रेलवे का जेई ट्रेन से फिसला, लाइन चेक कर लौट रहा था कैंट, दोनों पैर कटे, अस्पताल में मौत

खबर सार :-

आगरा के जाजऊ रेलवे स्टेशन पर रेलवे के जेई के दोनों पैर कट जाने से उनकी मौत हो गई। झेलम एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान वह नीचे गिरकर ट्रेन की चपेट में आ गए थे।
आगरा: जेई की दर्दनाक मौत, ट्रेन से फिसले, दोनों पैर कटे

खबर विस्तार : -

आगरा : चलती झेलम एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान रेलवे के अवर अभियंता मनोज सैनी का पैर फिसल गया था। इससे वह नीचे गिर पड़े और ट्रेन की चपेट में आ गए। पहिए के नीचे आने से उनके दोनों पैर कट गए थे। गंभीर हालत में सैनी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी बाद में मृत्यु हो गई।

मरम्मतीकरण कार्य में पहुंचे थे जेई

 जिस समय वह झेलम एक्सप्रेस में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, ट्रेन चल रही थी। यह हादसा आगरा के जाजऊ रेलवे स्टेशन का है। मंगलवार की शाम हुए हादसे पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अवर अभियंता (जेई) मनोज सैनी के पैर कट जाने पर उन्हें गंभीर हालत में सैंया स्थित सामुदायिक स्वास्थय केंद्र ले जाया गया था।

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हालत गंभीर होने के कारण उनको वहां से रेफर करके एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। बाद में शाम साढ़े सात बजे के करीब उनकी मृत्यु हो गई। 32 साल का मृतक जेई चंदौसी का रहने वाला था। मनोज सैनी रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में तैनात थे। बताया जाता है कि घटना मंगलवार की शाम करीब साढ़े पांच बजे की है। जिस समय हादसा हुआ, वह आगरा-झांसी रेलवे लाइन का निरीक्षण करने गए थे।

इस ट्रेन का यहां स्टॉपेज नहीं था

उन्होंने सैंया में डाउन ट्रैक चेक किया और उसके बाद वह जाजऊ रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां से उनको कैंट आना था, इसलिए वहां पर ट्रेन की प्रतीक्षा करने लगे थे। थोड़ी देर में झेलम एक्सप्रेस स्टेशन पर आ गयी। यद्यपि इस ट्रेन का यहां स्टोपज नहीं था। लेकिल झेलम एक्सप्रेस स्टेशन पर थोड़ी धीमी हुई और इसी का फायदा उठा रहे मनोज सैनी ने चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की।

मेडिकल कालेज की इमरजेंसी रेफर 

ट्रेन की स्पीड पर्याप्त थी, इसलिए उनका संतुलन बिगड़ गया और पैर फिसल जाने से नीचे आ गिरे। ट्रेन की चपेट में आकर वह बुरी तरह से तड़पने लगे। स्टेशन पर मौजूद कर्मचारियों ने 112 नंबर पर घटना की जानकारी दी। जल्द ही पुलिस जेई मनोज सैनी को सामुदायिक स्वास्थय केंद्र सैंया लेकर पहुंची थी, लेकिन हालत काफी खराब होने से एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी रेफर कर दिया। वहां पर्याप्त स्वास्थय सुविधाएं होने से ऐसा किया गया। 

खबर पाकर अस्पताल पहुंचे परिजन

हादसे की जानकारी रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग को दी गई तो उनके अधिकारी भी अस्पताल पहुंच गए। जेई के परिजनों को भी हादसे की जानकारी मिली, तो वह भी अस्पताल पहुंचे और निजी अस्पताल जाने की तैयारी करने लगेे। इलाज के दौरान ही शाम साढ़े सात बजे मनोज सैनी की मृत्यु हो गई। इस मामलें में रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने जानकारी दी कि झेलम एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान हादसे के बाद करीब दस मिनट तक जेई मनोज सैनी होश में रहे। वह इन पलों में काफी कष्ट में रहे। उनकी आंखें खुली थी। वह अपने आसपास मौजूद रहे लोगों को देख भी रहे थे। 

तड़पता देख छटपटा रहे थे लोग

मनोज का दर्द किसी से देखा नहीं जा रहा था। वह तड़पते हुए कभी अपने हाथ चेहरे पर रख लेते तो कभी अपने हाथों को सीने पर रख लेते थे। उनको इस हालत में देख रहे लोग जल्दी अस्पताल ले जाने के लिए छटपटा रहे थे। लोगों से उनका दर्द और तड़पना देखा नहीं जा रहा था। सोशल मीडिया पर भी किसी ने वीडियो डाले हैं। 

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