कर्नाटक में किसान कर्ज माफी पर सियासत तेज, आर. अशोका ने सीएम शिवकुमार पर साधा निशाना

खबर सार :-

कर्नाटक में किसान कर्ज माफी को लेकर सियासत तेज है। आर. अशोका ने सीएम डीके शिवकुमार पर केंद्र पर जिम्मेदारी डालने का आरोप लगाते हुए कर्ज माफी और राहत की मांग की।
किसान कर्ज माफी पर सियासत तेज, कर्ज माफी और राहत की मांग

खबर विस्तार : -

बेंगलुरु: कर्नाटक में किसानों की कर्ज माफी और सूखा प्रभावित इलाकों में राहत को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के वरिष्ठ नेता आर. अशोका ने शनिवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब राज्य के किसान कर्ज माफी और राहत की मांग कर रहे हैं, तब इसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार पर डालना राज्य सरकार की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है।

आर. अशोका ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से मांग की कि राज्य सरकार पहले अपने स्तर पर किसानों के कर्ज माफ करने की पहल करे और सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल राहत उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्या का समाधान करने के लिए राज्य सरकार को केंद्र की ओर देखने के बजाय अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी चाहिए।

'केंद्र की ओर उंगली उठाना कैसा शासन'

भाजपा नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री शिवकुमार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब किसान कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं तो केंद्र सरकार की ओर उंगली उठाना कैसा शासन है। अशोका ने कहा कि अतीत में विभिन्न राज्य सरकारों ने, जिनमें कर्नाटक की कांग्रेस सरकारें भी शामिल रही हैं, जरूरत के समय किसानों के कर्ज माफ किए और उन्हें आर्थिक सहायता दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए केंद्र सरकार का सहारा ले रही है। अशोका ने इसे किसानों के प्रति गैरजिम्मेदाराना रवैया करार देते हुए कहा कि राज्य सरकार को पहले अपनी जिम्मेदारियां निभानी चाहिए और उसके बाद ही केंद्र से अतिरिक्त सहायता की मांग करनी चाहिए।

चुनावी वादों पर भी सरकार को घेरा

आर. अशोका ने कांग्रेस के 2023 विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में किसानों से किए गए वादों को लेकर भी मुख्यमंत्री शिवकुमार और राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि घोषणापत्र में किए गए 1.50 लाख करोड़ रुपये के 'कृषि सर्वोदय निधि' के वादे का क्या हुआ। उन्होंने 5,000 करोड़ रुपये के स्थायी प्राकृतिक आपदा कोष और किसानों को 3 लाख से 10 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के वादे पर भी सरकार से जवाब मांगा। अशोका ने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों के सामने बड़ेबड़े वादे रखे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को पूरा करने के बजाय अब केंद्र सरकार पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की जा रही है।

 भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार के पास किसानों को राहत देने के लिए पर्याप्त इच्छाशक्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों से किए गए वादों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि घोषणापत्र में घोषित योजनाओं के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

5,000 करोड़ के आपदा कोष से मुआवजे की मांग

आर. अशोका ने राज्य सरकार से मांग की कि कांग्रेस के घोषणापत्र में वादा किए गए 5,000 करोड़ रुपये के स्थायी प्राकृतिक आपदा कोष के तहत प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि सूखे और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और उन्हें तत्काल सरकारी सहायता की आवश्यकता है।

उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि पहले राज्य सरकार अपने हिस्से की जिम्मेदारियां पूरी करे और उसके बाद केंद्र सरकार से सहायता के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात करे। अशोका के मुताबिक, किसानों को तत्काल राहत चाहिए, न कि केवल घोषणाएं।

हवाई सर्वेक्षण को लेकर भी सवाल

आर. अशोका ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी परिस्थितियों में हवाई सर्वेक्षण का अपना महत्व हो सकता है, लेकिन सूखे और दरार पड़े खेतों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए मुख्यमंत्री को जमीन पर जाकर किसानों से सीधे संवाद करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या हेलीकॉप्टर से किसानों की परेशानी को वास्तव में समझा जा सकता है। अशोका ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे प्रभावित किसानों के खेतों में जाएं, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाएं कि सरकार उनकी मदद करेगी।

बल्लारी, विजयनगर और बागलकोट का जिक्र

भाजपा नेता ने विशेष रूप से बल्लारी, विजयनगर और बागलकोट के किसानों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में किसानों को तत्काल राहत की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के बीच जाने के बजाय केवल हवाई सर्वेक्षण और प्रचार तक सीमित दिखाई दे रही है। अशोका ने हेलीकॉप्टर के किराए और ईंधन पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल उठाया। उनका दावा था कि इस तरह खर्च होने वाली राशि को प्रभावित किसान परिवारों को राहत देने में इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे जमीन पर उतरकर किसानों की समस्याओं का सामना करें।

कर्नाटक में किसान कर्ज माफी, सूखा राहत और चुनावी वादों को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच राज्य सरकार पर अब किसानों के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। वहीं, आर. अशोका के आरोपों के बाद इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

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