Ancient Underground River : गंगा-यमुना के नीचे मिली 200 किलोमीटर लंबी गुप्त नदी, क्या यही है सदियों से गायब 'सरस्वती'?

खबर सार :-
Ancient Underground River : प्रयागराज से कानपुर के बीच भूगर्भ में बह रही एक प्राचीन विशाल नदी की खोज ने विज्ञान और आस्था दोनों जगत में तहलका मचा दिया है। हेलीबोर्न तकनीक से खोजी गई इस नदी से सुधरेगा देश का वाटर रिचार्ज सिस्टम। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Ancient Underground River : गंगा-यमुना के नीचे मिली 200 किलोमीटर लंबी गुप्त नदी, क्या यही है सदियों से गायब 'सरस्वती'?
खबर विस्तार : -

प्रयागराज: भारतीय उपमहाद्वीप की कोख में न जाने कितने ऐतिहासिक और भूगर्भीय रहस्य दबे पड़े हैं। सनातन आस्था में सदियों से यह अटूट विश्वास रहा है कि प्रयागराज के पावन तट पर गंगा (Ganga) और यमुना (Yamuna) के साथ एक और रहस्यमयी नदी का मिलन होता है, जिसे हम सरस्वती कहते हैं। हालांकि, आधुनिक विज्ञान लंबे समय तक इसे केवल एक पौराणिक कल्पना या रूपक ही मानता रहा। लेकिन अब देश के शीर्ष भू-वैज्ञानिकों ने एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने वैज्ञानिक गलियारों से लेकर सामाजिक हलकों तक एक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश के विशाल मैदानी भूभाग में सतह के ठीक नीचे एक प्राचीन विशालकाय नदी के बहने के पक्के सबूत मिले हैं।

Ancient River Discovery Prayagraj Kanpur : जमीन के सीने में छिपी मिली 200 किलोमीटर लंबी जलधारा (Paleochannel)

जमीन के सीने में छिपी मिली 200 किलोमीटर लंबी जलधारा हैदराबाद स्थित सीएसआईआर-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-NGRI) के वैज्ञानिकों ने कड़ी मशक्कत के बाद प्रयागराज से लेकर कानपुर तक लगभग 200 किलोमीटर की लंबाई में फैले एक विशालकाय प्राचीन नदी मार्ग यानी पैलियो-चैनल (Paleochannel) को ढूंढ निकाला है। यह रहस्यमयी प्राकृतिक ढांचा जमीन की ऊपरी परत से महज 10 से 15 मीटर की गहराई पर स्थित है। वैज्ञानिकों का स्पष्ट मत है कि यह कोई साधारण प्राचीन नाला या समय के साथ सूख चुकी कोई छोटी-मोटी उपनदी नहीं है। इसके बजाय, यह सुदूर अतीत में स्वतंत्र रूप से बहने वाली एक अत्यंत ताकतवर और बड़ी नदी प्रणाली का हिस्सा थी। यह खोजी गई Ancient Underground River आज भी भूगर्भ के भीतर अपना वजूद बनाए हुए है, जिससे पूरे उत्तर भारत के नदी विज्ञान की परिभाषा बदल सकती है।

Ancient River Discovery Prayagraj Kanpur : अत्याधुनिक तकनीक से खुला कुदरत का गुप्त तहखाना

इस युगांतरकारी खोज को अंजाम देने के लिए वैज्ञानिकों ने पारंपरिक तौर-तरीकों से हटकर बेहद आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। इसके तहत हेलीबोर्न ट्रांजिएंट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तकनीक (Heliborne Transient Electromagnetic Technology) का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में एक विशेष हेलिकॉप्टर के निचले हिस्से में ताकतवर विद्युत-चुम्बकीय सेंसर (Electromagnetic Sensors) लगाए गए, जिसने हवा में उड़ते हुए ही जमीन के भीतर कई मीटर गहराई तक की परतों की एक्स-रे जैसी तस्वीरें खींच लीं। इस हवाई सर्वेक्षण से जो डेटा मिला, उसे पूरी तरह पुख्ता करने के लिए जमीन पर कई स्थानों पर पुष्टिकारक ड्रिलिंग (Confirmatory Drilling) की गई।

