Did You Know: तंबाकू की खेती से अफ्रीका में बढ़ रहा संकट, एक तरफ फसल का विस्तार, तो दूसरी तरफ बढ़ा सिगरेट का आयात बिल

खबर सार :-

विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर तंबाकू की खेती घटने के बावजूद अफ्रीका में इसमें 9% की वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की सेहत और पर्यावरण पर संकट गहरा रहा है।
अफ्रीका में तंबाकू की खेती बढ़ी, सिगरेट आयात बिल दोगुना हुआ

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक नए विश्लेषण ने अफ्रीका महाद्वीप में तंबाकू की बढ़ती खेती को लेकर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। एक तरफ जहां पूरी दुनिया में तंबाकू की पत्तियों के उत्पादन में लगातार कमी आ रही है, वहीं अफ्रीकी देशों में इसका उलट रुझान देखने को मिल रहा है। साल 2012 से 2024 के बीच वैश्विक स्तर पर उत्पादन लगभग 19 प्रतिशत घटा है, जबकि इसी अवधि में अफ्रीका में तंबाकू उत्पादन 9 प्रतिशत बढ़ा है। साल 2024 में इस महाद्वीप ने 6.39 लाख टन से अधिक तंबाकू का उत्पादन किया, जो दुनिया के कुल उत्पादन का करीब 11 प्रतिशत है।

तंबाकू उत्पादन बढ़ा, लेकिन सिगरेट आयात का खर्च भी हुआ दोगुना

अजीब स्थिति यह है कि भारी मात्रा में कच्चा तंबाकू उगाने और उसका निर्यात करने के बावजूद अफ्रीकी देशों को तैयार सिगरेट खरीदने पर पहले से कहीं अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। समीक्षा अवधि के दौरान महाद्वीप का सिगरेट आयात बिल 83.3 करोड़ डॉलर से बढ़कर 177 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है। डब्ल्यूएचओ की तंबाकू मुक्त पहल के प्रमुख डॉक्टर विनायक प्रसाद का कहना है कि यह केवल व्यापार या नियंत्रण का मामला नहीं है, बल्कि इसके गहरे तार सार्वजनिक स्वास्थ्य, किसानों की आजीविका और सतत विकास से जुड़े हुए हैं।

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किसानों की सेहत और पर्यावरण पर पड़ रहा गंभीर असर

तंबाकू की खेती का सबसे बड़ा खामियाजा सीधे तौर पर खेतों में काम करने वाले किसान और उनके परिवार भुगत रहे हैं। गीली तंबाकू पत्तियों के संपर्क में आने से किसानों को 'ग्रीन टोबैको सिकनेस' यानी हरे तंबाकू से होने वाली बीमारी का खतरा रहता है। इसके अलावा, कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल और तंबाकू की धूल के बीच काम करने से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम पैदा होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई गरीब परिवारों के बच्चों को घर की आजीविका चलाने के लिए इन खेतों में काम करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होती है और वे स्कूल से दूर हो जाते हैं।

आर्थिक लाभ का दावा कमजोर और वैकल्पिक फसलों की जरूरत

तंबाकू को अक्सर एक महत्वपूर्ण आर्थिक फसल माना जाता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ का विश्लेषण इस दावे पर भी सवाल खड़े करता है। रिपोर्ट के अनुसार, मलावी और जिम्बाब्वे जैसे कुछ चुनिंदा देशों को छोड़कर अधिकांश अफ्रीकी देशों के लिए तंबाकू का आर्थिक योगदान काफी सीमित है, जबकि इसके मुकाबले स्वास्थ्य और पर्यावरण को चुकानी पड़ने वाली कीमत बहुत बड़ी है। तंबाकू की खेती से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, वनों की कटाई हो रही है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ रहा है। डब्ल्यूएचओ ने देशों से अपील की है कि वे तंबाकू पर अपनी निर्भरता घटाएं और किसानों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ व वैकल्पिक आजीविका की तरफ ले जाएं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के तंबाकू नियंत्रण संबंधी समझौते के अनुच्छेद 17 और 18 के अंतर्गत देशों से यह आह्वान किया गया है कि वे तंबाकू किसानों और श्रमिकों के लिए आर्थिक रूप से बेहतर वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा दें। वर्तमान रिपोर्ट बताती है कि केवल जिम्बाब्वे, मलावी, तंजानिया, मोजाम्बिक और युगांडा जैसे कुछ ही देश अफ्रीका में बड़े पैमाने पर तंबाकू का उत्पादन कर रहे हैं, जहां पूर्वी अफ्रीका अकेले कुल उत्पादित पत्तियों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है।

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