देशभर में जन्माष्टमी की धूम: यूपी-दिल्ली से लेकर राजस्थान और गुजरात तक मंदिरों में दिखेंगे कान्हा के रंग
खबर सार :-
जन्माष्टमी का उत्साह पूरे देश में नजर आ रहा है। मंदिरों में कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। यूपी, राजस्थान और दिल्ली के प्रमुख मंदिर सज चुके हैं।
खबर विस्तार : -
नई दिल्ली: जन्माष्टमी का नाम सुनते ही मथुरा और वृंदावन की याद आ जाती है; हालांकि, भगवान कृष्ण का जन्मदिन उत्तर भारत के कई अन्य शहरों में भी बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। राजस्थान में जयपुर और नाथद्वारा से लेकर हरियाणा में कुरुक्षेत्र और राजधानी दिल्ली तक, इस मौके पर कई पुराने और मशहूर मंदिरों को सजाया जाता है। यहां खास पूजा, श्रृंगार, आरती और भजन-कीर्तन जैसे कार्यक्रम होते हैं। इस साल जन्माष्टमी 4 सितंबर को है और इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
राजस्थान के जयपुर में स्थित गोविंद देवजी मंदिर जन्माष्टमी के जश्न का एक मुख्य केंद्र है। भगवान कृष्ण को समर्पित इस ऐतिहासिक मंदिर में इस दिन खास दर्शन और आरती होती है। सुबह-सुबह 'मंगला झांकी' (भोर में दर्शन) का आयोजन होता है; भगवान गोविंद देवजी को पीले कपड़े पहनाए जाते हैं और बड़ी संख्या में भक्त आशीर्वाद लेने आते हैं। 'मंगला' और 'ग्वाल आरती' के दौरान भी पूजा करने वालों की भारी भीड़ होती है। जयपुर में कृष्ण के कई मंदिरों में शानदार सजावट, झांकियां और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। बच्चे राधा और कृष्ण के रूप में सजे-धजे दिखते हैं और बाजारों में त्योहार का माहौल साफ महसूस किया जा सकता है।
राजस्थान का श्रीनाथजी मंदिर भक्तों के लिए खास
राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथजी मंदिर कृष्ण भक्तों के लिए बहुत खास है। यहां भगवान की पूजा 'बाल स्वरूप' (भगवान कृष्ण के बाल रूप) के रूप में की जाती है। जन्माष्टमी के लिए मंदिर की परंपराओं में व्रत, बाल गोपाल (बाल कृष्ण) का श्रृंगार और अभिषेक (स्नान), भोग (पवित्र भोजन) चढ़ाना और आधी रात को जन्म का जश्न मनाना शामिल है। मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जन्म के समय भगवान को स्नान कराया जाता है और उनका श्रृंगार किया जाता है, साथ ही पंजीरी, पंचामृत और फल जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं। इसके बाद आरती होती है और भगवान के जन्म की खुशी में उत्सव के गीत गाए जाते हैं।
कुरुक्षेत्र में जन्माष्टमी का खास महत्व
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जन्माष्टमी का खास महत्व है, क्योंकि इस शहर का भगवान कृष्ण और भगवद गीता से गहरा नाता है। कुरुक्षेत्र का बिड़ला मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और यहां जन्माष्टमी का भव्य उत्सव मनाया जाता है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार, मंदिर इस मौके पर शानदार कार्यक्रम आयोजित करता है। सफ़ेद संगमरमर से बने इस मंदिर में कृष्ण की मूर्ति और सुंदर परिसर भक्तों के लिए खास आकर्षण हैं। कुरुक्षेत्र का इस्कॉन मंदिर भी जन्माष्टमी पर होने वाले खास कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, भगवान कृष्ण के जन्मदिन के जश्न में अभिषेक (देवता को पवित्र जल से स्नान कराना), भोग (भोजन का अर्पण), मंदिर की भव्य सजावट और लंबे समय तक चलने वाला कीर्तन उत्सव शामिल होता है। बड़ी संख्या में भक्त मंदिर आते हैं और प्रसाद बांटा जाता है। कुरुक्षेत्र में जन्माष्टमी का जश्न न केवल पूजा-अर्चना से, बल्कि सेवा कार्यों और सामूहिक भक्ति की भावना से भी मनाया जाता है।
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दिल्ली के मंदिरों में भी जन्माष्टमी की धूम
दिल्ली के कई प्रमुख मंदिरों में भी जन्माष्टमी बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है। राजधानी के इस्कॉन मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दौरान माहौल भजन, कीर्तन, पूजा, अभिषेक और देवता के विशेष दर्शन से भरा रहता है। दिल्ली के बिड़ला मंदिर और राधा-कृष्ण के अन्य कई मंदिरों में भी विशेष सजावट और पूजा-अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। भक्तों की भारी भीड़ के साथ-साथ राधा-कृष्ण की लीलाओं को दर्शाती झांकियां और विभिन्न भक्ति कार्यक्रम इन मंदिरों के आसपास एक बहुत ही खास माहौल बनाते हैं।
श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा सज-धज कर तैयार
भगवान कृष्ण (कान्हा) की नगरी मथुरा कृष्ण जन्माष्टमी भगवान के जन्म का उत्सव के लिए पूरी तरह सज-धजकर तैयार है; पूरा शहर किसी दुल्हन की तरह जगमगा रहा है। देश-विदेश से आए भक्तों के आने से पूरे ब्रज क्षेत्र में उत्सव का माहौल छा गया है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से लेकर द्वारकाधीश मंदिर, बांके बिहारी मंदिर और इस्कॉन मंदिर तक हर जगह खास सजावट की गई है। मंदिरों को फूलों, रंग-बिरंगी लाइटों और मनमोहक झांकियों से सजाया गया है। मथुरा और वृंदावन की गलियां कृष्ण भजनों से गूंज रही हैं। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ को संभालने के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। लाखों भक्तों के आने की उम्मीद को देखते हुए एक खास ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है।
द्वारका में जन्मदिन के जश्न की तैयारियां
वहीं, भगवान द्वारकाधीश के धाम द्वारका में भी जन्मदिन के जश्न की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस पवित्र शहर में इस मौके को बहुत धूमधाम से मनाने के लिए खास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। द्वारका के जगत मंदिर को शानदार लाइटों से रोशन किया गया है। चूंकि भगवान द्वारकाधीश यहां 'द्वारका के राजा' के रूप में विराजमान हैं, इसलिए जन्माष्टमी का त्योहार बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, जगत मंदिर में लाइटिंग सिस्टम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह 10 किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे। हर साल हजारों भक्त दर्शन के लिए जगत मंदिर आते हैं, और जन्माष्टमी के दौरान भगवान का जन्मदिन मनाने के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है। इसे ध्यान में रखते हुए जगत मंदिर परिसर, मंदिर के शिखर और आसपास के इलाकों में आकर्षक लाइटिंग सजावट की गई है। पूरा परिसर और उसके आसपास का इलाका रोशनी से जगमगा रहा है, और रात में जगत मंदिर का नजारा वाकई शानदार होता है।
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