​​​​​​​गुर्दे की सेहत के लिए वरदान हैं योगाभ्यास, जानें इसका सही तरीका

खबर सार :-

गुर्दे शरीर का प्राकृतिक फिल्टरिंग सिस्टम है। इसे स्वस्थ रखना जरूरी होता है। यह कई प्रकार से हमारी मदद करता है।
गुर्दे स्वस्थ नहीं तो आप भी अस्वस्थ, सुबह उठें और करें यह उपाय

खबर विस्तार : -

नई दिल्लीः जब कभी हमारा शरीर अस्वस्थ रहने लगता है, तब उसके उपचार के लिए चिकित्सकों के संपर्क में आ जाते हैं। इस दौरान दवाओं के जरिए राहत तो मिल जाती है, लेकिन उसके मूल बीमारी तक नहीं पहुंच पाते हैं। शरीर को अगर स्वस्थ और मजबूत रखना है तो गुर्दे भी स्वस्थ रखना चाहिए। यह हमारे शरीर का बेहद आवश्यक पार्ट है। प्राकृतिक फिल्टरिंग सिस्टम हम गुर्दे को ही कहते हैं। शरीर के अंदर पनप रही तमाम तरह की कर्मियों को यह दूर करने में मदद करता है, लेकिन जब तक हम इसको स्वस्थ नहीं रख पाएंगे तो यह हमें स्वस्थ नहीं रख सकता है।

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हमें योग की ओर आकर्षित होना चाहिए। यह केवल एक्सरसाइज मानकर ना करें। अंगों तक इसका प्रभाव पहुंचे, इसलिए सही योगाभ्यास प्राणायाम नियमित रूप से करके हम गुर्दों को स्वस्थ रख सकते हैं। यह ऐसी सूक्ष्म तकनीकी है, जिसको कुछ लोग ही समझ सके हैं। गुर्दों पर प्रभाव डालने से पहले हम मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के आसनों का भी जिक्र करते हैं। योग के बारे में कहा गया है कि यह गुर्दों पर प्रभाव डालते हैं और उनके कार्य करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। इन आसनों में उत्तानपदासन, सेतुबंधासन, धनुरासन, भुजंगासन, अर्धमत्स्येंद्रासन,  वक्रासन, कटि चक्रासन, त्रिकोणासन जैसे कई योग्य अभ्यास शामिल हैं।

उत्तानपदासन खून को करता है फिल्टर 

अब हम इन पर विस्तार से चर्चा करते हैं। उत्तानपदासन खून को फिल्टर करता है। यह आसन सीधे तौर पर गुर्दे पर पनप रही बीमारी को ठीक तो नहीं करता है, लेकिन शरीर की आंतरिक प्रणालियों को मजबूत करता है और इससे गुर्दे की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। उसमें शक्ति आती है। इसके बारे में आयुष मंत्रालय का कहना है कि यह आसन को करने के बाद जब पैर ऊपर उठाए जाते हैं तो निचले हिस्से से रक्त पीठ और पेट की तरफ प्रवाहित होता है। जहां गुर्दे होते हैं, वहां तक रक्त पहुंचता है। शरीर में बेहतर ब्लड सर्कुलेशन उत्पन्न कर गुर्दे को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाता है। इसी तरह शरीर में खून को बेहतर ढंग से फिल्टर कर पाने में भी मदद मिलती है।

सेतुबंधासन से शरीर को मिलता है पोषण

सेतुबंधासन करने से शरीर को पोषण मिलता है। इस योग अभ्यास के जरिए पेट के अंदर के अंगों के साथ गुर्दे को भी शक्ति प्रदान करता है। यह अभ्यास भी नियमित ही करना चाहिए। इससे किडनी के आसपास रक्त का प्रवाह सही ढंग से होता रहता है। इसके जरिए अंगों को पोषण की प्राप्ति होती रहती है, जिस किसी भी व्यक्ति में हाई ब्लड प्रेशर रहता है, यह उसको नियंत्रित करता है। सेतुबंधासन शरीर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका प्रदान करता है।

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धनुरासन से दूर होते हैं शारीरिक विकार

