रक्षामंत्री का निर्देश, सैन्य उत्पाद टिकाऊ और अत्याधुनिक बनाएं, 5 साल का रोडमैप तैयार करें
खबर सार :-
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस पीएसयू की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने पांच साल का रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद बनाएं, जो टिकाऊ हों। स्वदेशी और विश्व बाजार की जरूरत हो।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उच्च गुणवत्ता और पहुंच बढ़ाने वाली प्रतिस्पर्धी उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया है। राजनाथ सिंह ने डिफेंस पीएसयू (Defence PSU - Public Sector Undertaking) से कहा है कि देश में ऐसे उत्पाद विकसित किए जाएं जिनका विदेशों में निर्यात हो और उत्पाद टिकाऊ हो। वह उत्पाद गुणवत्ता में अच्छा हो और प्रतिस्पर्धा में पीछे ना रहे।
सरकार का पांच साल का रोडमैप तैयार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उत्पादों की पहुंची बढ़ाने के लिए श्री सिंह ने ऐसे निर्देश दिए हैं। राजनाथ सिंह देश की 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के वार्षिक प्रदर्शन और प्रगति का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने प्रगति की समीक्षा करते हुए कई विंदुओं को रेखांकित किया है। इनमें सबसे गंभीर मसला हथियारों के प्रगतिशील बनाने को लेकर है।
राजनाथ सिंह ने कहा है कि अगले 5 साल के लिए एक स्पष्ट रोड मैप तैयार करें जो व्यवहारिक हो और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप देश की रक्षा मजबूती से कर सके। उन्होंने कहा है कि दुनिया में रक्षा उत्पादों की तकनीकी बदल रही है, इसलिए हमें पहले से होशियार रहना पड़ेगा। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित रक्षा सार्वजनिक उपक्रम में समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने तमाम बातें कही है। निर्देश देते हुए कहा की समीक्षा का मुख्य फोकस देश में रक्षा उत्पादन को और मजबूत करना है।
डिफेंस पीएसयू में बदलाव होना है जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर और स्वदेशी विचारों से जो मेल खा रहे, सरकार उस काम पर ज्यादा ध्यान देती है। यही कारण है की सेना में राजनाथ सिंह ने यह बात कही है की रक्षा उत्पादन को मजबूत करना है। इसमें स्वदेशी तकनीक का विकास करना, नवाचार को बढ़ावा देना और रक्षा निर्यात में तेजी लाना जरूरी है। इन बिंदुओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि हमें बाहर से माल खरीदने से बचाना है। बाहर की तकनीकी से बढ़िया है, देश की तकनीकी। इसको और उन्नतशील मार्ग पर ले जाना है।
स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास की जरूरत
उन्होंने कहा है की सभी 16 डीपीएसयू के प्रदर्शन और अब तक की प्रगति दिख रही है। रक्षा उत्पादन में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना करते हुए कहा कि डीपीएसयू देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में आगे रहा है। रक्षा मंत्री ने कहा है कि हमारा देश तकनीकी में काफी आगे है। उत्पादन क्षमता, तकनीकी क्षमता, अत्यधिक एवं विकास को रफ्तार देने के लिए हम संपन्न है।
भारतीय शस्त्रबलों की भविष्य की जरूरतों को देश में ही विकसित करने की इच्छा जताई है। निर्देश देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा की स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और नवाचार को प्राथमिकता देने की जरूरत है। दरअसल, देश में पिछले कई सालों से स्वदेशी तकनीकी पर जोर दिया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में भी कई अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं जो पूर्णतः हैं। स्वदेशी निर्मित उत्पाद और इनकी गुणवत्ता भी सामने आ चुकी है।
पाकिस्तान से युद्ध के समय भारतीय हथियार दिखे
पाकिस्तान से युद्ध के दौरान भारतीय तकनीकी पर आधारित शस्त्र आदि का इस्तेमाल जब किया गया तो दुनिया ने भी उसकी ताकत देख ली। राजनाथ सिंह ने कहा की सशस्त्र परिचालन जरूरत के अनुरूप हो। यह भारतीय तकनीकी को बढ़ावा देने वाली हो। देश को विदेशी तकनीकी पर निर्भरता कम करने की जरूरत है। उन्होंने डीपीएसयू से नई तकनीक को अपनाने और आधुनिक एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए कहा है। बदलती युद्ध तकनीक और सुरक्षा वातावरण के अनुरूप देश की क्षमताओं में बदलाव लाना जरूरी है। बैठक में कहा गया की डिफेंस पीएसयू अंतरराष्ट्रीय बाजार में सफल रहे।
आधुनिक युद्ध तकनीकी आधारित हो रहे
भारतीय उत्पादों को लोगों की जरूरत और टिकाऊ हों। गुणवत्ता के उत्पाद प्रतिस्पर्धी भी हों। उनका कहने का मतलब साफ था कि देश में रक्षा क्षेत्र के जो उत्पाद तैयार किए जाएं, वह विदेश में आकर्शित हांे और टिकाऊ होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएसयू में बदलाव का मतलब सिर्फ यह नहीं कि हम अर्थ तंत्र का इस्तेमाल करते रहें। बाद में उनका रिजल्ट बेहद कमजोर निकले। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्यता है। जब आधुनिक युद्ध तेजी से तकनीकी आधारित हो रहे हों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वत प्रणालियों ड्रोन साइबर क्षमताओं तथा उन्नत हथियार प्रणालियों का बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो रहा हो, ऐसी स्थिति में डिफेंस पीएसयू में बदलाव होना जरूरी है। इसलिए 5 साल का रोड मैप तैयार किया जाना चाहिए। समीक्षा बैठक में भविष्य की जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया।
स्वदेशी तकनीकी अपनाने की सलाह
निर्देश दिए जिन क्षेत्र में बदलाव किया जा सकता है, उनमें स्वदेशी तकनीकी स्तर पर करें। कहा कि निर्यात क्षमता बढ़ाने से भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्री सिंह ने कहा कि डिफेंस पीएसयू बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप बदलाव ला रहा है। हमें पूरी उम्मीद है कि भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरत को पूरा करने में यह कामयाब होगा और भारत की मजबूती मौजूदा हालात से बेहतर होगी। हमारी तकनीकी और स्थिति को भी शामिल करने की जरूरत है।
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