Ebola virus outbreak: इबोला वायरस ने मचाया आतंक, अब तक 65 लोगों की मौत
खबर सार :-
Ebola virus outbreak: हंता वायरस फिर नोरोवायरस और अब इबोला वायरस ने अफ्रीका के दूसरे बड़े शहर में अपना कहर बरपाना शुरु कर दिया है। अब तक इसमें 65 लोगों की जान जा चुकी हैं और 246 लोग संदिग्ध हालत में पाए गए हैं। फिलहाल वायरस को लेकर आस-पास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।
खबर विस्तार : -
Ebola virus outbreak: हाल ही अफ्रीका से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कांगो शहर में इबोला वायरस में हमला बोला है। अफ्रीका के स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस की पुष्टि की है। इसमें अब तक 65 लोग अपनी जान गवां चुके हैं और 246 लोग संदिग्ध पाए गए हैं। कांगो में 17वीं बार इस वायरस ने अटैक किया है। बताया जा रहा है कि यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है और इसे काफी खतरनाक माना जाता है। इसके पड़ोसी देशों में दहशत का माहौल है।
खतरनाक और दुर्लभ बीमारी
जानकारों के मुताबिक इबोला काफी खतरनाक और दुर्लभ बीमारी मानी जाती है, जो एक इंसान से दूसरे इंसान में काफी तेजी से फैलती है। इसके फैलने का मुख्य कारण प्रभावित इंसान के खून, उल्टी के संपर्क में आने से फैलती है। अब तक इसको पूरी तरह से खत्म करने का इलाज नहीं खोजा गया है, लेकिन फिलहाल के लिए इसका वैक्सीन उपलब्ध है। अफ्रीका के सीडीसी के मुताबिक मोंगवालू और रवाम्पारा इलाकों से मामले सामने आई हैं, जिसके बाद से आस-पास के इलाकों में डर का माहौल बन गया है।
क्या है इबोला का इतिहास
इस बीमारी का लक्षण सबसे पहले कांगो में साल 1976 में पाया गया था। बात करें साल 2018 से 2020 की तो इसमें 1000 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। इसके बाद साल 2025 में इस बीमारी ने कांगो को तीन महीनों तक अपनी चपेट में रखा था और इसमे 43 लोगों की जान गई थी। साल 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला से मरने वालों की संख्या 11000 से ज्यादा थी।
मदद पहुंचाने में कठिनाई
कांगो के कई ऐसे प्रांत है, जहां पीड़ित लोगों तक मदद पहुंचाना काफी मुश्किल है। वहां की सड़कें काफी खराब हैं, जिस कारण मरीजों तक पहुंचने में काफी समय लग रहा है और यही कारण है कि मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। पिछले साल भी इसी तरह की दिक्कत का सामना करना पड़ा था। WHO की वैक्सीन को लोगों तक पहुंचाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, इस बार भी हालात वैसे ही हैं।
अन्य प्रमुख खबरें
-
मनाली का ऐतिहासिक हडिम्बा देवी मंदिर: इतिहास और खासियत
2026-10-01
-
किन्नर समुदाय से जुड़े 11 रोचक तथ्य और उनका सामाजिक जीवन
2026-09-28
-
कनाडा के अल्बर्टा में 70 साल बाद मिला चूहा, ‘रैट पेट्रोल’ सक्रिय
2026-09-26
-
माउंट एवरेस्ट नहीं, यह ज्वालामुखी है दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत
2026-09-25
-
1 मिनट के चुंबन से बर्न होती हैं 26 कैलोरी - हेल्थ रिपोर्ट
2026-09-23
-
कूचबिहार की प्राचीन पांडुलिपियां संरक्षण के अभाव में मिटने की कगार पर
2026-09-22
-
सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है टाई पहनना, जानिए क्या कहती है रिसर्च
2026-09-21
-
कन्नौज स्थापना दिवस 2025: इतिहास, इत्र विरासत और परफ्यूम टूरिज्म
2026-09-17
-
सार्वजनिक टॉयलेट के बाद हाथ न धोने की आदत पर क्या कहता है सर्वे!
2026-09-16
-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर जामदानी बुनाई से तैयार
2026-09-15
-
सूरत में दो वर्षों में 2,645 नेत्रदान, राज्य में 23% योगदान - स्वास्थ्य मंत्री का बयान
2026-09-11
-
जहां ज्वालामुखी के पास विराजे हैं विघ्नहर्ता, 700 साल से हो रही पूजा
2026-09-09
-
गुवा गोलीकांड की दर्दनाक कहानी, 46 साल बाद भी जिंदा है शहीदों की याद
2026-09-08
-
हैदराबाद से हिंद महासागर तक सुनामी पूर्व चेतावनी तंत्र की पूरी जानकारी
2026-09-07
-
हमीरपुर के मराठाकालीन मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम
2026-09-04