दोस्तों का साथ, समय की कमी और सस्ता खाना! जानकारी के बावजूद युवा नहीं अपना रहे स्वस्थ विकल्प, स्टडी में खुलासा
खबर सार :-
स्वस्थ भोजन सेहत के लिए लाभकारी होता है। यह बात युवा अच्छी तरह जानते हैं लेकिन वे इसे अपनी डाइट में शामिल नहीं कर पा रहे हैं। यह बात बीएचयू की स्टडी में सामने आई है।
खबर विस्तार : -
वाराणसी: भारतीय युवा स्वस्थ और अस्वस्थ भोजन के बीच का अंतर अच्छी तरह समझते हैं, फिर भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में स्वस्थ खान-पान को शामिल करने में उन्हें कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह बात उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के नेतृत्व में आठ बड़े शहरों में की गई एक गुणात्मक स्टडी (qualitative study) से सामने आई है।
स्टडी के अनुसार, भोजन की कीमत, सुविधा, व्यस्त जीवनशैली, खाना पकाने के सीमित कौशल, सामाजिक प्रभाव और डिजिटल मार्केटिंग जैसे कारक युवाओं के लिए स्वस्थ भोजन चुनने में बड़ी बाधाएं हैं। BHU के जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, इस स्टडी में मुंबई, पुणे, हैदराबाद, कोलकाता, अहमदाबाद, चेन्नई, दिल्ली और बेंगलुरु के 68 युवा शामिल थे। शोधकर्ताओं ने भोजन के बारे में युवाओं की सोच और स्वस्थ आहार अपनाने में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को समझने की कोशिश की। यह स्टडी BMC Public Health में प्रकाशित हुई है और इसमें BHU, डीकिन यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) और अहमदाबाद यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता शामिल थे।
स्वस्थ भोजन की समझ, लेकिन अपनाने में कमी
प्रतिभागियों ने आम तौर पर फल, सब्जियां, दालें, अनाज और कम प्रोसेस्ड (processed) भोजन को स्वस्थ माना, जबकि डीप-फ्राइड और ज्यादा प्रोसेस्ड भोजन को अस्वस्थ माना। हालांकि, स्वस्थ भोजन की इस समझ और असल में खान-पान की आदतों के बीच एक स्पष्ट अंतर देखा गया। स्टडी की एक अहम बात यह थी कि किसी भी प्रतिभागी ने यह तय करने के लिए न्यूट्रिशनल लेबल या हेल्थ क्लेम (स्वास्थ्य संबंधी दावे) पर निर्भर रहने का जिंक्र नहीं किया कि कोई खाद्य पदार्थ स्वस्थ है या अस्वस्थ। इससे पता चलता है कि युवाओं की खान-पान की आदतों में बदलाव लाने के लिए सिर्फ पोषण संबंधी जानकारी देना काफी नहीं है।
महंगा स्वस्थ भोजन बनाम सस्ता जंक फूड
स्वस्थ विकल्प चुनने में भोजन की कीमत एक मुख्य बाधा के रूप में सामने आई। प्रतिभागियों ने अक्सर पौष्टिक भोजन—जैसे फल, सब्जियां और ऑर्गेनिक उत्पाद को महंगा बताया, जबकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और जंक फूड को अपेक्षाकृत सस्ता और आसानी से मिलने वाला विकल्प माना। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। अगर पौष्टिक और स्वस्थ भोजन आर्थिक रूप से सुलभ नहीं है, तो सिर्फ पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना काफ़ी नहीं होगा; स्वस्थ विकल्पों को सस्ता और आसानी से उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
समय की कमी और खाना पकाने के कौशल की कमी
