बच्चों में भूख कम लगना या लगातार बुखार हो सकते हैं कैंसर के शुरुआती संकेत, इन 6 लक्षणों को न करें नजरअंदाज
खबर सार :-
कैंसर का नाम सुनते ही डर लगने लगता है। फिर अगर बात बच्चे की हो तो चिंता कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर कैंसर का पता जल्दी लग जाए तो इसका इलाज संभव है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: बच्चे में कैंसर का पता चलने पर माता-पिता डर जाते हैं, लेकिन बीमारी का जल्दी पता चलने से सफल इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है। वयस्कों के विपरीत, बच्चों में कैंसर के लक्षण अक्सर आम बीमारियों जैसे ही होते हैं, जिससे उन पर ध्यान नहीं जा पाता। इसलिए, माता-पिता, शिक्षकों और परिवार के सदस्यों के लिए बच्चों में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों को भी गंभीरता से लेना जरूरी है।
लगातार बुखार, बिना किसी कारण वजन कम होना, शरीर पर निशान या चोट के निशान पड़ना, गांठें बनना, आंखों में अजीब चमक, सिरदर्द और उल्टी आना- ये कुछ शुरुआती संकेत हैं जो शरीर देता है। इन संकेतों को पहचानकर और तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर बच्चे की जान बचाई जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बच्चों में कैंसर का जल्दी पता चलने से उनके बचने की दर काफी बढ़ जाती है।
बच्चों में होने वाले प्रमुख कैंसर
ल्यूकेमिया यानी रक्त कैंसर बच्चों में होने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है। अन्य कैंसरों की तुलना में इसकी दर 31 प्रतिशत तक है। इसके अलावा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी का कैंसर, गुर्दे का कैंसर और नेत्र कैंसर शामिल हैं।
बच्चों में कैंसर होने के कारण
जन्म से लेकर 15 वर्ष तक की आयु तक बच्चों में कैंसर को बाल कैंसर कहा जाता है। खास बात यह है कि बच्चों में कैंसर का फैलने का तरीके और इसका इलाज व्यस्कों के कैंसर की तुलना में अलग होता है। बच्चों में कैंसर होने की कोई एक ज्ञात वजह नहीं है, बल्कि अनुवांशिकता, गर्भ में जटिलता, संक्रमण और विकिरण जैसे कई कारक इसके होने के कारण बन सकते हैं।
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कैंसर के प्रमुख लक्षण
चूंकि कई लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण जैसे होते हैं, इसलिए माता-पिता और डॉक्टरों के लिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बहुत ज़रूरी है। बच्चों में कैंसर के कुछ मुख्य शुरुआती संकेत इस प्रकार हैं:
1- लगातार और बिना कारण बुखार
यह बच्चों में होने वाले सबसे आम तरह के कैंसर में देखा जाता है। कैंसर कोशिकाएं बोन मैरो (अस्थि मज्जा) में सामान्य कोशिकाओं की जगह ले लेती हैं, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और संक्रमण से लड़ने की क्षमता पर असर पड़ता है, जिसके कारण लगातार बुखार रहता है। इसके अलावा, कैंसर कोशिकाएं ऐसे केमिकल (पायरोजेन्स) छोड़ती हैं जो मस्तिष्क के तापमान के स्तर (सेट-पॉइंट) को बढ़ा देते हैं।
2- असामान्य गांठें या सूजन
लिम्फ नोड्स में कैंसर कोशिकाओं के जमा होने से दर्द रहित गांठें बन जाती हैं। अगर कोई गांठ दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है, खासकर अगर उसके साथ बुखार और वजन कम होने की समस्या भी हो तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। गांठ का मतलब है कि कैंसर कोशिकाएं एक ही जगह पर जमा हो रही हैं; समय पर इलाज न होने पर, वे रक्तप्रवाह के जरिए फेफड़ों, लिवर या मस्तिष्क तक फैल सकती हैं।
3- हड्डी और जोड़ों में दर्द
इस तरह का कैंसर ज्यादातर 10 से 18 साल के किशोरों में होता है, जब उनकी हड्डियां तेज़ी से बढ़ रही होती हैं। कैंसर कोशिकाएं हड्डी के अंदर तेजी से बढ़ती हैं, जिससे हड्डी कमजोर हो जाती है और अंदर से खोखली हो जाती है।
4- बिना कारण वजन कम होना और थकान
कैंसर कोशिकाएं बच्चे के भोजन से मिलने वाली कैलोरी और प्रोटीन का इस्तेमाल कर लेती हैं। बच्चा खाना तो खाता है, लेकिन उसका वजन बढ़ने के बजाय कम होने लगता है। अगर ऐसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।
5- आसानी से चोट के निशान पड़ना और खून बहना
आसानी से चोट के निशान पड़ना और खून बहना बच्चों में ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) या अन्य गंभीर बीमारियों के आम शुरुआती लक्षण हैं। बोन मैरो में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने से स्वस्थ प्लेटलेट्स का बनना रुक जाता है। प्लेटलेट्स खून का थक्का जमाने के लिए जिम्मेदार होते हैं; इनकी कमी से खून ठीक से नहीं जम पाता।
6- भूख कम लगना और जी मचलाना
कैंसर शरीर में ऐसे केमिकल छोड़ता है जिनसे भूख कम हो जाती है, जी मिचलाता है और मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं। अगर ऐसे लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहें या और बिगड़ जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं और सलाह लें।
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