मध्य प्रदेश: इंटर्न डॉक्टरों पर लाठीचार्ज की होगी जांच, सरकारी अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित
खबर सार :-
भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन के दौरान सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। डॉक्टर ने मध्य प्रदेश सरकार से कथित लाठीचार्ज की जांच की मांग की है। साथ ही यह भी मांग है कि जिन पुलिस अधिकारियों के कहने पर लाठीचार्ज किया गया, उनके खिलाफ निलंबन जारी हो।
खबर विस्तार : -
भोपाल: भोपाल में स्टाइपेंड (भत्ते) को लेकर इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया था। इस दौरान पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इसी के विरोध में डॉक्टरों ने अस्पतालों की सेवाएं बंद कर रखी हैं। उनका कहना है कि सरकार जब तक उनकी मांग नहीं पूरी करती, तब तक ओपीडी बहाल नहीं की जाएगी। इस मामले में मध्य प्रदेश की सरकार ने मंगलवार को भोपाल में एक आदेश पास किया है। इसमें प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर कथित लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल की जांच के आदेश हैं।
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डिप्टी सीएम ने दिया डॉक्टरों को भरोसा
इस घटना के विरोध में पूरे राज्य में इमरजेंसी सेवाएं बहाल रहीं, लेकिन बाकी ओपीडी प्रभावित रहीं। डॉक्टरों के बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने जांच के आदेश दिए गए हैं। साथ ही इन्ही के कहने पर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं बंद की गई थी। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने मीडिया को बताया कि डॉक्टरों ने सोमवार को हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर भोपाल के पुलिस कमिश्नर से बात की है।
डॉक्टरों की शिकायत के आधार पर पुलिस कमिश्नर को जांच और ऐक्शन के लिए कहा गया है। डिप्टी सीएम शुक्ला ने कहा कि डॉक्टर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसलिए जिम्मेदार लोगों को इस मामले में सरकार की ओर से कार्रवाई के लिए कहा गया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि मैंने पुलिस कमिश्नर से बात की है। भोपाल के डिप्टी कमिश्नर आफ पुलिस इस मामले की जांच कर मुख्यमंत्री मोहन यादव के लौटने से पहले रिपोर्ट भी दे देंगे।
प्रशासन के प्रतिनिधियों में सुलह के प्रयास
बता दे कि इस समय मुख्यमंत्री मोहन यादव विदेश दौरे पर हैं। डिप्टी सीएम ने कहा कि जिन लोगों ने डॉक्टर के साथ गलत व्यवहार किया है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह कार्रवाई की इजाजत मध्य प्रदेश में किसी को नहीं दी जा सकती है। डिप्टी सीएम शुक्ला ने बताया है कि डॉक्टरों के प्रतिनिधियों कि प्रशासन के बीच बात चल रही है। मामले को सुलझा लिया जाएगा। जो भी शिकायतें होंगी, उनको दूर कर लिया जाएगा। पुलिस की करवाई सोमवार को हुई थी।
भोपाल में स्टाइपेंड (भत्ते) को लेकर इंटर्न डॉक्टरों ने बढ़ोतरी की मांग कर प्रदर्शन किया था। वह मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास की ओर बढ़ने लगे थे, इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोक लिया था। आरोप है कि इस दौरान कुछ कथित डॉक्टरों द्वारा पुलिस से धक्का मुक्की की गई। पुलिस ने यहीं लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। घटना के संबंध में प्रदर्शनकारी डॉक्टर और राज्य सरकार के बीच इस समय माहौल सही नहीं है, लेकिन सरकार चाहती है कि अस्पतालों की सेवाएं किसी भी हाल में रुके नहीं।
इस मुद्दे पर सुलह के प्रयास जारी हैैं। भोपाल में कमला पार्क में रात भर धरना जारी रहा। इस कारण मुख्यमंत्री के आवास और आसपास की सड़कों में सुरक्षाकर्मी बढ़ा दिए गए हैं। साथ ही सड़कों पर बैरिकेडिंग लगा दी गई है। कई ऐसे अस्पताल हैं, जहां पर पूरी तरह से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं।
प्रदर्शन के कारण ओपीडी से दूर रहे डॉक्टर
डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हमीदिया अस्पताल पर पूरी तरह से प्रभाव पड़ा है। मंगलवार को ओपीडी के दौरान कोई भी डॉक्टर यहां नहीं बैठा। मरीज के साथ आए परिजन काफी देर तक इंतजार करते रहे, लेकिन जब उन्हें जानकारी हुई कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं, वह अन्य स्थानों की ओर चले गए। उधर, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने कथित पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा है कि पुलिस की कथित कार्रवाई का विरोध जारी रहेगा। मंाग है कि जिन पुलिस कर्मियों के आदेश पर कार्रवाई की गई थी, उनके खिलाफ राज्य सरकार एक्शन ले। गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन कविता सिंह ने भी वाटर कैनन के इस्तेमाल को गलत ठहराया है।
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