स्टडी में व्यस्त जीवनशैली को स्वस्थ आहार अपनाने में एक बड़ी बाधा के रूप में पहचाना गया। पढ़ाई और काम से जुड़ी व्यस्तताओं के कारण, कई युवाओं को खाना पकाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। खाना पकाने की सीमित जानकारी और खाना बनाने में लगने वाली मेहनत भी उन्हें 'रेडी-टू-ईट' (तुरंत खाए जा सकने वाले) मील, पहले से तैयार खाने और ऑनलाइन फूड डिलीवरी सर्विस की ओर ले जाती है। हालांकि लोगों ने माना कि घर का बना खाना आम तौर पर ज्यादा सेहतमंद होता है, लेकिन उनकी भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से उनके लिए रोजाना घर पर खाना बनाना मुश्किल होता जा रहा है। स्टडी से पता चलता है कि खाना पकाने और तैयार करने की क्षमता को सिर्फ घर के काम के तौर पर नहीं, बल्कि सेहत को बढ़ावा देने वाले एक जरूरी जीवन कौशल (लाइफ स्किल) के तौर पर देखा जाना चाहिए।
दोस्तों और सामाजिक माहौल का असर
स्टडी में यह भी पता चला कि युवाओं के खाने-पीने की पसंद सिर्फ उनकी अपनी पसंद से तय नहीं होती; दोस्त और सामाजिक माहौल भी उनकी खाने की आदतों पर काफी असर डालते हैं। लोगों ने बताया कि दोस्तों के साथ खाना खाते समय वे अक्सर ऐसी चीजें खा लेते हैं जिन्हें वे आम हालात में नहीं खाते या जिन्हें वे सेहत के लिए अच्छा नहीं मानते। रिसर्च करने वालों के मुताबिक, युवाओं के खाने-पीने के व्यवहार को समझने के लिए व्यक्तिगत जागरूकता के साथ-साथ बड़े पहलुओं—जैसे आर्थिक स्थिति, खाने की उपलब्धता, समय की कमी, सामाजिक माहौल और बदलते डिजिटल कल्चर पर भी ध्यान देना जरूरी है।
यह भी पढ़ेंः- Did you Know : आसमान में बिखरते रंग, जानिए इंद्रधनुष बनने का पूरा विज्ञान, इसका इतिहास और अनोखे वैज्ञानिक तथ्य
अन्य प्रमुख खबरें
-
Did You Know : मच्छरों से जुड़े रोचक तथ्य और स्वास्थ्य पर प्रभाव
2026-10-13
-
मौर्य काल से डिजिटल युग तक, जानें देश में डाक व्यवस्था का इतिहास
2026-10-10
-
छोटे बच्चों की देखने की क्षमता और सही-गलत की समझ पर रिसर्च
2026-10-09
-
9 अक्टूबर को मनाया जाएगा विश्व डाक दिवस, जानें थीम और महत्व
2026-10-08
-
केदाश्वर गुफा मंदिर: जानिए रहस्य और पौराणिक मान्यताएं
2026-10-08
-
अपने मूल स्वरूप में लौटेगा गांधी स्मारक, पुरातत्व विभाग ने बनाई योजना
2026-10-02
-
मनाली का ऐतिहासिक हडिम्बा देवी मंदिर: इतिहास और खासियत
2026-10-01
-
किन्नर समुदाय से जुड़े 11 रोचक तथ्य और उनका सामाजिक जीवन
2026-09-28
-
कनाडा के अल्बर्टा में 70 साल बाद मिला चूहा, ‘रैट पेट्रोल’ सक्रिय
2026-09-26
-
माउंट एवरेस्ट नहीं, यह ज्वालामुखी है दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत
2026-09-25
-
1 मिनट के चुंबन से बर्न होती हैं 26 कैलोरी - हेल्थ रिपोर्ट
2026-09-23
-
कूचबिहार की प्राचीन पांडुलिपियां संरक्षण के अभाव में मिटने की कगार पर
2026-09-22
-
सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है टाई पहनना, जानिए क्या कहती है रिसर्च
2026-09-21
-
कन्नौज स्थापना दिवस 2025: इतिहास, इत्र विरासत और परफ्यूम टूरिज्म
2026-09-17
-
सार्वजनिक टॉयलेट के बाद हाथ न धोने की आदत पर क्या कहता है सर्वे!
2026-09-16