Did you Know : आसमान में बिखरते रंग, जानिए इंद्रधनुष बनने का पूरा विज्ञान, इसका इतिहास और अनोखे वैज्ञानिक तथ्य

खबर सार :-

इंद्रधनुष बनने के वैज्ञानिक कारण, इसके सातों रंगों का क्रम, आकार से जुड़े रहस्य और दुनिया भर के रोचक तथ्यों के बारे में विस्तार से पढ़ें।
इंद्रधनुष कैसे बनता है? जानें इसके सातों रंग और वैज्ञानिक तथ्य

खबर विस्तार : -

Lucknow : बारिश के मौसम में सूर्य की किरणों और पानी की बूंदों के संगम से आसमान में एक सुंदर रंगीन धनुष जैसी आकृति बन जाती है, जिसे हम इंद्रधनुष कहते हैं। देखने में यह एक साधारण घटना लगती है, लेकिन Did you Know... इसके पीछे भौतिक विज्ञान के नियम काम करते हैं। आमतौर पर लोग इसे आधा गोल देखते हैं और मानते हैं कि यह इतना ही होता है। हालांकि, विज्ञान के अनुसार इंद्रधनुष हमेशा पूरा गोलाकार होता है। जमीन पर मौजूद दर्शक को पृथ्वी की सतह और दृष्टि के कोण के कारण यह केवल आधा ही दिखाई देता है। यदि कोई व्यक्ति हवा में उड़ते हुए हवाई जहाज से इसे देखेगा, तो उसे यह एक पूरा गोल घेरा दिखाई देगा।

प्राकृतिक रूप से इंद्रधनुष देखने का एक खास समय और स्थान होता है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि दिन के दौरान सूर्य की रोशनी के अंतिम चार घंटों में इसे देखे जाने की संभावना सबसे अधिक होती है। इसके अलावा, जिन क्षेत्रों में हवा में पानी की बूंदें अधिक मात्रा में मौजूद रहती हैं, जैसे कि झरनों के आसपास के इलाके और भूमध्य रेखा के पास वाले क्षेत्र, वहां यह घटना सबसे ज्यादा बार घटित होती है। अमेरिका का हवाई राज्य इस मामले में दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जहां मौसम की खास अनुकूलता के कारण सबसे अधिक इंद्रधनुष दिखाई देते हैं। इसी विशेषता के कारण हवाई को 'द रेनबो स्टेट' (The Rainbow State) का नाम दिया गया है।

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सूर्य के प्रकाश और जल बूंदों का वैज्ञानिक संगम

इंद्रधनुष बनने के पीछे का मुख्य कारण सूर्य की रोशनी का अपवर्तन (Refraction) और परावर्तन (Reflection) है। यद्यपि सूर्य का प्रकाश देखने में सफेद लगता है, लेकिन यह वास्तव में सात अलग-अलग रंगों का मिश्रण होता है। जब बारिश के समय या उसके ठीक बाद सूर्य की किरणें हवा में तैरती लाखों बारीक बूंदों में प्रवेश करती हैं, तो ये बूंदें एक छोटे कांच के प्रिज्म की तरह काम करती हैं। प्रकाश किरणें जब बूंद में प्रवेश करती हैं, तो वे झुक जाती हैं यानी अपवर्तित होती हैं। इसके बाद बूंद के पिछले हिस्से से टकराकर परावर्तित होती हैं और बाहर निकलते समय सातों रंगों में बंट जाती हैं। यही प्रक्रिया जब एक साथ अनगिनत बूंदों में होती है, तब आसमान में सातों रंगों का एक विशाल घेरा दिखाई देने लगता है।

इंद्रधनुष बनने की प्रक्रिया और उसके रंगों का क्रम

इंद्रधनुष में दिखाई देने वाले सातों रंगों का एक निश्चित क्रम होता है। इस क्रम में लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो (गहरा नीला) और बैंगनी रंग शामिल हैं। अंग्रेजी में इस क्रम को याद रखने के लिए "ROY G BIV" शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। रंगों के इस इतिहास में एक दिलचस्प मोड़ 1666 में आया था, जब प्रसिद्ध वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन ने अपने प्रयोगों के आधार पर इसमें बैंगनी और नारंगी रंग को जोड़ा। इससे पहले तक इंद्रधनुष में केवल पांच रंग ही माने जाते थे। प्राचीन मान्यताओं की बात करें तो चीन में आज भी पारंपरिक रूप से इंद्रधनुष में केवल पांच रंग स्वीकार किए जाते हैं।

