाला है। सत्र के अंतिम दिन कई महत्वपूर्ण विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा प्रस्तावित है। इनमें सामान्य प्रशासन, राज्य विधानसभा, राज्यपाल एवं मंत्रिपरिषद, वित्त विभाग, योजना एवं विकास विभाग तथा पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित अनुदान मांगें शामिल हैं।

अंतिम दिन इन विभागों से जुड़े वित्तीय प्रावधानों और मांगों पर सदन में चर्चा के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सत्र के अंतिम दिन भी सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर बहस होने की संभावना है। सोमवार की कार्यवाही में जहां सरकार ने तीन संशोधन विधेयक पेश कर विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाया, वहीं द्रमुक के वॉकआउट ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। मुख्यमंत्री विजय के जवाब के दौरान बोलने का अवसर नहीं मिलने को लेकर विपक्ष की नाराजगी ने सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया।

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