KGMU में राष्ट्रीय एलर्जी सम्मेलन: देश में हर चौथा व्यक्ति एलर्जी से पीड़ित, अस्थमा का बढ़ा जोखिम
खबर सार :-
KGMU के राष्ट्रीय एलर्जी सम्मेलन में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नेज़ल एलर्जी से पीड़ित हर तीसरा व्यक्ति अस्थमा का शिकार हो सकता है। जानें इसके लक्षण, कारण और बचाव के उपाय।
खबर विस्तार : -
Lucknow : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के कलाम सेंटर में रविवार को रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओर से एक विशेष राष्ट्रीय एलर्जी सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न महानगरों से आए प्रतिष्ठित एलर्जी विशेषज्ञ, चेस्ट फिजिशियन और नाक-कान-गला (ENT) रोग विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान एलर्जी और अस्थमा की बढ़ती समस्या, उनके निदान, आधुनिक उपचार पद्धतियों तथा रोकथाम के उपायों पर गंभीर और विस्तृत मंथन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य संयोजक और विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने अपने संबोधन में चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि देश में लगभग हर चौथा व्यक्ति किसी न किसी रूप में एलर्जी से पीड़ित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें नेज़ल एलर्जी (नाक की एलर्जी) सबसे आम समस्याओं में से एक है। विशेष चिंता की बात यह है कि नेज़ल एलर्जी से पीड़ित हर तीन में से एक मरीज को भविष्य में अस्थमा होने का गंभीर जोखिम रहता है। इसके अलावा, बच्चों में त्वचा और खाद्य पदार्थों से जुड़ी एलर्जी के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
विशेषज्ञों की राय और आधुनिक निदान पद्धतियाँ
सम्मेलन में शामिल देश के अन्य हिस्सों से आए चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे। पटना से आए एलर्जी विशेषज्ञ डॉ. गौतम मोदी ने एलर्जी के प्रबंधन में उपयोग होने वाले नए इंजेक्टेबल उपचार 'हिस्टाग्लोबुलिन' के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने चिकित्सकों के साथ एलर्जी परीक्षण और इम्यूनोथेरेपी की बारीकियों पर भी चर्चा की। दिल्ली से पधारे ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजीव डंग ने रेखांकित किया कि वर्तमान समय में एक ही व्यक्ति में कई प्रकार की एलर्जी के लक्षण एक साथ पाए जा रहे हैं।
मुंबई से आए विशेषज्ञ डॉ. शाश्वत मुखर्जी और डॉ. प्रिया प्रिया पांडेय ने बताया कि एलर्जी की सटीक पहचान के लिए अब अत्याधुनिक जांच परीक्षण उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकों को क्लीनिकल आवश्यकताओं के अनुसार करना चाहिए ताकि समय पर सही उपचार मिल सके।
जीवनशैली में बदलाव और प्रदूषण का प्रभाव
बढ़ती एलर्जी और अस्थमा के पीछे के कारणों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि बढ़ता वायु प्रदूषण, फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन और बदलती जीवनशैली इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने लोगों से अपने खान-पान और दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाने की पुरजोर अपील की। उन्होंने बच्चों को पैकेटबंद फास्ट फूड के बजाय पौष्टिक घरेलू विकल्प चुनने की सलाह दी और शीतल पेय पदार्थों के स्थान पर पारंपरिक भारतीय पेय जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, सत्तू और छाछ के सेवन को बढ़ावा देने की बात कही।
रोकथाम के उपायों पर बात करते हुए उन्होंने चॉकलेट और टॉफियों की जगह गुड़ तथा केक-पेस्ट्री की जगह ताजे फल व सूखे मेवे खाने की सलाह दी। साथ ही, मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन टाइम को कम करने तथा नियमित व्यायाम व दौड़ने की आदत डालने पर जोर दिया। वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में योगदान देने के लिए उन्होंने जन्मदिन या अन्य विशेष अवसरों पर पौधे लगाने का आह्वान किया।
अस्पताल में उपलब्ध विशेष सुविधाएं और चिकित्सा दल
कार्यक्रम के सह-संयोजक डॉ. संतोष कुमार ने जानकारी दी कि KGMU के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में एलर्जी परीक्षण की संपूर्ण सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं और यह संस्थान एलर्जी तथा अस्थमा के उपचार का एक उन्नत केंद्र बन चुका है। विभाग की डॉ. ज्योति बाजपेयी ने बताया कि संस्थान में उत्तर प्रदेश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर भी संचालित किया जा रहा है, जहां एलर्जी और अस्थमा के मरीजों को योग, प्राणायाम और जल नेति का प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क दिया जाता है।
सत्र के अंत में डॉ. अंकित कुमार और डॉ. अजय वर्मा ने सभी अतिथि विशेषज्ञों और देश भर से आए प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में चेस्ट मेडिसिन और ईएनटी विभागों के जूनियर डॉक्टरों सहित सौ से अधिक चिकित्सकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. अंशुल मिश्रा, डॉ. वीरेंद्र वर्मा और लखनऊ ईएनटी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुमित शर्मा समेत कई अन्य गणमान्य चिकित्सक भी उपस्थित रहे।
यह सम्मेलन बढ़ते वायु प्रदूषण, बदलती खान-पान की आदतों और जीवनशैली के कारण देश में तेजी से फैल रही स्वास्थ्य समस्याओं (विशेषकर श्वसन संबंधी एलर्जी और अस्थमा) को नियंत्रित करने और इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। KGMU का रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के अग्रणी और उन्नत केंद्रों में शामिल है।
FAQ...
1. KGMU में राष्ट्रीय एलर्जी सम्मेलन का आयोजन कहाँ और कब किया गया?
यह सम्मेलन रविवार को KGMU के कलाम सेंटर में आयोजित किया गया था।
2. नेज़ल एलर्जी से पीड़ित मरीजों को किस बीमारी का सबसे अधिक जोखिम होता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, नेज़ल एलर्जी से पीड़ित हर तीन में से एक मरीज को भविष्य में अस्थमा होने का गंभीर जोखिम रहता है।
3. एलर्जी और अस्थमा से बचाव के लिए किन आदतों में बदलाव की सलाह दी गई है?
फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक्स के बजाय पौष्टिक घरेलू भोजन, पारंपरिक पेय पदार्थों, नियमित व्यायाम और स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दी गई है।
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