डॉ. फहद मंसूर समदी को मिली प्रतिष्ठित FDS RCPS ग्लासगो फेलोशिप, उत्तर भारत के पहले ओरल पैथोलॉजिस्ट बने

खबर सार :-

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रो. फहद मंसूर समदी को मिली रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स ऑफ ग्लासगो की प्रतिष्ठित फेलोशिप। उत्तर भारत के पहले ओरल पैथोलॉजिस्ट बने।
केजीएमयू के प्रो. फहद मंसूर समदी को प्रतिष्ठित FDS RCPS ग्लासगो फेलोशिप

खबर विस्तार : -

Lucknow News : किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ओरल पैथोलॉजी विभाग से जुड़े प्रोफेसर डॉ. फहद मंसूर समदी को दंत चिकित्सा के क्षेत्र की प्रतिष्ठित 'FDS RCPS ग्लासगो' फेलोशिप प्रदान की गई है। चिकित्सा जगत में इस व्यावसायिक सम्मान को बेहद विशिष्ट माना जाता है, जो वैश्विक स्तर पर विशेषज्ञता और उच्च पेशेवर मानकों का प्रतीक है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ डॉ. समदी उत्तर भारत के पहले ऐसे ओरल पैथोलॉजिस्ट बन गए हैं जिन्हें यह प्रतिष्ठित फेलोशिप हासिल हुई है। इसके साथ ही, वे देश के उन चुनिंदा दंत विशेषज्ञों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्हें इस अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा सम्मानित किया गया है।

केजीएमयू की अकादमिक परंपरा में नया अध्याय

यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज के तीसरे दंत चिकित्सक हैं। इस संस्थान से पूर्व यह गौरव पद्म श्री से सम्मानित प्रोफेसर शादाब मोहम्मद और दिवंगत प्रोफेसर दिव्या मेहरोत्रा को मिल चुका है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह चयन केजीएमयू में चल रहे उच्चस्तरीय शोध और शिक्षण कार्यों की गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स ऑफ ग्लासगो की स्थापना वर्ष 1599 में हुई थी और यह दुनिया के सबसे पुराने एवं ऐतिहासिक चिकित्सा संस्थानों में गिना जाता है। चार सदियों से अधिक पुरानी इस संस्था ने चिकित्सा और शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट परंपरा और मानकीकरण के लिए वैश्विक पहचान बनाई है।

चिकित्सा शिक्षा और शोध को मिलेगा बढ़ावा

विश्वविद्यालय प्रशासन और सहकर्मियों ने इस सफलता को संस्थान के लिए गौरवशाली क्षण बताया है। उनका मानना है कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय मान्यताएं देश में दंत चिकित्सा शिक्षा के स्तर को उन्नत करने और नए शोध कार्यों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

फेलोशिप का महत्व

ग्लासगो स्थित इस रॉयल कॉलेज की फेलोशिप दुनिया भर के उन चिकित्सा पेशेवरों को दी जाती है जिन्होंने अपने संबंधित क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो। केजीएमयू के दंत संकाय में इस परंपरा का आगे बढ़ना यह दर्शाता है कि यहां के शिक्षक वैश्विक अकादमिक मंचों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

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