पंजाब-हरियाणा की पराली अब कचरा नहीं, बनेगी ऊर्जा का स्रोत; गैस के साथ सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल बनाने पर जोर
खबर सार :-
नितिन गडकरी के मुताबिक पराली जलाने की समस्या से निपटने में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल कारगर साबित हो रहा है। कृषि अवशेषों से इथेनॉल, बायो-CNG और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल तैयार किए जा रहे हैं। इससे प्रदूषण घटाने के साथ पराली को आर्थिक संसाधन में बदलने की कोशिश है। पंजाब और हरियाणा की पराली का बेहतर इस्तेमाल दिल्ली समेत आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को मजबूत कर सकता है।
खबर विस्तार : -
Stubble burning, Nitin Gadkari: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि देश में पराली जलाने की समस्या अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय उनका इस्तेमाल इथेनॉल और बायो-CNG बनाने में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में पराली जलाने की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। सरकार कृषि अवशेषों और कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में काम कर रही है।
गडकरी मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के पहले स्पीकर चार्टी लाल गोयल की 99वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और पारिस्थितिकी से जुड़ी चुनौतियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और पारिस्थितिकी की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का पहला कर्तव्य होना चाहिए।
पराली अब कचरा नहीं, बनेगी कमाई का जरिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती थी। इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा पर पड़ता था। पराली के धुएं को दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में गिना जाता रहा है। अब सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को बढ़ावा दिया है। गडकरी के मुताबिक, पराली को अब बेकार कृषि अवशेष के बजाय उपयोगी संसाधन के तौर पर देखा जा रहा है। इससे इथेनॉल और बायो-CNG जैसे ईंधन तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि अवशेषों का इस्तेमाल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) बनाने में किया जा रहा है। इससे पराली के निपटारे के साथ वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
प्रदूषण के तीनों रूप गंभीर चुनौती
गडकरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से वह पर्यावरण और पारिस्थितिकी के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, मानव समाज के सामने पर्यावरण का लगातार क्षरण एक बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण को गंभीर चिंता का विषय बताया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रदूषण के ये तीनों रूप सीधे तौर पर लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर जीवन प्रत्याशा पर भी पड़ सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली लंबे समय से प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करती रही है, लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव आना शुरू हुआ है।

कबाड़ के ढेर को बनाया सुंदर बगीचा
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने उस स्थान के बदलाव की भी सराहना की, जहां पहले कबाड़ का ढेर हुआ करता था। अब उसी जगह को एक सुंदर बगीचे में बदल दिया गया है। उन्होंने इस बदलाव को कबाड़खाने के कायाकल्प का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बदलाव केवल किसी स्थान की तस्वीर नहीं बदलते, बल्कि समाज और पर्यावरण दोनों के लिए सकारात्मक संदेश देते हैं। कचरे को सही तरीके से इस्तेमाल कर उसे उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। इससे स्वच्छता के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
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जीवन की लंबाई से ज्यादा महत्वपूर्ण योगदान
गडकरी ने कार्यक्रम में जीवन के उद्देश्य और सामाजिक योगदान पर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति ने कितने वर्षों तक जीवन जिया, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उसने अपना जीवन किस तरह जिया और समाज के लिए उसका योगदान क्या रहा। उन्होंने कहा कि जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और यह एक सार्वभौमिक नियम है। इसलिए किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्यांकन उसके जीवन की अवधि से नहीं, बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि उसने अपने जीवन को किस उद्देश्य और किस तरीके से जिया।
किसानों और अर्थव्यवस्था को भी फायदा
कृषि अवशेषों से ईंधन तैयार करने की पहल को गडकरी ने पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक अवसरों से भी जोड़ा। पराली को जलाने के बजाय उसका इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन में होने से एक ओर प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर कृषि अवशेषों का आर्थिक मूल्य भी बढ़ सकता है। इथेनॉल, बायो-CNG और SAF जैसे विकल्पों के लिए पराली का इस्तेमाल बढ़ने से कचरे के प्रबंधन की चुनौती को अवसर में बदलने की कोशिश हो रही है। ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का यही मॉडल भविष्य में कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल और स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)....
1.पराली जलाने की समस्या पर नितिन गडकरी ने क्या कहा?
गडकरी ने कहा कि पराली जलाने की समस्या अब कम हो रही है और आने वाले समय में यह पूरी तरह खत्म हो सकती है।
2.पराली से क्या-क्या बनाया जा रहा है?
पराली और कृषि अवशेषों से इथेनॉल, बायो-CNG और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) तैयार किया जा रहा है।
3.पराली जलाने से दिल्ली पर क्या असर पड़ता है?
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं दिल्ली के वायु प्रदूषण को प्रभावित करता रहा है।
4.‘वेस्ट टू वेल्थ’ का क्या मतलब है?
इसका मतलब कचरे और कृषि अवशेषों को बेकार समझने के बजाय उनसे ईंधन और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाकर आर्थिक संसाधन में बदलना है।
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