इस बेहद जटिल और महत्वपूर्ण परियोजना की कमान संभाल रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि इस Ancient Underground River की भौतिक उपस्थिति की अब पूरी तरह से पुष्टि हो चुकी है। जमीन के भीतर किए गए वेधन कार्यों और मिट्टी के नमूनों के परीक्षण में कोई भी संदेह बाकी नहीं रह गया है। यह प्राचीन धारा आज भी मिट्टी और रेत के दवाब के बीच अपने भीतर पानी को सहेजने की असीम क्षमता रखती है।

Ancient River Discovery Prayagraj Kanpur : गंगा और यमुना के समानांतर एक तीसरी महाशक्ति

इस खोज का सबसे रोमांचक पहलू यह है कि इस भूमिगत नदी की चौड़ाई चार से पांच किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। चौड़ाई का यह पैमाना वर्तमान समय की विशालकाय गंगा और यमुना नदियों के बिल्कुल बराबर बैठता है। भूवैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरान इस बात ने किया कि इस दबी हुई नदी का आधार स्तर और गहराई ठीक वैसी ही है जैसी उसके ऊपर बहने वाली गंगा-यमुना की है।

डॉ. सुभाष चंद्र के अनुसार, यदि यह नदी केवल गंगा या यमुना का कोई पुराना छूटा हुआ मोड़ या रास्ता होती, तो भूगर्भीय परतों में इसका स्तर अलग गहराई पर दिखाई देता। परंतु तीनों धाराओं का आधार स्तर एक समान होना यह साबित करता है कि प्रागैतिहासिक काल में इस पूरे दोआब क्षेत्र (Doab Region) में दो नहीं, बल्कि तीन विशाल नदियां एक साथ समानांतर रूप से अपनी यात्रा तय करती थीं। यह Ancient Underground River उस कालखंड में धरातल पर पूरी ठसक के साथ बहती रही होगी।

Ancient River Discovery Prayagraj Kanpur : दशकों की रिसर्च के बाद सामने आया पूरा सच

इस अभूतपूर्व अभियान की नींव आज से करीब चौदह साल पहले साल 2012 में रखी गई थी, जब भारत सरकार ने देश के भीतर छिपे पानी के विशाल भंडारों का पता लगाने के लिए पहली बार हवाई विद्युत-चुम्बकीय प्रणाली का उपयोग करने का फैसला किया। शुरुआती दौर में प्रयागराज और कौशाम्बी के बीच करीब 45 किलोमीटर की लंबाई में इस पैलियो-चैनल की झलक मिली थी। शुरुआती कामयाबी से उत्साहित वैज्ञानिकों के इस पूरे शोध को साल 2021 के आखिरी महीने में दुनिया की बेहद प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका 'जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स' (Geophysical Research Letters) में स्थान मिला, जिसने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दे दी।

इसके बाद, देश की नदियों को स्वच्छ करने के लिए प्रतिबद्ध 'नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा' (National Mission for Clean Ganga) ने इस प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया। एक त्रिपक्षीय ऐतिहासिक समझौते के तहत कौशाम्बी से लेकर कानपुर तक हजारों किलोमीटर का हवाई डेटा जुटाया गया, जिसके बाद साल 2022 में इस 200 किलोमीटर लंबी Ancient Underground River का पूरा नक्शा देश के सामने आ सका।

Ancient River Discovery Prayagraj Kanpur : सूखते भारत के लिए संजीवनी बनेगी यह गुप्त नदी

