सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: दिल्ली उच्च न्यायालय ने एमसीडी को दिए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश, राहत कार्यों में तेजी लाने को कहा
खबर सार :-
दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के मामले में हाई कोर्ट ने एमसीडी को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राहत कार्यों में तेजी लाने और जिम्मेदारी तय करने को कहा है।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में हुई इस दुर्घटना का संज्ञान लेते हुए दिल्ली नगर निगम को उच्चस्तरीय जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इस बात की पूरी जवाबदेही तय की जाए कि इस तरह की दुर्घटना के लिए कौन जिम्मेदार है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए हैं, इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाए। यह पूरी कानूनी प्रक्रिया लॉ के छात्र अनिकेत कुमार गुप्ता द्वारा दायर की गई याचिका के माध्यम से आगे बढ़ी है। याचिका में कोर्ट से गुहार लगाई गई थी कि इस दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और इसके साथ ही मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा, घायलों को समुचित चिकित्सा और प्रभावित छात्रों के लिए सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
दुर्घटना का शिकार हुआ यह संस्थान 'Hostel Daze Boys PG' नाम से संचालित था, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के समीप स्थित एक प्रमुख छात्र केंद्र माना जाता है। यह हादसा 6 सितंबर को दोपहर के समय हुआ, जिसके बाद वहां मौजूद छात्र मलबे की चपेट में आ गए। एम्स अस्पताल के आधिकारिक बयान का हवाला देते हुए याचिका में पांच छात्रों की मौत की पुष्टि की गई है।
राहत और बचाव कार्य तथा सोशल मीडिया पर चिंता
न्यायालय में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि इस समय राहत और बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ चलाया जा रहा है और लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने इस बात पर भी गहरी चिंता व्यक्त की कि इस हादसे से जुड़े वीडियो और मलबे में फंसे लोगों के दृश्यों को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि किसी की मौत या दुर्घटना पर सनसनी फैलाने से रोकने के लिए उपयुक्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिस पर अदालत ने विचार करने की बात कही है।
सुरक्षा और लाइसेंस संबंधी सवाल
याचिका के माध्यम से यह भी प्रमुखता से उठाया गया है कि प्रशासन यह जांच करे कि दुर्घटना का शिकार बने इस पीजी के पास संचालन के लिए कोई वैध लाइसेंस था या नहीं और उसे इसे चलाने की अनुमति मिली थी या नहीं। इसके साथ ही याचिका में यह मांग भी की गई है कि दिल्ली के अन्य सभी पेईंग गेस्ट आवासों और हॉस्टल्स का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसे जोखिमों से बचा जा सके।
सत्य निकेतन हादसा- अदालत की चिंता
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गहरा दुख और रोष व्यक्त किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हर दो साल के अंतराल पर इस तरह की दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। पीठ ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार और संबंधित महकमे क्या ठोस कदम उठा रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि राज्य सरकार इस गंभीर मामले की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती, क्योंकि इसमें दर्जनों छात्रों की जान खतरे में पड़ी है। मामले की अगली सुनवाई अब 25 सितंबर को निर्धारित की गई है, जिसमें प्रशासन को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।
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