नवाबों से लेकर मुगल सल्तनत तक था मुर्शिदाबाद के जगत सेठ परिवार दबदबा, अब ऐतिहासिक बंगला पर्यटन सूची में शामिल
खबर सार :-
बंगाल के इतिहास में प्रभावशाली नामों में शामिल जगत सेठ परिवार के आवास को मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन ने पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल किया है और इसकी तस्वीरें उपलब्ध कराई हैं।
खबर विस्तार : -
मुर्शिदाबाद: जगत सेठ परिवार की ऐतिहासिक विरासत, जो बंगाल के इतिहास में दौलत, ताकत और राजनीति से जुड़े सबसे असरदार नामों में से एक है—एक बार फिर चर्चा में है। मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन ने जगत सेठ के घर को अपने ऑफिशियल टूरिज्म पोर्टल पर एक ऐतिहासिक टूरिस्ट साइट के तौर पर लिस्ट किया है। साइट से जुड़ी तस्वीरें और टूरिज्म से जुड़ी जानकारी भी प्रशासन की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है।
"जगत सेठ" नाम बंगाल के एक बहुत ताकतवर जैन व्यापारी और बैंकिंग परिवार से जुड़ा है। अपने ऑफिशियल रिकॉर्ड में, मुर्शिदाबाद ज़िला प्रशासन जगत सेठों को एक असरदार जैन परिवार बताता है। परिवार की जड़ें राजस्थान के नागौर इलाके से जुड़ी हैं। ऐतिहासिक कहानियों के मुताबिक, हीरानंद साह नाम के एक पूर्वज व्यापार और फाइनेंशियल कामों के सिलसिले में पटना आए थे। बाद में, परिवार के सदस्य बंगाल चले गए, और उनकी आर्थिक ताकत इतनी बढ़ गई कि मुगल और नवाबी दोनों राज के फाइनेंशियल सिस्टम में उनकी अहम जगह बन गई।
परिवार की पहचान बना टाइटल
परिवार के इतिहास में फतेह चंद का नाम खास अहमियत रखता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मुगल काल में उन्हें "जगत सेठ" का टाइटल दिया गया था। इसके बाद, यह टाइटल परिवार की पहचान बन गया और आने वाली पीढ़ियों में परिवार के मुखिया ने इसे अपनाया। बंगाल में नवाबी दौर के दौरान, जगत सेठ परिवार सिर्फ व्यापारियों का एक ग्रुप नहीं था; उनका असर खजाने, करेंसी, बैंकिंग और बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल लेन-देन तक फैला हुआ था। ऑफिशियल म्यूजियम रिकॉर्ड के मुताबिक, इस दौरान परिवार टकसाल और खजाने के अकाउंट को मैनेज करने में भी शामिल था।
आर्थिक व राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र
जगत सेठ परिवार ने मुर्शिदाबाद के महिमापुर इलाके में एक बड़ा घर और फाइनेंशियल हब बनाए रखा था। उस समय, मुर्शिदाबाद बंगाल की पॉलिटिकल और इकोनॉमिक राजधानी के तौर पर बहुत अहम था। इसलिए, परिवार के महिमापुर घर को सिर्फ़ एक प्राइवेट हवेली ही नहीं, बल्कि उस दौर की इकोनॉमिक और पॉलिटिकल गतिविधियों के लिए एक जरूरी सेंटर माना जाता था।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड में मिलता है जिक्र
महिमापुर में जगत सेठ के घर का जिक्र पुराने सरकारी ऐतिहासिक रिकॉर्ड में भी मिलता है। इन अकाउंट्स में प्लासी की लड़ाई के बाद बंगाल की पॉलिटिक्स से जुड़े ब्रिटिश अधिकारियों और खास लोगों के बीच हुई मीटिंग्स का जिक्र है। 1757 में प्लासी की लड़ाई भारतीय इतिहास में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट थी। इस लड़ाई ने बंगाल में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की ताकत बढ़ाने का रास्ता बनाया। जगत सेठ परिवार उस समय की राजनीतिक साजिशों और सत्ता परिवर्तन में बहुत ज्यादा शामिल था।