धनुरासन शरीर के अंगुरूनी दिक्कतों को दूर करता है। बताया जाता है कि धनुरासन के अभ्यास के दौरान कमर और पेट के हिस्से में खिंचाव होता है। ऐसा अधिकतर लोगों में पाया जाता है कि वह कमर दर्द से परेशान रहते हैं और जब खिंचाव होता है तो गुर्दे सहित अंदरूनी अंगों में रक्त का संचार बढ़ जाता है। डॉक्टर का भी कहना रहता है कि जब रक्त का संचार सही रहता है तो मनुष्य को काफी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। धनुरासन के बारे में भी कहा गया है कि यह आसन अंगों को उत्तेजित करके शरीर के विकार बाहर निकलता है। इससे मूत्र विकार भी दूर होते हैं। शरीर के लिए यह मददगार माना जाता है।

वक्रासन शरीर को मोड़ने में करता है मदद

वक्रासन शरीर को मुड़ाव देता है। जब हम योगाभ्यास करते हैं, उस समय वक्रासन करते समय हमारे अग्नाशय को वक्रासन से ऊर्जा मिलती है। इसकी उत्तेजना से इंसुलिन का स्त्राव बेहतर होता है। शरीर को मोड़ने से पेट के निचले हिस्से और कमर की मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है। वक्रासन करते समय जब मांसपेशियां खिंचती हैं तो उससे किडनी क्षेत्र में रक्त का प्रवाह होता है। इसका संचार शरीर को स्वस्थ करने में मदद करता है।

भुजंगासन से होती है आंतो तक मालिश

भुजंगासन का लाभ लेने के लिए नियमित योग करें। इस आसन को करने से रीढ की हड्डी मजबूत होती है। इसमें लचीलापन आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पेट के अंगों पर दबाव डालता है और पाचन क्रिया भी इससे बेहतर होता है। इस आसन को करने से कई और लाभ होते हैं। जैसे पेट में खिंचाव होता है और उससे किडनी एवं आंतरिक अंगों की मालिश होती है। इसी खिंचाव को ही मालिश का नाम दिया गया हैै। इससे उनका कामकाज बेहतर होता है और शरीर के अंगों को पहचानना बेहद सरल है। 

पेट स्वस्थ रखने में होता है सहायक

अर्धमत्स्येंद्रासन पेट की मालिश करता है। जैसा पहले ही बताया जा चुका है कि जिस समय योगासन किए जाते हैं, शरीर पर मोड़ आते हैं और मोड आने के दौरान खिंचाव होता है। मांसपेशियों के खिंचाव के समय रक्त का स्राव होता है। रक्त का संचार शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। यह एक मालिश का काम करता है। शरीर में पेट को स्वस्थ रखना बेहद जरूरी होता है। इसलिए इसके करने से भी तमाम दिक्कतें दूर होती हैं। बचपन में पेट से बीमार हुए बच्चों का भविष्य में सफल इलाज कम ही हो पता है। इसीलिए यह आसन बेहद जरूरी माना गया है।

मूवमेंट के जरिए अंदरुनी प्रभाव हो पाता

कटि चक्रासन से ऑक्सीजन और पोषण मिलता है। शरीर को पोषण की बेहद जरूरत होती है। साथ ही ऑक्सीजन भी उतना ही महत्व रखता है। कटि चक्रासन के दौरान होने वाले घुमाआंे या हम कह सकते हैं मूवमेंट के जरिए अंदरुनी प्रभाव तभी हो पाता है, जब पेट और कमर पर घुमाव हो। इससे किडनी लीवर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इस आसन से रीढ़ और पेट के हिस्से में रक्त का संचार बढ़ता है। इसका प्रभाव गुर्दे तक पहुंचता है। गुर्दे को बेहतर ऑक्सीजन और पोषण मिलने में मदद मिल जाती है।

योगाभ्यास को जरूरी और प्रभावशाली कहा गया

त्रिकोणासन से किडनी और लीवर में संचार होता है। त्रिकोणासन करने के दौरान शरीर के एक तरफ का हिस्सा सिकुड़ता है और दूसरी तरफ खिंचाव होता है। यह दोनों ही परिस्थितियां गुर्दे के लिए अहम हो जाती हैं। किडनी और लीवर जैसे अंगों तक रक्त का स्त्राव या संचार बेहतर होता है। यह अंदरूनी प्रक्रिया है। इसलिए इस आसन को करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं। यह सीधे तौर पर किसी शरीर पर या गंभीर रोग का इलाज नहीं करता है, लेकिन स्वस्थ जीवन शैली के तहत पेट की कार्य प्रणाली को सक्रिय करता है और इसी के जरिए व्यक्ति को स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसीलिए योगाभ्यास को जरूरी और प्रभावशाली कहा गया है।

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