खड़गे के कार्यक्रम के बाद ‘शुद्धिकरण’ मामले में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ FIR, जांच के लिए भेजेगी कर्नाटक पुलिस

खबर सार :-

मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान मामले में कर्नाटक पुलिस ने महेंद्र भट्ट समेत अन्य के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की। मामला जांच के लिए उत्तराखंड भेजा जाएगा।
‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान मामले में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ FIR

खबर विस्तार : -

बेंगलुरु: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उत्तराखंड दौरे के बाद एक सार्वजनिक मैदान में कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ को लेकर दर्ज जीरो एफआईआर अब उत्तराखंड पुलिस को भेजी जाएगी। कर्नाटक पुलिस ने शनिवार को बताया कि बेंगलुरु में दर्ज की गई एफआईआर को घटनास्थल के आधार पर उत्तराखंड के संबंधित अधिकारियों को आगे की जांच के लिए स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।

यह मामला उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से जुड़ा है। आरोप है कि खड़गे के एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद नैनीताल जिले के रामलीला मैदान में कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया। शिकायतकर्ता ने इसे जाति आधारित भेदभाव की धारणा को बढ़ावा देने वाला कृत्य बताया है।

विधान सौधा थाने में दर्ज हुई जीरो FIR

मामले में आदिवासी कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति विभाग प्रकोष्ठ के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा की शिकायत के आधार पर बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस के मुताबिक, रामप्पा ने 31 अगस्त को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत पर कानूनी राय लेने के बाद मामला दर्ज किया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नैनीताल जिले के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था। उनके कार्यक्रम के बाद वहां कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ नामक अनुष्ठान किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस अनुष्ठान के पीछे यह जातिवादी धारणा व्यक्त की गई कि खड़गे की मौजूदगी के कारण सार्वजनिक स्थान ‘अपवित्र’ हो गया था। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं और अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। रामप्पा ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधि अनुसूचित जाति समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण सोच को दर्शाती है।

भाजपा नेताओं पर समर्थन का आरोप

रामप्पा की शिकायत में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों पर मीडिया में दिए गए बयानों के माध्यम से कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान का बचाव और समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का तर्क है कि इस तरह के सार्वजनिक बयान केवल किसी घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं हैं, बल्कि जाति आधारित भेदभाव के कथित कृत्य को सार्वजनिक रूप से समर्थन और राजनीतिक स्वीकृति देने के समान हैं। कर्नाटक पुलिस ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत जीरो एफआईआर दर्ज की है। हालांकि, एफआईआर दर्ज होना आरोपों की पुष्टि नहीं करता। मामले में आगे की जांच के दौरान आरोपों, संबंधित बयानों और घटना की परिस्थितियों की जांच की जाएगी।

उत्तराखंड पुलिस को भेजा जाएगा मामला

कर्नाटक पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, चूंकि कथित घटना उत्तराखंड में हुई है, इसलिए जीरो एफआईआर को जल्द ही वहां के संबंधित पुलिस अधिकारियों को भेजा जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड पुलिस मामले को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। जीरो एफआईआर की व्यवस्था के तहत किसी भी पुलिस स्टेशन को घटना के स्थानीय क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना शिकायत दर्ज करने की अनुमति होती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले को उस पुलिस थाने या जांच एजेंसी को स्थानांतरित किया जाता है, जिसके अधिकार क्षेत्र में कथित अपराध हुआ है। इस मामले में भी बेंगलुरु पुलिस ने प्रारंभिक स्तर पर शिकायत दर्ज की है, जबकि कथित घटना उत्तराखंड में होने के कारण आगे की जांच वहां की पुलिस द्वारा किए जाने की संभावना है।

खड़गे के पत्र के बाद सामने आया घटनाक्रम

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर उत्तराखंड में कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठाए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, खड़गे ने अपने पत्र में कहा था कि घटना को 24 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने नड्डा के उस आश्वासन का भी उल्लेख किया कि मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। खड़गे ने कथित घटना को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए भाजपा नेतृत्व से इस मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की थी। अब कर्नाटक पुलिस द्वारा जीरो एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद मामले की जांच उत्तराखंड तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तराखंड पुलिस को एफआईआर मिलने के बाद शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित अनुष्ठान, भाजपा नेताओं के बयानों और संबंधित परिस्थितियों की जांच करनी होगी।

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