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इंद्रधनुष में रंगों का निश्चित क्रम (ऊपर से नीचे)

  • लाल (Red)                                           
  • नारंगी (Orange)                                     
  • पीला (Yellow)                                         
  • हरा (Green)                                           
  • नीला (Blue)                                          
  • इंडिगो (Indigo)                                       
  • बैंगनी (Violet)

इस प्राकृतिक घटना का वैज्ञानिक आधार सबसे पहले 1637 में फ्रांसीसी दार्शनिक और गणितज्ञ रने डेकार्ट (René Descartes) ने दुनिया के सामने रखा था। उन्होंने ही सबसे पहले यह स्पष्ट किया था कि जब सूर्य की रोशनी बारिश की बूंदों से टकराकर वापस लौटती है, तब यह रंगीन दृश्य बनता है। इंद्रधनुष देखने के लिए एक बुनियादी शर्त यह है कि देखने वाले व्यक्ति की पीठ हमेशा सूर्य की तरफ होनी चाहिए। इसके अलावा, चंद्रमा की रोशनी से बनने वाले बेहद दुर्लभ इंद्रधनुष को 'मूनबो' (Moonbow) कहा जाता है, जबकि कोहरे की वजह से बनने वाले हल्के रंग के इंद्रधनुष को 'फॉगबो' (Fogbow) के नाम से जाना जाता है।

दोहरे इंद्रधनुष और दृष्टि के कोण से जुड़े तथ्य

आसमान में कभी-कभी एक साथ दो, तीन या चार इंद्रधनुष भी बनते हुए देखे जा सकते हैं। ऐसा तब संभव होता है जब सूर्य का प्रकाश बारिश की बूंदों के भीतर एक से अधिक बार टकराकर परावर्तित होता है। जब आसमान में दोहरा (डबल) इंद्रधनुष बनता है, तो उसमें एक विशेष वैज्ञानिक बदलाव देखा जाता है। दूसरे या ऊपरी इंद्रधनुष में रंगों का क्रम पहले यानी मुख्य इंद्रधनुष के बिल्कुल उल्टा हो जाता है। ऐसी स्थिति में दूसरे इंद्रधनुष में सबसे ऊपर लाल रंग के बजाय बैंगनी रंग दिखाई देता है और लाल रंग सबसे नीचे होता है। दो इंद्रधनुषों के बीच जो गहरा या धुंधला क्षेत्र दिखाई देता है, उसे वैज्ञानिक भाषा में 'अलेक्जेंडर बैंड' कहा जाता है। इस क्षेत्र को सबसे पहले 200 ईस्वी में ग्रीक दार्शनिक अलेक्जेंडर ने पहचाना और परिभाषित किया था।

इंद्रधनुष से जुड़ा एक और अनूठा सच यह है कि दुनिया में कोई भी दो व्यक्ति कभी भी बिल्कुल एक जैसा इंद्रधनुष नहीं देख सकते। यदि दो लोग पास-पास भी खड़े हैं, तो भी दोनों की आंखों तक प्रकाश का कोण अलग-अलग बूंदों से होकर पहुंचता है। चूंकि हर बूंद अपना अलग छोटा प्रकाश पुंज बनाती है, इसलिए देखने वाले के स्थान के हिसाब से उसका इंद्रधनुष भी अलग बनता है। इसके अलावा सूर्य की स्थिति का भी इस पर सीधा असर पड़ता है। जब सूर्य आसमान में अधिक ऊंचाई पर होता है, तो इंद्रधनुष नीचे की तरफ बनता है और जब सूर्य नीचे यानी क्षितिज के पास होता है, तो इंद्रधनुष आसमान में अधिक ऊंचाई पर दिखाई देता है। इसे कभी भी छू पाना भौतिक रूप से असंभव है क्योंकि यह कोई ठोस वस्तु नहीं, बल्कि केवल एक प्रकाशीय भ्रम (Optical Illusion) है।

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सौर मंडल में इंद्रधनुष और इससे जुड़ी संस्कृतियां

