उज्जैन के महाकाल महालोक में जल्द लगेंगे लाल बलुआ पत्थर के सप्तऋषि, निर्माण कार्य अंतिम चरण में

खबर सार :-

उज्जैन के महाकाल महालोक में फाइबर मूर्तियों के स्थान पर राजस्थान के लाल बलुआ पत्थर से बनी सप्तऋषियों की भव्य और टिकाऊ प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, जिनका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।
उज्जैन महाकाल महालोक में स्थापित होंगी लाल बलुआ पत्थर की सप्तऋषि मूर्तियां

खबर विस्तार : -

उज्जैन: उज्जैन के विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित महाकाल महालोक की कलात्मक संरचना में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। परिसर के भीतर पहले स्थापित फाइबर निर्मित मूर्तियों के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब उनकी जगह बेहद मजबूत और लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले पाषाण शिल्प स्थापित किए जा रहे हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से संचालित इस परियोजना के तहत देश के नामचीन कलाकारों को जोड़ा गया है, जिनकी देखरेख में मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इन पाषाण कलाकृतियों को तैयार करने की जिम्मेदारी ओडिशा से आए पारंपरिक शिल्पकारों को सौंपी गई है। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रमुख कारीगर ईश्वर चंद्र महाराणा के नेतृत्व में लगभग तीस कुशल कारीगर इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इन सभी प्रतिमाओं के निर्माण के लिए विशेष रूप से राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से मंगाए गए लाल बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है, जिसकी मजबूती और स्थायित्व को ऐतिहासिक निर्माण कार्यों में परखा जा चुका है।

कारीगरी और शिल्प कार्य

उज्जैन के हरिफाटक क्षेत्र स्थित हाट बाजार में एक विशेष कार्यशाला के माध्यम से इन मूर्तियों को तराशा गया है। वर्तमान में अधिकांश कलाकृतियों का मुख्य निर्माण पूरा हो चुका है और केवल पेडस्टल तथा फिनिशिंग से जुड़े कार्य शेष बचे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अगले छह महीनों के भीतर इन सभी भव्य प्रतिमाओं को महाकाल लोक परिसर में पूरी विधिवत प्रक्रिया के साथ स्थापित कर दिया जाएगा।

परियोजना के तहत तैयार की जा रही इन विशालकृतियों में महर्षि कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज के साथ-साथ भगवान शिव और देवगुरु बृहस्पति की आकृतियां शामिल हैं। प्रत्येक सप्तऋषि की मूर्ति की ऊंचाई लगभग 15 फीट है। इन सभी आकृतियों को ध्यानमग्न, आशीर्वाद देने वाली और शांत मुद्राओं में गढ़ा गया है, जिससे आने वाले आगंतुकों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के अनूठे दर्शन हो सकें।

तीव्र आंधी-तूफान से  मूर्तियां हो गई थीं क्षतिग्रस्त

इस संपूर्ण बदलाव की पृष्ठभूमि मई 2023 में आए एक तीव्र आंधी-तूफान से जुड़ी है, जब मौसम की आपदा के चलते महाकाल लोक में स्थापित फाइबर की मूर्तियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। उस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद यह दीर्घकालिक निर्णय लिया गया कि भविष्य के लिए केवल उच्च गुणवत्ता वाले और स्थायी प्राकृतिक पत्थरों का ही उपयोग किया जाएगा। इसी नीति के तहत अब अयोध्या के राम मंदिर निर्माण में प्रयुक्त होने वाले पत्थर जैसी ही गुणवत्ता वाले बंशी पहाड़पुर के पाषाणों का चयन किया गया है।

निसंदेह इन स्थायी और कलात्मक मूर्तियों के लग जाने से महाकाल लोक की सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व में वृद्धि होगी। देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अब भगवान महाकाल के दर्शन के साथ-साथ प्राचीन सनातन ऋषि परंपरा और भारतीय ज्ञान की समृद्ध विरासत को भी नजदीक से अनुभव करने का अवसर प्राप्त होगा।

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