पश्चिम बंगाल के सीएमओ दूर करेंगे तंबाकू की लत
खबर सार :-
पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वास्थ्य सुधार में एक नई पहल की है। सरकार ने इस पहल में पहले स्कूली छात्रों को नशे से दूर रखने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है।
खबर विस्तार : -
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वास्थ्य सुधार में एक नई पहल की है। सरकार ने इस पहल में पहले स्कूली छात्रों को नशे से दूर रखने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। राज्य में इसके लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी की गई है। एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, सभी जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी लिखित रूप में भेज दी गई है। स्वास्थ्य सुधार के लिए सबसे पहले अधिकारियों को स्कूलों की ओर भेजा जाएगा। यह लोग सरकारी गाइडलाइंस का पालन करेंगे।
100 अंकों का स्कूल में ही मूल्यांकन होगा
इनको जिम्मेदारी दी गई है कि वह हर स्कूल में तंबाकू विरोधी जागरूकता अभियान के तहत कार्यक्रम लेकर जाएं। किसी स्कूल का अगर कोई छात्र तंबाकू का सेवन करता पाया जाता है, तो उसे सुधारने की कोशिश की जाएगी। छात्र को व्यवहार संबंधी काउंसलिंग देकर सुधारा जाएगा। निर्देशों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर छात्र को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल भेजा जाएगा। तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान का प्रमाणपत्र भी देने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। सरकार की ओर से कहा गया है कि हर स्कूल को प्रत्येक छह माह में 100 अंकों का स्कूल में ही मूल्यांकन करना होगा।
13 से 15 साल की उम्र के छात्र शामिल
जिन स्कूलों को 90 प्रतिशत या उससे अधिक अंक मिलेंगे, नई मानक संचालन प्रक्रिया में उनको पुरस्कार दिया जाएगा। सरकार ने एक सर्वे कराया था। इसमें ऐसे कार्यक्रम को आवश्यक माना गया था। पश्चिम बंगाल में 13 से 15 साल की उम्र के 8.5 प्रतिशत छात्र सिगरेट या गुटखे के आदी बताए गए हैं। सर्वे की प्रक्रिया बढते ही स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए पहल शुरू कर दी गई है। जल्द ही हर ब्लॉक में एक विशेष टीम बनाकर अभियान शुरू कर दिया जाएगा। इस टीम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के मेडिकल अधिकारी के अलावा स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, परामर्शदाता और ब्लॉक स्वास्थ्य प्रबंधक को शामिल किया जाएगा।
2003 के अंतर्गत तंबाकू के नुकसान बताए जाएंगे
अब माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार की इस पहल से छात्रों का भविष्य सही दिशा में चलेगा। उम्मीद जताई गई है कि छात्रों को तंबाकू की लत छोड़ने में मदद मिलेगी। इस संबंध में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान (टीओएफईआई) कार्यक्रम का उद्देश्य साफ है। इसके तहत सभी शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाना है। मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) ने भी स्पष्ट किया है कि तंबाकू विरोधी कानून, 2003 का सख्ती से पालन होगा। तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 के अंतर्गत तंबाकू के नुकसान तथा सुधार के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही छात्रों को सिगरेट के भी नुकसान बताए जाएंगे।
राज्य को है तम्बाकू से मुक्त कराना
स्कूलों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। यह कई प्रकार की होंगी। इनका उद्देेश्य एक ही रहेगा। राज्य को तम्बाकू से मुक्त कराना है। परामर्शदाताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्रों और अभिभावकों को तंबाकू के नुकसान की जानकारी दें। यदि तंबाकू की विक्री पर नजर न रखी गई तो सफलता हासिल होगी? यह भी एक सवाल है, इसीलिए सभी स्कूलों में तंबाकू निगरानी समिति बनाई जाएगी। जिम्मेदारी यह होगी कि स्कूल के 100 गज के दायरे में कहीं तंबाकू की बिक्री तो न हो। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का प्रमाणपत्र पाने के लिए स्कूलों को आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी।
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