भारत-उज्बेकिस्तान यूरेनियम समझौते पर भाजपा की प्रतिक्रिया: ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीति का नया अध्याय

खबर सार :-

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भारत-उज्बेकिस्तान के बीच हुए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते को देश की ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु आत्मनिर्भरता के लिए ऐतिहासिक बताया है।
भारत-उज्बेकिस्तान यूरेनियम समझौता ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक: भाजपा

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान हुए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते को देश के लिए एक मील का पत्थर करार दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को मीडिया को जारी एक बयान में कहा कि यह अनुबंध महज़ एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु आत्मनिर्भरता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस समझौते से देश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। इस संदर्भ में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने वर्ष 1966 की ताशकंद घटना का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इसी शहर में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था, जिसके बाद यह धारणा थी कि कुछ वैश्विक ताकतें भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने से रोकना चाहती थीं। अब लगभग छह दशक पश्चात उसी ताशकंद की धरती पर यह ऊर्जा समझौता संपन्न हुआ है, जिसे भाजपा ने अतीत की चुनौतियों और वर्तमान की सफलताओं के बीच एक सकारात्मक बदलाव के रूप में रेखांकित किया है।

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु आत्मनिर्भरता का विस्तार

यह दीर्घकालिक समझौता भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को निरंतर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। बढ़ते औद्योगिक विकास और शहरीकरण के बीच देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिहाज से यह अनुबंध बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी के अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार वैश्विक मंच पर अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रही है। त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारियों को सुदृढ़ किया गया है। ऊर्जा के मोर्चे पर यह समझौता आने वाले दशकों के लिए भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेगा। यह केवल तात्कालिक आवश्यकताओं की पूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी गति प्रदान करता है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता बनाए रखने के दृष्टिकोण से भी इस अनुबंध को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ये भी पढ़ेंः- PM Modi ने उज्बेकिस्तान में लोगों को सिखाया योग, शेयर किया वीडियो

सांस्कृतिक कूटनीति और विरासत का संरक्षण

यूरेनियम समझौते के अतिरिक्त इस यात्रा के दौरान सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने उज्बेकिस्तान के तेरमेज क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन बौद्ध मठ के संरक्षण का उत्तरदायित्व अपने कंधों पर लिया है। इसके साथ ही, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) द्वारा ताशकंद विश्वविद्यालय में संस्कृत पीठ की स्थापना किए जाने की घोषणा की गई है। इन पहलों के माध्यम से दोनों देशों के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले इंडोनेशिया के प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण का कार्य भी भारत द्वारा किया जा चुका है। सरकार का यह रुख दर्शाता है कि आधुनिक कूटनीति के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

कूटनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण समझौता

इस समझौते की पृष्ठभूमि वर्ष 1966 की ताशकंद घटना से जुड़ी है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का वहां निधन हुआ था। उस समय भारत की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न आशंकाएं और अवरोध थे। लगभग 60 वर्षों के अंतराल के बाद उसी स्थान पर दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौते का होना कूटनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है।

यह भी पढ़ेंः-PM मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ओली दाराजली दोस्तलिक'

अन्य प्रमुख खबरें