जिंदा आने की उम्मीद नहीं थी, नेपाल में फंसे 106 में से 4 टूरिस्ट नागपुर पहुंचे, सरकारी प्रयासों को सराहा
खबर सार :-
नेपाल गए भारतीय मुश्किलों से अपने देश लौट पा रहे हैं। चार टूरिज्म भारत की सरकारी सेवाओं को अपने जिंदा लौट पाने के लिए धन्यवाद दे रहे हैैं।
खबर विस्तार : -
नागपुर,: नेपाल में फंसे 106 टूरिस्ट में से चार सुरक्षित नागपुर लौट गए हैं। यह लोग अब सरकार को बार-बार धन्यवाद दे रहे हैं। इनका कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वे जिंदा वापस लौट पाएंगे।
नेपाल में लोग भयानक मुसीबत का सामना कर रहे हैं। कई लोग पिछले दिन देश पहुंच पाने पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, स्थानीय प्रशासन और नेपाल में भारत के राजदूत को धन्यवाद दे रहे हैं। इनका कहना है कि समय पर सभी ने उनका साथ दिया। मदद के भरोसे पर ही वह आगे बढ़ते रहे और अपने देश आ पाए। इन चार टूरिस्ट में एक ने बताया कि आपदा के कारण रास्ते और पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे। संपर्क टूट जाने के कारण वह वहीं फंस गए थे।
सरकारों ने ही बनवाए थे कागज
कोई न आगे जा पा रहा था न पीछे लौट ही पा रहा था। जैसे जिंदगी थमने की राह पर चल पड़ी थी। उन चार नागरिकों में से एक ने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि हम जिंदा वापस लौटेंगे। अपनी पीडा जाहिर करते हुए बोला कि हमारे पास कुछ दस्तावेज नहीं थे। हम हताश थे, लेकिन उन परिस्थितियों में प्रशासन ने बहुत मदद की। हमने जैसे ही जानकारी दी, उन्होंने तुरंत हमारे डॉक्यूमेंट्स बनाकर दे दिए। इसके बाद हम फ्लाइट से दिल्ली आ गए। दिल्ली से हमें नागपुर पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हुई।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने किया था फोन
घटना के संबंध में बताया कि जब यह घटना घटी तो हमें कुछ मालूम नहीं हुआ। हम लोग अंदर की तरफ थे। बाहर वालों की जानकारी भी हमें नहीं थी। 10 दिनों के सफर में हमारे साथ 106 लोग थे। वहां रूकने के लिए हमारे पास आठ और दो दिन यात्रा के थे। उन अन्य 106 नागरिकों को पहले ही आने में सफलता मिल गई। वह सभी जान पहचान और रिश्तेदार हैं। इस पूरी प्रक्रिया में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और स्थानीय लोगों की मदद काफी सराहनीय रही। मुख्यमंत्री ने एक-एक आदमी को वापस लाने के लिए बहुत मेहनत की। इनके पास फ्लाइट की टिकट भी यहीं से की थी। वापस लौटने वालों में दीपक पांडेय ने बताया कि हम सात-आठ दिन अच्छे से रहे। हमें पुलिस वालों ने फिर आगे रोक दिया।
आपदा आने के कारण रास्ते बंद हो गए
वापस आने के दिनों में आपदा आ चुकी थी। रास्ते खराब और पुल टूट चुके। जब जानकारी मिली और कुछ चीजें देखी तो हमारे पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई थी। दीपक पांडेय ने बताया कि हमारे साथ एक मरीज भी था। इमरजेंसी में उसे यहां लाना था। उनके पास अब टिकट भी नहीं था। यह सब मदद मिलने से हुआ और तक हिम्मत मिली कि सब ठीक हो जाएगा।
नेपाल में भी भारत के राजदूत ने हमें बहुत मदद की। हम सरकार को धन्यवाद कह रहे हैं। यात्रा में ही वर्षा उपाध्याय को भी नेपाल की आपदा का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि पोखरा में दो दिन रुककर वहां से काठमांडू जाना हुआ। वहां चार-पांच दिन रुकने के बाद आपदा आ गई। हमारे पास डरने के अलावा कुछ नहीं था। मुख्यमंत्री से हमारी बात हुई, ऐसा लगा कि हमें जान मिल गई।
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जो परिजन वापस अपने देश आ रहे हैं, उनको जैसे संसार की खुशी मिल रही है। सरकारों का भी प्रयास चल रहा है कि कोई भी इस आपना में दिक्कत न महसूस करे। इसलिए मुसीबत में हर भारतीय अपना लग रहा है। जैसे ही घरवालों से मुलाकात हुई नागपुर लौटे लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे 4 भारतीय सुरक्षित निकाले
नेपाल के रसुवा जिले में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से शनिवार को चार भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। विदेश मंत्रालय अपडेट किया है। एमईए ने बताया कि बचाए गए चारों भारतीयों के जल्द काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है। बचाए गए भारतीय नागरिकों की पहचान रिपु कुमार, चनेश्वर नरजरी, कृपा शंकर और मोहम्मद मिनहाजुद्दीन के रूप में हुई है। त्रिशूली-3 ‘ए’ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है। इसमें नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के कुल 82 कर्मी जुटे हुए हैं।
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