रसोई तक भरा नदियों का पानी, सरकारी भोजन पर निर्भर सैंकड़ो परिवार

खबर सार :-

बिहार के कई जिलों में नदियां खतरे के निशान पर हैं। निचले एरिया के लोगों की रसोई तक पानी है। इसलिए सरकारी भोजन पर निर्भर हैं। गंगा उफान पर है। कई जिलों में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। रास्ते बंद हैं।
बिहार में बाढ़ का कहर, गंगा उफान पर, कई जिलों में लाखों लोग प्रभावित

खबर विस्तार : -

पटना, बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बाढ़ की स्थिति गंभीर बन रही है। यहां की प्रमुख गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। जल संसाधन विभाग ने शनिवार की सुबह इस संबंध में कुछ आंकड़े भी दिए हैं।

7.8 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित 

भागलपुर, भोजपुर, पटना, सारण और वैशाली में करीब 7.8 लाख लोगों को बाढ़ से प्रभावित माना गया हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, कई अन्य जिलों में भी निचले इलाकों में पानी फैल चुका है। इससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। जिले के नौ प्रखंडों में करीब 2.32 लाख लोग प्रभावित बाढ़ की पीड़ा झेल रहे हैं।  कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर पानी भरा हुआ है। अनेकों परिवारों को सरकारी भोजन पर रहना पड़ रहा है। सरकार की ओर से पानी वाले क्षेत्रों में छह सामुदायिक रसोई केंद्र की व्यवस्था की दी गई है।

इस विषम परिस्थिति में करीब 70,600 थालियों में भोजन की व्यवस्था काफी सहायता कर रही है। भोजपुर में गंगा के जलस्तर में बड़ी वृद्धि हुई है। इसके कारण निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बन चुकी है। जिले के चार प्रखंडों की करीब 2.84 लाख आबादी बाढ़ का दंश झेल रही है। यहां भी लोगों के घरों तक पानी ही पानी है। यहां 13 सामुदायिक रसोई केंद्र प्रशासन की ओर से संचालित किए जा रहे है। बात अगर हम आंकड़ों की करें तो अब तक करीब 8,300 थालियों में भोजन कराया गया है।

सारण जिले के पांच प्रखंड प्रभावित 

यहां के करीब 20 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित है। अब तक करीब 500 थालियों में सरकार की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई है। वैशाली में तीन प्रखंडों में 85 हजार आबादी बाढ़ की पीड़ा झेल रही है। यहां 326 लोग शरण लिए हुए हैं।  राघोपुर पंचायत में गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण काजीकौरैय-राघोपुर मार्जिनल बांध 23 अगस्त की रात करीब 30 मीटर लंबाई में क्षतिग्रस्त हो गया था। यह क्षेत्र भागलपुर के खरीक प्रखंड के अंतर्गत आता है। पंचायत के पांच वार्डों में पानी पहुंचने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो रहा है। इससे करीब 5,000 लोग प्रभावित हुए हैं। पटना जिले में भी गंगा का जलस्तर काफी बढ़ गया है। 

 निचले इलाकों के लोगों के लिए संकट बना  

भोजन की समस्या दूर करने के लिए सरकार की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी व्यक्ति को भूखा न सोना पड़े। इसी के तहत आठ सामुदायिक रसोई केंद्र चल रहे हैं। इनसे करीब 5,900 थालियों में भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है। शनिवार से सात और स्थानों पर सामुदायिक रसोई केंद्र शुरू करने के लिए कर्मचारी जुटे रहे। सारण जिले के पांच प्रखंडों में करीब 20 हजार आबादी प्रभावित चल रही है। सरकारी आंकड़े कह रहे हैं कि अरवल में 32 हजार, बक्सर में 10 हजार, बेगूसराय में 21,700, समस्तीपुर में 11,800, खगड़िया में 8,500, मुंगेर में 38 हजार और कटिहार में 36 हजार लोग पानी से प्रभावित हैं।

नदियों में दौड़ रही हैं मदद की नाव

बाढ़ प्रभावित इलाकों में आवागमन में दिक्कत हो रही है। इसलिए प्रशासन ने 18 जिलों में कुल 693 नावों का प्रबंध किया है। वैशाली में 155, समस्तीपुर में 88, भोजपुर में 87, पटना में 70, मधेपुरा में 58, खगड़िया में 43 और पूर्णिया में 35 नावें चल रही हैं। 

कई जिलों में पहुंचा सूखा राशन पैकेट 

बाढ़ की स्थिति भयावह हो रही है। इसमें ज्यादा लोगों को मदद देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर 11 जिलों में 7,107 पॉलीथिन शीट वितरित की गई हैं। पश्चिम चंपारण, पटना और वैशाली बाढ़ प्रभावित हैं। यहां के तमाम परिवारों में 1,764 सूखा राशन पैकेट बांटे गए हैं। 

जल संसाधन विभाग का आंकड़ा चिंताजनक

गंगा का जलस्तर पटना के गांधी घाट पर खतरे के निशान से 1.83 मीटर ऊपर है। हाथीदह में 1.61 मीटर ऊपर है। कहलगांव में 1.22 मीटर ऊपर है। पुनपुन नदी श्रीपालपुर में 2.68 मीटर ऊपर बह रही है। दो मीटर पानी काफी होता है। इसलिए कई स्थानों की हालत खराब है।  

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