पालघर अस्पताल में डॉक्टरों से दुर्व्यवहार पर एकनाथ शिंदे का बड़ा एक्शन, शिवसेना नेता राहुल घरत निलंबित
खबर सार :-
पालघर के रिलीफ अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से कथित दुर्व्यवहार के मामले में एकनाथ शिंदे ने शिवसेना नेता राहुल घरत को पार्टी से निलंबित कर निष्कासित करने की घोषणा की।
खबर विस्तार : -
मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने पालघर के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और मारपीट के मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्टी स्तर पर बड़ी कार्रवाई की है। शिंदे ने शिवसेना पालघर शहर प्रमुख राहुल घरत को पार्टी से निलंबित कर निष्कासित करने की घोषणा की है। उन्होंने साफ कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों के साथ हिंसा या दुर्व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गोवा में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में एकनाथ शिंदे ने पालघर की घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज के इलाज, जांच या अस्पताल के बिल को लेकर शिकायत थी तो संबंधित लोगों को कानूनी रास्ता अपनाना चाहिए था। कानून को अपने हाथ में लेना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। शिंदे ने कहा कि शिवसेना ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि डॉक्टरों के साथ मारपीट, धमकी या किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी के तहत राहुल घरत के खिलाफ पार्टी स्तर पर कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया गया है।
17 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
यह कार्रवाई पालघर के रिलीफ अस्पताल में हुई कथित घटना के बाद की गई है। मामले में पालघर पुलिस ने कुल 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि एक समूह अस्पताल में घुसा और वहां मौजूद डॉक्टरों एवं कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। आरोपियों पर अस्पताल स्टाफ से मारपीट करने और आईसीयू में भर्ती एक मरीज को चिकित्सकीय अनुमति के बिना जबरन बाहर ले जाने का भी आरोप है। घटना की शुरुआत दही हांडी उत्सव के दौरान घायल हुए गोविंदा पथक के सदस्यों के अस्पताल पहुंचने के बाद हुई। मानव पिरामिड बनाते समय घायल हुए पांच लोगों को उपचार के लिए रिलीफ अस्पताल लाया गया था। इनमें से तीन मरीजों का ओपीडी में उपचार किया गया, जबकि दो मरीजों को सिर और रीढ़ की चोटों के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया। इनमें 19 वर्षीय ओंकार कलवाडकर की हालत को देखते हुए उसे आईसीयू में रखा गया था। बताया गया कि उसके सिर में चोट लगी थी और वह बेहोशी की स्थिति में था। चिकित्सकों ने उसकी निगरानी के लिए उसे आईसीयू में रखा था।
जांच और अस्पताल के बिल को लेकर बढ़ा विवाद
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, विवाद उस समय बढ़ा जब कुछ स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मरीजों के लिए सुझाई गई सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों की आवश्यकता पर सवाल उठाना शुरू किया। इसके साथ ही बिना बकाया चिकित्सा बिल चुकाए मरीजों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की मांग की गई।
रिलीफ अस्पताल के निदेशक विशाल गोडगिकारकर के अनुसार, संबंधित मरीजों का बिल करीब 19,866 रुपये था। अस्पताल प्रबंधन ने करीब 20 प्रतिशत की छूट देने की पेशकश भी की, लेकिन इसके बावजूद कथित तौर पर संबंधित लोग भुगतान करने के लिए तैयार नहीं हुए। आरोप है कि इसी दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ लोग आक्रामक हो गए। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ लोगों को अस्पताल के इमरजेंसी विभाग और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करते हुए देखा जा सकता है। आरोप है कि समूह ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया और अस्पताल को गिराने तक की धमकी दी।
बिलिंग स्टाफ से मारपीट का भी आरोप
घटना के दौरान बीच-बचाव करने की कोशिश करने वाले बिलिंग रिसेप्शनिस्ट विवेक बाबुलिंगा के साथ भी कथित तौर पर मारपीट की गई। आरोप है कि उन्हें थप्पड़ मारा गया। इसके बाद कुछ लोग आईसीयू तक पहुंच गए और वहां मौजूद कर्मचारियों को धमकाया। अस्पताल प्रबंधन ने आरोप लगाया कि समूह ने आईसीयू में मरीज की मेडिकल निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा रही व्यवस्था को हटा दिया और मरीज को बिना चिकित्सकीय अनुमति के अस्पताल से बाहर ले गए। अस्पताल प्रशासन ने इसे मरीज की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।
कई धाराओं में मामला दर्ज
अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर पालघर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के साथ महाराष्ट्र में मेडिकल सेवा संस्थानों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा से जुड़े कानून के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर में नामजद आरोपियों में शिवसेना पालघर जिला प्रमुख कुंदन सांखे, पालघर शहर प्रमुख राहुल घरत और स्थानीय विधायक राजेंद्र गावित के पुत्र रोहित गावित के नाम भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज की जांच के साथ-साथ घटना के प्रत्यक्षदर्शियों और अस्पताल कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
मेडिकल संगठनों ने की सुरक्षा की मांग
घटना के बाद विपक्षी दलों और मेडिकल संगठनों ने भी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा की है। संगठनों ने अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। एकनाथ शिंदे की ओर से की गई कार्रवाई को इस मामले में पार्टी नेतृत्व की सख्त प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। शिंदे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक पहचान या किसी संगठन से जुड़ाव के आधार पर अस्पतालों में हिंसा अथवा दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब पुलिस जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका क्या थी और उनके खिलाफ आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।
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