यह खोज सिर्फ इतिहास की किताबों या पुरातत्व प्रेमियों की उत्सुकता शांत करने तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में यह भयंकर जल संकट (Water Crisis) से जूझ रहे उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगी। हम सभी जानते हैं कि अंधाधुंध दोहन के कारण गंगा के मैदानी क्षेत्रों में जमीन के नीचे का पानी का स्तर बहुत तेजी से पाताल की ओर जा रहा है। ऐसे में यह प्राचीन नदी मार्ग एक विशाल प्राकृतिक जलभृत यानी एक्विफर (Aquifer) के तौर पर काम करेगा।

चूंकि इस चैनल के भीतर की भूगर्भीय संरचना बेहद छिद्रयुक्त (Porous) और पारगम्य (Permeable) है, इसलिए इसमें पानी को सोखने और उसे अपने भीतर जमा रखने की गजब की क्षमता है। इसकी घुमावदार बनावट बिल्कुल वैसी ही है जैसी किसी जिंदा नदी की होती है। वैज्ञानिकों ने इस पूरे मार्ग में छह ऐसी रणनीतिक जगहों की पहचान की है, जहां से कृत्रिम भूजल पुनर्भरण यानी मैनेज्ड एक्विफर रिचार्ज (Managed Aquifer Recharge) के जरिए सतह का पानी सीधे इस Ancient Underground River के पेट में उतारा जाएगा। ऐसा होने से न केवल यह गुप्त नदी पानी से लबालब हो जाएगी, बल्कि इसके प्रभाव से आसपास की सूख रही गंगा और यमुना के भूमिगत जल भंडारों में भी अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।

Ancient River Discovery Prayagraj Kanpur : शहरी आबादी का अवरोध और अदृश्य सरस्वती का रहस्य

इस व्यापक खोज के बाद भी कुछ रहस्य ऐसे हैं जिन पर से पर्दा उठना अभी बाकी है। दरअसल, जब वैज्ञानिक प्रयागराज शहर के ठीक ऊपर से हेलिकॉप्टर के जरिए सर्वे करने की कोशिश कर रहे थे, तब घनी आबादी, कंक्रीट के ऊंचे मकान, और आसमान में फैले बिजली के तारों के जाल के कारण चुंबकीय सेंसरों ने काम करना बंद कर दिया। यही वजह है कि वर्तमान में यह Ancient Underground River प्रयागराज के मुख्य संगम स्थल से करीब 25 किलोमीटर पहले तक ही कागजों पर पूरी तरह ट्रेस हो पाई है।

हालांकि, विज्ञानियों का स्पष्ट कहना है कि तकनीक की इस सीमा का मतलब यह कतई नहीं है कि यह नदी आगे नहीं जाती। इस बाधा को दूर करने के लिए संस्थान अब एक नई जमीनी तकनीक 'इलेक्ट्रिकल-फील्ड वेक्टर रेसिस्टिविटी इमेजिंग' (EVRI) पर काम कर रहा है, जो बहुत जल्द शहर की घनी आबादी के नीचे छिपे सच को भी स्क्रीन पर ला देगी।

इस खोज ने भारत में पौराणिक नदी सरस्वती के अस्तित्व पर जारी बहसों को फिर से जिंदा कर दिया है। हालांकि वैज्ञानिक समुदाय अभी बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और सीधे तौर पर इसे 'सरस्वती' का नाम देने से बच रहा है, लेकिन वे इस बात से इनकार भी नहीं कर पा रहे हैं कि यह रहस्यमयी धारा ठीक उसी भौगोलिक क्षेत्र में मिली है जिसका वर्णन हमारे प्राचीन वैदिक ग्रंथों में मिलता है। अब वैज्ञानिकों का अगला मिशन इस Ancient Underground River के पश्चिमी छोर का पीछा करना है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसका नाता सीधे हिमालय की बर्फीली चोटियों से था। यदि ऐसा साबित होता है, तो यह आधुनिक भारत के इतिहास की सबसे क्रांतिकारी वैज्ञानिक खोज मानी जाएगी।

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