हमारी पृथ्वी के अलावा हमारे सौर मंडल में केवल एक और ऐसी जगह है जहां इंद्रधनुष बनना संभव माना गया है। वह जगह है शनि ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा 'टाइटन'। हालांकि, टाइटन पर पानी की बूंदें नहीं हैं, इसलिए वहां जब सूर्य की रोशनी तरल मीथेन (Liquid Methane) की बूंदों से टकराकर परावर्तित होती है, तब इंद्रधनुष बनता है। टाइटन पर बनने वाले इस इंद्रधनुष का कोण पृथ्वी के 42 डिग्री के मुकाबले लगभग 49 डिग्री का होता है। इंद्रधनुष को देखने के लिए प्रकाश की तरंगों की दिशा भी मायने रखती है। यदि कोई व्यक्ति पोलराइज्ड चश्मा पहनकर उसे सीधा करके देखेगा, तो प्रकाश की तरंगें रुक जाने के कारण उसे इंद्रधनुष दिखाई ही नहीं देगा।

प्राचीन समय से ही दुनिया की विभिन्न सभ्यताओं में इंद्रधनुष को लेकर अलग-अलग धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं रही हैं।

  • यूनानी पौराणिक कथाएं: प्राचीन यूनान में माना जाता था कि इंद्रधनुष वास्तव में स्वर्ग और पृथ्वी को जोड़ने वाला एक रास्ता या पुल है।
  • सर्बिया की प्राचीन मान्यताएं: सर्बिया के प्राचीन लोग इसे 'तूफान के देवता' का धनुष मानते थे।
  • भाषा विज्ञान: 'इंद्रधनुष' के लिए अंग्रेजी शब्द 'Rainbow' का मूल लैटिन भाषा के शब्द 'arcus pluvius' में मिलता है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है "बरसात की चाप" या "बरसात का धनुष"।

सांस्कृतिक विविधता और शांति के प्रतीक के रूप में दक्षिण अफ्रीका को 'रेनबो नेशन' (Rainbow Nation) की उपाधि भी दी गई है।

इंद्रधनुष से जुड़े अध्ययनों का इतिहास बहुत पुराना रहा है। आधुनिक विज्ञान से पहले लोग इसे केवल दैवीय घटना या मौसम का संकेत मानते थे। इतिहास में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सबसे लंबे समय तक लगातार दिखाई देने वाले इंद्रधनुष का रिकॉर्ड 14 मार्च 1994 को बना था। यह घटना इंग्लैंड के 'शेफील्ड' (Sheffield) शहर में दर्ज की गई थी, जहां लगातार 6 घंटे तक यानी सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 3:00 बजे तक आसमान में इंद्रधनुष दिखाई देता रहा था। सत्रहवीं शताब्दी में रने डेकार्ट और आइजैक न्यूटन द्वारा किए गए शोधों के बाद इंद्रधनुष का अध्ययन खगोलशास्त्र और प्रकाशिकी (Optics) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। न्यूटन के प्रिज्म प्रयोगों ने यह सिद्ध किया था कि सफेद प्रकाश वास्तव में रंगों का एक स्पेक्ट्रम है। यही खोज आगे चलकर आधुनिक मौसम विज्ञान में प्रकाश और वायुमंडलीय परिस्थितियों के आपसी संबंधों को समझने का आधार बनी। आज भी वैज्ञानिक वायुमंडल में मौजूद नमी, प्रदूषण और बूंदों के आकार का अध्ययन करने के लिए इन प्रकाशीय घटनाओं का विश्लेषण करते हैं।

FAQ...

1. इंद्रधनुष कैसे बनता है?

जब सूर्य की रोशनी हवा में मौजूद पानी की बूंदों से टकराकर मुड़ती (अपवर्तित) और वापस परावर्तित होती है, तो प्रकाश सातों रंगों में बंट जाता है और इंद्रधनुष बनता है।

2. इंद्रधनुष में कितने और कौन-से रंग होते हैं?

इंद्रधनुष में 7 रंग होते हैं: लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो (गहरा नीला) और बैंगनी।

3. क्या इंद्रधनुष को छूना या इसके पास जाना संभव है?

नहीं, इंद्रधनुष कोई भौतिक वस्तु नहीं है बल्कि दृष्टि और प्रकाश से बनने वाला एक भ्रम है, इसलिए इसे छुआ नहीं जा सकता।

4. क्या इंद्रधनुष हमेशा आधा गोल ही होता है?

नहीं, इंद्रधनुष वास्तव में पूरा गोल होता है। जमीन पर खड़े रहने के कारण हमें आधा दिखाई देता है, लेकिन हवाई जहाज से यह पूरा गोल दिखता है।

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