मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में रहस्यमयी बीमारी से आठ बच्चों की मौत, कारण नहीं ढूंढ पाए डॉक्टर, पुणे भेजे गए सैंपल

खबर सार :-

भोपालः मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में आठ बच्चों की मौत हुई है। सैकड़ों बच्चे बीमार हैं। इनकी बीमारी का असली कारण पता नहीं चल रहा है। सवाल यह है कि जांच के लिए पुणे सैंपल भेजे गए, लेकिन रिपोर्ट क्यों नहीं आ रही है?
आठ बच्चों की मौत का पता नहीं लगा पाए मध्य प्रदेश के डॉक्टर, पुणे में चल रहा है सैंपल पर शोध

खबर विस्तार : -

भोपालः मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में रहस्यमयी बीमारी का अभी पता नहीं चल सका है। इसका पता चल सके, इसी कारण सैपल पुणे भेजे गए हैैं। 26 जून से अब तक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। बीमार बच्चों को देखने और बीमारी का पता लगाने के लिए जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के डॉक्टरों की टीम भी पहंुची है। इन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरा किया है। अब तक मौतों की असली वजह का पता नहीं चल पाया है।

जून माह से ही अज्ञात बीमारी ने पैर पसार लिए

जानकारी के अनुसार, बालाघाट जिले की अडोरी और मछुरदा पंचायत के बैगा बहुल आदिवासी इलाकों में पिछले दो माह से अज्ञात बीमारी अपने पांव जमा चुकी है। इस बीमारी की चपेट में सैकड़ों बच्चे बीमार आ चुके हैं। बीमारी के कारण तीन वर्षीय प्रियंका धुर्वे को 09 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसकी हालत नाजुक होती गई और इसने 11 अगस्त की रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हालत यह है कि क्षेत्र में इस बीमारी से अब तक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन का  कहना है कि बच्ची को कई बीमारियां थीं।

बीमार बच्चों में एक साथ कई परेशानियां पाई गईं

बीमारों का हाल जांचने जबलपुर से एक टीम पहुंची थी। इसने बताया कि बीमार बच्चों में एक साथ कई-कई परेशानियां पाई गईं। इनमें न्युमोनिया, एनीमिया यानी खून की कमी, डिहाइड्रेशन, बुखार, खुजली, मलेरिया और किडनी पर असर जैसे लक्षण मिले हैं। पूरी जानकारी के लिए सैंपल पुणे की लैब में भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के बारे में ज्यादा बताया जा सकेगा। यह रिपोर्ट कब तक आएगी? इस विषय पर स्वास्थय विभाग कुछ भी नहीं बोल रहा है। जिले में कई डाक्टरों का नाम सम्मानजनक लिस्ट में है। यह भी बीमारी का पता नहीं लगा पाए। सवाल यह है कि एैसी कौन सी बीमारी है, जो प्रदेश के चिकित्सक नहीं जांच पाए।

सभी बच्चे अडोरी और मछुरदा पंचायत के गांवों के ही थे। इस बारे में कुछ जानकारी सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने दी है। बताया कि 26 जून से 22 जुलाई तक बोंदारी निवासी भाई-बहन लमनिन और साहिल, पूजा, सचिन और कुंडेकसा निवासी प्रीति की मौत हुई। बीमारी बढ़ती गई और 6 अगस्त को अरविंद तथा 8 अगस्त को मंगली मरकाम की जान गई। 11 को प्रियंका धुर्वे ने दम तोड़ा। इस बच्ची में भी कई बीमारियां थीं। डॉक्टरों ने बताया कि उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन हम सफल नहीं हो सके।

10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग

यह इलाका आदिवासी बहुल लोगों का है। क्षेत्र में बच्चों की लगातार मौतों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चिंता जताई और उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। बीमारी के कारण पता लगाने की तथा जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है। बीमार बच्चों को नागपुर, रायपुर और भोपाल के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराने को कहा जा रहा है। कुछ परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं। इनको राहत देते हुए सरकार से पूरा खर्चा उठाने की मांग की जा रही है।

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 FAQ...

1.  कब से बच्चों में बीमारी पाई जा रही है ?

 इस बीमारी के बारे में 26 जून को पता चल सका। माना जा रहा है कि इससे भी पहले बच्चों में बीमारी थी, लेकिन इस दिशा में ज्यादा सोचा नहीं जा सका। जब संख्या बढ़ने लगी तब डॉक्टरों ने हैरानी में जांच पड़ताल करना तेज किया। फिर भी इस बीमारी का अभी तक कारण नहीं जान सके।

2.  कितने बच्चों की मौत हो चुकी है ?

अब तक करीब आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। कई बच्चे बीमारी की चपेट में हैं। एक बच्चे में एक से ज्यादा बीमारी पाई जा रही है। इसलिए कई डाक्टरों की मदद ली जा रही है। 

3. बीमारी का असल कारण क्या है 

कई बच्चों में न्युमोनिया, एनीमिया यानी खून की कमी, डिहाइड्रेशन, बुखार, खुजली, मलेरिया और किडनी पर असर जैसे लक्षण मिले हैं। यह सामान्य बात नहीं है। स्थानीय लोगों में प्रशासन और सरकार के खिलाफ नाराजगी भी है। 

4. कितने बच्चों में बीमारी पाई गई है ?

कुछ बच्चों को भर्ती नहीं कराया गया है। कुछ की जांच की गई, इससे पता चला है कि सैकड़ों बच्चे बीमारी की चपेट में आ चुके है। इसीलिए सैंपल बाहर जांच के लिए भेजे गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह सैंपल की रिपोर्ट आ क्यों नहीं रही है। 

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