नवाब की हत्या की साजिश से जुड़े तार
म्यूजियम के ऑफिशियल रिकॉर्ड के मुताबिक, जगत सेठ परिवार उस साजिश से भी जुड़ा है जिसकी वजह से नवाब सिराजुद्दौला को हटाया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। इतिहासकारों का कहना है कि परिवार की फाइनेंशियल ताकत मीर जाफर और ब्रिटिश लोगों के बीच बने पॉलिटिकल और इकोनॉमिक गठबंधन का एक अहम कारण थी। मजे की बात यह है कि जिस पॉलिटिकल बदलाव में परिवार ने मदद की, उसी ने आखिरकार पारंपरिक भारतीय बैंकिंग सिस्टम और परिवार के अपने असर को कम कर दिया, क्योंकि ब्रिटिश ताकत मजबूत हो गई थी।
20वीं सदी की शुरुआत में वंश का अंत
प्लासी के बाद, ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की ताकत लगातार बढ़ती गई। बंगाल में पुराना नवाबी सिस्टम कमजोर हो गया, और पॉलिटिकल और फाइनेंशियल दोनों तरह के हालात बदलने लगे। परिवार का असर जिसकी इकोनॉमिक ताकत ने कभी बंगाल की पॉलिटिक्स को बनाया था, धीरे-धीरे कम होता गया। बड़े ऐतिहासिक संदर्भ में, परिवार के आखिरी बड़े वंश का अंत 20वीं सदी की शुरुआत में माना जाता है, हालांकि आखिरी वंशजों और जायदाद के उत्तराधिकार के बारे में अलग-अलग सोर्स में अलग-अलग बातें हैं। इसलिए, इस गिरावट को किसी एक तारीख या घटना से जोड़ना ठीक नहीं होगा।
बंगाल के बदलते इतिहास का सबूत
जगत सेठ जायदाद के पतन की कहानी सिर्फ पॉलिटिकल या इकोनॉमिक नहीं है। पुराने सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, महिमापुर में असली जगत सेठ हवेली का एक बड़ा हिस्सा समय के साथ भागीरथी नदी के कटाव में खत्म हो गया। पुराने जैन मंदिर को भी बहुत नुकसान हुआ। आज जो कुछ बचा है, वह उस शानदार अतीत की याद दिलाता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड हवेली, मंदिर और दूसरी इमारतों के कुछ हिस्सों के नुकसान का सबूत देते हैं। इसलिए, जगत सेठ राजबाड़ी (महल) सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि बंगाल के बदलते इतिहास और समय के बीतने का जीता-जागता सबूत है।
1980 में बनाया गया था म्यूजियम
ऐतिहासिक जगत सेठ घर के एक हिस्से को अब 'हाउस ऑफ जगत सेठ म्यूजियम' के तौर पर संभालकर रखा गया है। भारत सरकार से जुड़े 'म्यूजियम्स ऑफ़ इंडिया' पोर्टल के मुताबिक, यह म्यूजियम 1980 में बनाया गया था और इसमें जगत सेठ परिवार से जुड़ी कई ऐतिहासिक चीजें हैं। म्यूजियम के कलेक्शन में पुराने सिक्के, बंगाल की मशहूर मलमल, कीमती कपड़े, सोने और चांदी के धागों से बुनी बनारसी साड़ियां, और परिवार द्वारा खुद इस्तेमाल की जाने वाली कई चीजें शामिल हैं।
जिला प्रशासन की वेबसाइट में शामिल
म्यूजियम के बारे में मिली जानकारी में इमारत के अंडरग्राउंड हिस्से और एक कथित गुप्त सुरंग का जिक्र है, जिसने इस ऐतिहासिक जगह के बारे में लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। मुर्शिदाबाद जिला प्रशासन ने जगत सेठ हाउस को अपनी आधिकारिक वेबसाइट के 'ऐतिहासिक पर्यटन' सेक्शन में शामिल किया है। वेबसाइट पर, जगत सेठ हाउस को मुर्शिदाबाद की दूसरी अहम ऐतिहासिक जगहों—जैसे हजारीद्वारी, काठगोला, नसीपुर राजबाड़ी और सिराज-उद-दौला के मकबरे के साथ लिस्ट किया गया है।
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