भारतीय नौसेना को मिला पहला स्वदेशी बहुउद्देशीय युद्धपोत ‘समर्थक’, 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से हुआ तैयार
खबर सार :-
भारतीय नौसेना में स्वदेशी बहुउद्देशीय युद्धपोत समर्थक शामिल हुआ। 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह पोत हथियारों, सेंसर और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण के साथ समुद्री निगरानी और आपदा राहत में भी उपयोगी होगा।
खबर विस्तार : -
कारवार: भारतीय नौसेना की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी बहुउद्देशीय युद्धपोत ‘समर्थक’ को नौसेना में शामिल किया। इस पोत का निर्माण निजी क्षेत्र की कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के पोत निर्माण केंद्र में किया गया है। इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। यह पोत देश में विकसित नए हथियारों, सेंसर और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण एवं मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
‘समर्थक’ का नौसेना में शामिल होना भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण कार्यक्रम और निजी पोत निर्माण उद्योग की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। यह किसी भारतीय निजी पोत निर्माण केंद्र द्वारा निर्मित पहला प्रमुख युद्धपोत बताया गया है। इसके शामिल होने से नौसेना को आधुनिक तकनीकों के परीक्षण, नई प्रणालियों के मूल्यांकन और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास के लिए एक समर्पित समुद्री मंच उपलब्ध होगा।
नए हथियारों और सेंसर के परीक्षण में मिलेगी मदद
‘समर्थक’ को बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य देश में विकसित हथियार प्रणालियों, आधुनिक सेंसर और मानवरहित उपकरणों का समुद्र में परीक्षण करना है। किसी भी नई रक्षा प्रणाली को नौसेना में नियमित रूप से इस्तेमाल करने से पहले विभिन्न परिस्थितियों में उसकी क्षमता और विश्वसनीयता का आकलन करना आवश्यक होता है। ऐसे में यह पोत परीक्षण और मूल्यांकन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। समुद्र में मौसम, लहरों और अन्य परिचालन परिस्थितियों के कारण रक्षा उपकरणों का प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है। ‘समर्थक’ के माध्यम से स्वदेशी उद्योग द्वारा विकसित प्रणालियों को वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में परखने का अवसर मिलेगा। इससे तकनीकी खामियों की पहचान करने और उपकरणों को नौसेना की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
यह पोत नई तकनीकों के परीक्षण के साथ प्रशिक्षण संबंधी गतिविधियों में भी उपयोगी होगा। इससे भारतीय कंपनियों और रक्षा अनुसंधान से जुड़े संस्थानों को अपनी विकसित प्रणालियों का मूल्यांकन करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच मिल सकता है।
समुद्री निगरानी और आपदा राहत में भी सक्षम
‘समर्थक’ को विभिन्न प्रकार के समुद्री कार्यों को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। नौसेना के अनुसार, इसकी क्षमताओं में समुद्री निगरानी, टोह लेना, तटीय क्षेत्रों से दूर समुद्र में गश्त करना तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भाग लेना शामिल है। बहुउद्देशीय क्षमता के कारण यह पोत अलग-अलग परिचालन जरूरतों के अनुसार काम कर सकेगा। समुद्री सुरक्षा से जुड़े अभियानों के अलावा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता पहुंचाने में भी इसकी भूमिका हो सकती है। इस तरह पोत का उपयोग केवल तकनीकी परीक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आवश्यकता के अनुसार अन्य समुद्री गतिविधियों में भी किया जा सकेगा।
‘समर्थक’ नाम का अर्थ किसी कार्य को आगे बढ़ाने या समर्थन देने वाले से जुड़ा है। इसकी भूमिका भी इसी उद्देश्य के अनुरूप रखी गई है, ताकि भारतीय नौसेना को स्वदेशी तकनीकों के विकास और इस्तेमाल के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में सहायता मिल सके।
स्वदेशी उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
इस पोत का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो के पोत निर्माण केंद्र में किया गया है। परियोजना की खास विशेषता इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल है। घरेलू सामग्री की अधिक हिस्सेदारी से भारतीय रक्षा उद्योग और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका मजबूत करने में मदद मिलती है। पोत के निर्माण में आधुनिक तकनीकों और मॉड्यूलर निर्माण पद्धति का इस्तेमाल किया गया। इस प्रक्रिया में पोत के विभिन्न हिस्सों को अलग-अलग तैयार करके बाद में जोड़ा जाता है। उपकरणों की पूर्व-स्थापना जैसी तकनीकों से निर्माण प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और समय के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।
इस परियोजना से पोत निर्माण, इंजीनियरिंग, उपकरण निर्माण और संबंधित सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की संभावना है। इसके माध्यम से देश में तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने और निजी उद्योग की भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिलता है।
समारोह में वरिष्ठ नौसैनिक और रक्षा अधिकारी रहे मौजूद
‘समर्थक’ को नौसेना में शामिल किए जाने के अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन सहित वरिष्ठ नौसैनिक और रक्षा अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, लार्सन एंड टुब्रो तथा स्वदेशी उपकरणों से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। भारत में रक्षा उपकरणों के स्वदेशी विकास और निर्माण पर बढ़ते जोर के बीच ‘समर्थक’ का शामिल होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह परियोजना नौसेना और निजी पोत निर्माण उद्योग के बीच सहयोग का उदाहरण है। आने वाले समय में इस तरह के प्लेटफॉर्म स्वदेशी हथियारों, सेंसर और मानवरहित प्रणालियों के परीक्षण में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
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