Patna: गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन बाढ़ का खतरा बरकरार, मरीन ड्राइव की सैकड़ों दुकानें प्रभावित
खबर सार :-
पटना में गंगा का जलस्तर घटने से राहत मिली है, लेकिन बाढ़ का खतरा बरकरार है। मरीन ड्राइव की 500 से ज्यादा दुकानें प्रभावित हैं। गंगा का जलस्तर घटा जरूर है लेकिन अभी खतरा बरकरार है।
खबर विस्तार : -
पटनाः बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है, जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि, हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। गंगा के किनारे और निचले इलाकों में अब भी पानी जमा है। वहीं, जेपी गंगा पथ, जिसे मरीन ड्राइव के नाम से भी जाना जाता है, के आसपास बाढ़ का असर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। यहां सड़क किनारे लगी 500 से ज्यादा दुकानें पानी से प्रभावित हुई हैं, जिससे स्थानीय दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जलभराव से लोग परेशान
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में मनेर में गंगा के जलस्तर में करीब 16 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। यहां जलस्तर घटकर 52.12 मीटर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद यह अभी भी 52 मीटर के खतरे के निशान से 12 सेंटीमीटर ऊपर है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा पूरी तरह टला नहीं है। दीघा घाट पर भी गंगा का जलस्तर करीब 52.12 मीटर दर्ज किया गया है। यहां भी नदी का पानी खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है। जलस्तर में कमी आने के बावजूद आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी जमा होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गांधी घाट पर पिछले तीन दिनों में गंगा के जलस्तर में करीब 30 सेंटीमीटर की कमी आई है। इसके बावजूद यहां जलस्तर 49.28 मीटर पर बना हुआ है, जो 48.60 मीटर के खतरे के निशान से 68 सेंटीमीटर ऊपर है। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और निचले इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है।
स्थानीय व्यापारियों की बढ़ रही समस्या
गंगा का बढ़ा हुआ जलस्तर जेपी गंगा पथ के आसपास के कारोबार पर भी भारी असर डाल रहा है। दीघा घाट के पास बाढ़ का पानी जमीन के अंदर करीब 500 मीटर तक फैल गया है। इसके चलते सड़क किनारे मौजूद 500 से अधिक दुकानें प्रभावित हुई हैं। कई दुकानदारों को अपनी गाड़ियां और सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बाढ़ के पानी के कारण उनका काफी सामान खराब हो गया है। कई दुकानों में पानी घुसने से व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हुआ है। कुछ दुकानदारों ने बताया कि वे अपना कारोबार बचाए रखने के लिए दूसरी जगह तलाश रहे हैं। वहीं, कई व्यापारी पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि दोबारा सामान्य तरीके से दुकानें खोल सकें।
फिलहाल नियंत्रण में स्थिति
पटना नगर निगम की ओर से कहा गया है कि मरीन ड्राइव के प्रभावित दुकानदारों को लेकर फिलहाल कोई विशेष निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में दुकानदारों को राहत और कारोबार को हुए नुकसान की भरपाई को लेकर अभी किसी स्पष्ट सरकारी व्यवस्था का इंतजार है। दानापुर के नदी किनारे बसे इलाकों में भी बाढ़ का पानी जमा है। हालांकि, गंगा के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी आने से यहां पानी निकलने की उम्मीद बढ़ी है। प्रशासन प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
पटना जिले के अन्य हिस्सों में स्थिति अलग-अलग बनी हुई है। बख्तियारपुर में स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है, जबकि मोकामा में गंगा के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मोकामा में स्थिति नियंत्रण में है और किसी तरह की गंभीर स्थिति नहीं है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
प्रशासन की निगरानी सिर्फ गंगा तक सीमित नहीं है। सोन और पुनपुन नदियों के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। कोइलवर में सोन नदी का जलस्तर 52.80 मीटर दर्ज किया गया, जो 55.52 मीटर के खतरे के निशान से काफी नीचे है। यहां जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जिससे फिलहाल राहत की स्थिति है। वहीं, श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर 49.10 मीटर दर्ज किया गया। यह 50.60 मीटर के खतरे के निशान से करीब 1.50 मीटर नीचे है। हालांकि, अरवल के किंजर में नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण दक्षिणी पटना के निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बनी हुई है।
कुल मिलाकर पटना में गंगा का जलस्तर घटने से राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। खासकर नदी किनारे और निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी जारी है। लोगों और व्यापारियों को जलस्तर में और कमी आने तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
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