भारत-बेल्जियम रक्षा सहयोग को नई रफ्तार, सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर
खबर सार :-
भारत और बेल्जियम ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। साइबर सुरक्षा, AI ड्रोन, अंडरवाटर सिस्टम, हथियार प्रणालियों के सह-विकास और सह-उत्पादन पर चर्चा हुई।
खबर विस्तार : -
नई दिल्लीः भारत और बेल्जियम ने रक्षा क्षेत्र में औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। दोनों देशों ने सैन्य उत्पादों के सह-विकास और सह-उत्पादन की संभावनाओं पर जोर दिया है। बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने गुरुवार को नई दिल्ली में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग, आधुनिक तकनीक और रणनीतिक सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक में भारत ने बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और अपनी बढ़ती विनिर्माण क्षमता को एक साथ लाकर नए रक्षा उत्पाद विकसित करने की संभावनाओं पर जोर दिया। दोनों देशों की कई कंपनियों के बीच महत्वपूर्ण समझौते भी हुए हैं, जिन्हें रक्षा औद्योगिक साझेदारी के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
साइबर सुरक्षा और एआई तकनीक पर सहयोग
भारत का मानना है कि बदलते सुरक्षा वातावरण को देखते हुए दोनों देश कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं। इनमें साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मानव रहित हवाई प्रणालियां, पानी के भीतर काम करने वाले वाहन और जटिल हथियार प्रणालियां प्रमुख हैं।
दोनों मंत्रियों ने 3 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित भारत-बेल्जियम रक्षा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) की गोलमेज बैठक और कारोबारी बैठकों में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में बेल्जियम के रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM) से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधा संवाद बढ़ाना और भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को तलाशना रहा।
यूरोपीय संघ के लिए भारत भरोसेमंद साझेदार
बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री Theo Francken ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा, सूचना सुरक्षा और एयरोस्पेस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत और यूरोप के बीच संवाद और सहयोग के लिए मजबूत संस्थागत तंत्र विकसित हो रहे हैं।
फ्रांकेन के मुताबिक, इन संस्थागत व्यवस्थाओं ने भारत को यूरोपीय संघ के लिए एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित करने में मदद की है। उन्होंने भारतीय उद्यमियों की गतिशीलता और रक्षा क्षेत्र में उनकी बढ़ती क्षमताओं की भी सराहना की। बेल्जियम के मंत्री ने बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल का जिक्र करते हुए दोनों देशों की सेनाओं को संयुक्त प्रयासों के जरिए और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
‘भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र बदलाव के दौर में’
रक्षा राज्य मंत्री Sanjay Seth ने कहा कि भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र इस समय रणनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। भारत का लक्ष्य रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर आधुनिक रक्षा क्षमताओं का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। देश अब भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।
संजय सेठ ने कहा कि भारत और बेल्जियम अपनी-अपनी विशेषज्ञता और औद्योगिक क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग कर सकते हैं। विशेष रूप से साइबर सुरक्षा, एआई आधारित मानव रहित हवाई प्रणालियां, अंडरवाटर वाहन और जटिल हथियार प्रणालियां भविष्य के सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र हो सकते हैं।
स्टार्टअप और MSME को मिल रहा बढ़ावा
रक्षा राज्य मंत्री ने भारत के रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि iDEX और ADITI जैसे भारतीय नवाचार मंच रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप और एमएसएमई को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, सैन्य संचार और ड्रोन रोधी प्रणालियों जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और छोटे उद्योगों को रक्षा उत्पादन की मुख्यधारा से जोड़कर देश की तकनीकी क्षमता को और मजबूत किया जाए।
संजय सेठ ने बताया कि भारत का रक्षा औद्योगिक आधार अब रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ-साथ तेजी से बढ़ते निजी क्षेत्र और 16,000 से अधिक एमएसएमई को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
एयरोस्पेस से साइबर सुरक्षा तक बढ़ रही क्षमता
भारत का घरेलू रक्षा उद्योग अब केवल पारंपरिक सैन्य उपकरणों तक सीमित नहीं है। देश में एयरोस्पेस, नौसैनिक और थल प्रणालियों, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और मानव रहित प्रणालियों सहित कई क्षेत्रों में उन्नत क्षमताएं विकसित की जा रही हैं। रक्षा उत्पादन विभाग की ओर से क्षमता निर्माण को तेज करने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और तकनीक हस्तांतरण तथा सह-विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का जोर ऐसी साझेदारियों पर है, जिनसे भारतीय उद्योग को आधुनिक तकनीक हासिल करने के साथ-साथ घरेलू स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिले।
100 फीसदी तक FDI की अनुमति
संजय सेठ ने भारत की रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश के नियमों को उदार बनाया है। मौजूदा व्यवस्था के तहत स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत तक और सरकारी मार्ग से 100 प्रतिशत तक FDI की अनुमति है। इस नीति का उद्देश्य विशेष और अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों तथा भारतीय उद्योग के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना है। भारत-बेल्जियम रक्षा सहयोग में भी यह व्यवस्था तकनीकी साझेदारी, निवेश और संयुक्त उत्पादन के नए अवसर पैदा कर सकती है।
कुल मिलाकर, भारत और बेल्जियम के बीच हुई यह बैठक दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के लिए नए अवसरों का संकेत देती है। तकनीकी विशेषज्ञता, भारतीय विनिर्माण क्षमता, स्टार्टअप इकोसिस्टम और विदेशी निवेश को एक साथ जोड़कर दोनों देश भविष्य में रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
यह भी पढ़ेंः-रक्षामंत्री का निर्देश, सैन्य उत्पाद टिकाऊ और अत्याधुनिक बनाएं, 5 साल का रोडमैप तैयार करें
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