हथियारों के मोह में फंसे नक्सली, जमीन में छिपाए थे ग्रेनेड लांचर और विस्फोटक
खबर सार :-
सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर अपना पूरा अधिकार जमाना चाह रही है। वह देश को नक्सल मुक्त के प्रति वचनवद्ध है। इसीलिए जंगलों में सर्च अभियान चलाकर हथियार, बारूद आदि वस्तुएं बरामद की गई हैं।
खबर विस्तार : -
नारायणपुर: केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी छत्तीसगढ़ पूरी तरह से नक्सल मुक्त नहीं हो पा रहा है। केद्र और प्रदेश की सरकार को पहले की अपेक्षा काफी कामयाबी मिल रही है। नारायणपुर जिले में अदनार के जंगल से रविवार को भी बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किया गया है। इसे नक्सलियों ने अपने भविष्य की योजनाओं के तहत छिपा रखा था।
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यह कई विभिन्न स्थानों पर हथियार और विस्फोटक डंप किए रहते हैं। नारायणपुर के जंगल में यह स्थान एक चर्चित स्थल है। इसमें सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान चलाया और उसे सफलता भी मिली। इसका कारण था कि हथियार मुक्त कराए गए कुछ क्षेत्र हैं, जहां के लोग अपने आप में सुधार लाना चाहते हैं। वह अपने पुराने रूख की ओर न वापस चले जाएं, इसलिए सर्च अभियान चलाया जाता है। जंगल में चलाए गए सर्च अभियान से 10 राइफल, दो ग्रेनेड लांचर, जिंदा कारतूस और विस्फोटक मिला है।
जंगल को प्लास्टिक से घेरा गया था
पुलिस का मानना है की पूरी तरह से नक्सली मुक्त एरिया बनाने के लिए यहां बीच-बीच में सर्च ऑपरेशन चलाया जाता है। यदि यह कार्य नहीं किया जाएगा तो हथियार लाकर जंगलों में छुपा दिया जाएगा। हमें पता भी नहीं चल पाएगा और वह इनके काम आ जाएगा। नारायणपुर एसपी संदीप कुमार पटेल ने घटना के संबंध में बताया है कि महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सुरक्षा बल जंगल में किसी तरह से पुराने हथियारों तक पहुंच पाए। यहां जंगल में विस्फोटक और हथियार डंप किया गया था। नक्सलियों ने लंबे समय तक जंगल को अपने कब्जे में रखा, इसलिए उनको जगह की ज्यादा जानकारी है।
अभी मिल रहा है बड़े पैमाने पर बारूद
उन्होंने बताया कि पुराने नक्सली सामग्री को बरामद किया जा चुका है। हथियार हटा देने से कहीं भी मौजूद नक्सली गतिविधियों को पूरी तरह समाप्त करने में मदद मिलेगी। हथियार और बारूद इनके पास से निकल जाएगा तो यह अपने आप में कमजोर पड़ जाएंगे। इनके पास अधिक मात्रा में अभी हथियार हो सकते। यह भी माना जा रहा है कि इनके पास अगर हथियार वर्तमान समय में हैं तो यह किसी भी समय भविष्य के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए इन पर कब्जा बनाए रखना बेहद जरूरी है। नारायणपुर पुलिस अधीक्षक 129 वाहिनी बीएसएफ के कमांडेंट मुकेश कुमार के निर्देशन में सर्चिंग अभियान चलाया गया है। नारायणपुर पुलिस और 129 वी वाहिनी बीएसएफ की संयुक्त टीम ने अदनार क्षेत्र के जंगलों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद थोड़ी-थोड़ी दूर पर संभावित ठिकानों पर जांच पड़ताल की।
बस्तर में अलग-अलग ठिकानों पर डाले गए छापे
सर्च अभियान को गति देने के लिए ही जंगल के उत्तर पश्चिम दिशा में जवानों ने सघन तलाशी भी चलाई। सुरक्षा बलों को इसी दौरान संदेह होने पर कुछ स्थानों की तलाशी ली गई, जिसमें बड़े पैमाने पर हथियार मिले हैं। सुरक्षा बलों को जंगल में नक्सलियों द्वारा पूर्व में रखा गया यह खजाना मिला है। जवानों ने डंप की तलाशी ली तो उसमें कई रायफल, हैंड ग्रेनेड और टेलीस्कोप भी मिले हैं।
दो किलो विस्फोटक और कुछ कारतूस भी मिले है। एक अधिकारी ने बताया कि बस्तर को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए अभियान चलाया गया है। 31 मार्च के बाद भी बस्तर में अलग-अलग जंगलों के ठिकानों पर छापे डाले गए थे और हथियार बरामद किये गये थे। सर्चिंग अभियान के दौरान नारायणपुर बीजापुर दंतेवाड़ा के लोगों में अफरातफरी बनी रही।
कहां-कहां चलाया गया अभियान
31 मार्च के बाद जो अभियान चलाया गया उनमें 29 अप्रैल को कांकेर जंगल में पांच-पांच किलो के सात कुकर आइईडी, दो पाइप बम, कोडेक्स वायर और अन्य माओवादी सामग्री बरामद किया गया था। इससे पहले 3 मई को दंतेवाड़ा के बारसूर क्षेत्र के जंगल में माओवादियों का बड़ा विस्फोटक डंप पाया गया था। अभियान में करीब 10 किलो का पाइप बम, आइईडी और अन्य विस्फोटक सामग्री मिली। 12 मई को नारायणपुर के अबूझमाड़ के जंगल में बड़ी रकम, तीन एके-47, तीन एसएलआर, अन्य राइफलें और 132 बीजीएल सेल समेत इलेक्ट्रानिक डेटोनेटर व कारडेक्स वायर बरामद कर बड़ी कामयाबी पाई गई।
13 मई को बीजापुर में माओवादियों के तीन ठिकानों से 65.52 लाख रुपये के साथ 32 हथियार, कारतूस और विस्फोटक बरामद किए गए। 30 अगस्त को नारायणपुर के अदनार के जंगल में पुराना डंप पाया गया। इसमें 10 राइफल, दो बैरल ग्रेनेड लांचर, 13 बीजीएल शेल, 16 कारतूस और करीब दो किलो विस्फोटक की बरामदगी की सफलता मिली।
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