हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण: राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार को घेरा

खबर सार :-

हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुए कथित शुद्धिकरण और राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया।
राहुल गांधी पर एफआईआर को लेकर कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला

खबर विस्तार : -

New Delhi: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा संपन्न होने के बाद उपजे कथित शुद्धिकरण विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस प्रकरण के विरोध में स्वर मुखर करने वाले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद से विपक्षी दल के नेताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र तथा उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर तीखे हमले बोलते हुए इसे न्याय प्रणाली और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई करार दिया है। 

उपलब्ध विवरणों के अनुसार, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हल्द्वानी में आयोजित जनसभा के बाद एक मंच का कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया। इस घटना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के भीतर और बाहर सार्वजनिक रूप से यह बात रखी थी कि इस कृत्य से उन्हें छुआछूत जैसा अनुभव हुआ और उन्हें गहरा अपमान महसूस हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब राहुल गांधी ने इस भेदभावपूर्ण रवैया के खिलाफ आवाज उठाई और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की, तो प्रशासन द्वारा उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

कांग्रेस नेतृत्व और नेताओं की प्रतिक्रिया

कांग्रेस महासचिव कुमारी शैलजा ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि खरगे की जनसभा के बाद कथित रूप से शुद्धिकरण करने वालों के विरुद्ध अब तक कोई ठोस विधिक कदम नहीं उठाया गया, जबकि इस जातिवादी कृत्य के खिलाफ आवाज उठाने वाले राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना गंभीर अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष द्वारा इस कृत्य का खुला बचाव किया गया, जो सरकार की दलित विरोधी और संविधान विरोधी मानसिकता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाना सरकार का एक कठोर और पूर्वाग्रह से ग्रसित निर्णय है। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से स्पष्ट होता है कि सत्तारूढ़ दल राहुल गांधी के राजनीतिक विरोध और उनकी मुखरता से भयभीत है।

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सत्ता पक्ष के बयानों और कार्रवाई पर सवाल

पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस मामले में सरकार की नीयत पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव स्तर के नेता इस घटना के औचित्य को सही ठहराने वाले बयान दे रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के वंचित और दलित वर्ग के नागरिकों को सम्मान के साथ जीने तथा बराबरी का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, जिसके समर्थन में खड़े होने पर नेता प्रतिपक्ष पर मुकदमा लाद दिया गया। सांसद पवन खेड़ा ने मीडिया के समक्ष स्पष्ट किया कि मुख्य विवाद राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर नहीं, बल्कि हल्द्वानी में घटित वह कथित शुद्धिकरण है जिसने सामाजिक ताने-बाने को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत संदिग्ध है कि भेदभावपूर्ण आचरण करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है और उसके खिलाफ मुखर होने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है। सांसद इमरान मसूद ने भी दोहराया कि जब तक दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक इस मामले में न्याय की उम्मीद करना बेमानी है।

यह पूरा प्रकरण उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक जनसभा के बाद सामने आया था। जनसभा के पश्चात मंच के कथित तौर पर शुद्धिकरण किए जाने को लेकर संसद से लेकर सड़क तक तीखी बहस छिड़ गई थी। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि यह घटना दलित और वंचित समाज के अपमान से जुड़ी है, जिस पर कार्रवाई होने के बजाय इसपर आवाज उठाने वाले नेताओं को कानूनी पचड़े में फंसाया जा रहा है।

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