भारत-उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौतों और 5 योजनाओं का ऐलान, रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने पर सहमति
खबर सार :-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 11 समझौता ज्ञापनों और 5 प्रमुख पहलों का ऐलान हुआ। दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की।
खबर विस्तार : -
ताशकंद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में दोनों देशों ने 11 समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान किया और पांच प्रमुख पहलों की घोषणा की। दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने का भी ऐलान किया।
विदेश मंत्रालय की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के दो दिवसीय दौरे के दौरान संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण, खनन, अभिलेखीय सहयोग और आर्थिक संबंधों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है।
2026-30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम
भारत और उज्बेकिस्तान ने वर्ष 2026 से 2030 के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आदान-प्रदान पर समझौता किया। इसके तहत दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक गतिविधियों, कार्यक्रमों और आपसी संपर्क को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा उज्बेकिस्तान के टर्मेज क्षेत्र में स्थित प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज टेपा और कारा टेपा के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए भी समझौता हुआ। भारत के विदेश मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की सांस्कृतिक विरासत एजेंसी के बीच हुए इस समझौते को दोनों देशों की साझा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है।
अभिलेखीय और पारंपरिक चिकित्सा में सहयोग
भारत के संस्कृति मंत्रालय एवं राष्ट्रीय अभिलेखागार और उज्बेकिस्तान के न्याय मंत्रालय के तहत आने वाली एजेंसी उजआर्काइव के बीच अभिलेखीय कार्य के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापन हुआ। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखीय क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना है। वहीं, आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा की अन्य प्रणालियों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। इसके माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े ज्ञान और सहयोग को आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार होगा।
भूविज्ञान और खनिज संसाधनों पर समझौता
खनिज और भूविज्ञान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के खान मंत्रालय और उज्बेकिस्तान के खनन उद्योग एवं भूविज्ञान मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी। दोनों पक्षों के बीच इस क्षेत्र में विशेषज्ञता और सहयोग को बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा। पर्यटन के क्षेत्र में भी भारत और उज्बेकिस्तान ने 2026-28 के लिए सहयोग कार्यक्रम पर सहमति जताई। भारत के पर्यटन मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की पर्यटन समिति के बीच हुए इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच पर्यटन संबंधों को मजबूत करना है।
राजनयिक प्रशिक्षण और आर्थिक संवाद
भारत के सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय के विश्व अर्थव्यवस्था एवं कूटनीति विश्वविद्यालय की डिप्लोमैटिक अकादमी के बीच भी समझौता ज्ञापन हुआ। इससे दोनों देशों के राजनयिक प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही आर्थिक और वित्तीय संवाद को मजबूत करने के लिए भारत के वित्त मंत्रालय और उज्बेकिस्तान के अर्थव्यवस्था एवं वित्त मंत्रालय के बीच भी समझौता ज्ञापन हुआ। दोनों देशों के बीच आर्थिक नीतियों और वित्तीय क्षेत्र में संवाद बढ़ाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पर्यावरण और उच्च शिक्षा में सहयोग
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और उज्बेकिस्तान की पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय समिति के बीच समझौता हुआ। उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत दोनों देशों के शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच संपर्क तथा सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
गुजरात और समरकंद के बीच सहयोग
द्विपक्षीय संबंधों को राज्यों और क्षेत्रों के स्तर तक विस्तार देने के लिए भारत के गुजरात राज्य और उज्बेकिस्तान के समरकंद क्षेत्र के बीच साझेदारी संबंध स्थापित करने को लेकर सहयोग समझौते पर भी मुहर लगी। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में आदान-प्रदान और सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।
पांच प्रमुख पहलों का ऐलान
समझौतों के अलावा भारत ने उज्बेकिस्तान के साथ पांच प्रमुख पहलों की घोषणा की। इनमें सबसे प्रमुख अरल सागर क्षेत्र में वनरोपण के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान शामिल है। इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को समर्थन दिया जाएगा। भारत की ओर से लाल बहादुर शास्त्री हिंदी भाषा छात्रवृत्ति के तहत 100 छात्रवृत्तियों की भी घोषणा की गई। इससे उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा के अध्ययन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज में आईसीसीआर संस्कृत चेयर स्थापित करने की घोषणा की गई। यह पहल संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़े दोनों देश
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान ने अपनी मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने की घोषणा की। इससे दोनों देशों के संबंधों को राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में और व्यापक बनाने का आधार तैयार हुआ है। ताशकंद में हुए समझौतों और घोषणाओं से स्पष्ट है कि भारत और उज्बेकिस्तान अपने द्विपक्षीय संबंधों को केवल पारंपरिक सहयोग तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण और आर्थिक क्षेत्र में नए आयाम देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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