ऊर्जा निगम ने पुलिस के साथ शुरू किया उत्तराखंड में अभियान, मुख्यमंत्री धामी ने बिजली चोरी रोकने के दिए निर्देश

खबर सार :-

उत्तराखंड में बिजली नुकसान की अब भरपाई शुरू कर दी गई है। कुमाऊं में 250 से अधिक चोरी के मामले दर्ज कर संकेत दिया गया है कि सरकार किसी को बख्शने वाली नही है। ऊर्जा निगम ने पुलिस के साथ अभियान भी शुरू कर दिया है। इसके लिए मुख्यमंत्री धामी ने बिजली चोरी रोकने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड में बिजली से नुकसान पर सख्ती, कुमाऊं में 250 से अधिक चोरी के मामले दर्ज

खबर विस्तार : -

देहरादून, उत्तराखंड में बडे पैमाने पर बिजली की चोरी हो रही थी। इससे विभाग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा था। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यह जानकारी दी कि बिजली की चोरी करने में रसूखदार बड़े पदों पर बैठे हुए लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बिजली चोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मंडल में पुलिस की मदद से अभियान चलाया जा रहा है।

अब तक बिजली चोरी रोकने में 250 से अधिक मामले दर्ज किया जा चुके हैं। उत्तराखंड के ऊर्जा निगम नियत कार्रवाई शुरू की है। बिजली चोरी और वितरण के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। पिछले कई महीनो बिजली चोरी के कारण विभाग को काफी नुकसान हो रहा था। ज्यादातर मैदानी क्षेत्र के मामले हैं। 

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वितरण व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया के लिए प्रयास तेज हुए

अधिकारियों और कर्मचारियों ने जब दौड़ लाना शुरू किया तो लगातार कई घरों में और कारखाने में चोरी पकड़ी गई। राज्य के कुछ मैदानी क्षेत्रों में वितरण के दौरान नुकसान को लेकर अभियान चलाया गया है। इस नुकसान में बिजली चोरी बिलों का भुगतान नहीं होना आदि शामिल था। लोग बिजली चोरी कर रहे थे और मीटर का भुगतान भी नहीं कर रहे थे। यहां तक की मीटर चार्ज का पैसा भी जमा करने में उन्हें दिक्कत हो रही थी। तकनीकी कमी से भी बिजली चोरी का अनुमान नहीं लग पा रहा था।

बकाया वसूली के साथ ही अब बिजली चोरी रोकने के प्रबंध भी किये जा रहे हैं। इससे अब निगम को काफी फायदा होने की उम्मीद है। वितरण व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया के लिए भी कार्यों में बदलाव किया गया है। अब 3 वर्षों में वितरण में उतार चढ़ाव देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पिछले दो महीना में कुछ नियंत्रण पाया गया है। आंकड़ों के मुताबिक ऊर्जा निगम के कुल वितरण नुकसान भी दिया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ऊर्जा निगम का कुल वितरण नुकसान वित्तीय वर्ष 2021-22 में 14.70 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 16.39 प्रतिशत हो गया। 

दोहरे मीटर भी लगाकर निकाल रहे हैं समाधान

वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह घटकर 15.63 प्रतिशत रहा। इससे पता चलता है कि विद्युत चोरी किस स्तर पर की जा रही है। इसका भी अब तकनीकी संसाधनों के जरिए पता लगाया जा रहा है। ट्रांसफार्मर स्तर पर बिजली की खपत और आपूर्ति का मिलान किया जा रहा है। इसलिए पता चल जाता है कि किस क्षेत्र में बिजली चोरी ज्यादा हो रही है। साथ ही दोहरे मीटर भी लगाए जा रहे है।

इससे यह पता लगाना आसान हो जाएगा कि किस क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति और बिल की गई। खपत के बीच कितना अंतर आ रहा है। यूपीपीसीएल की कुमायूं क्षेत्र के मुख्य अभियंता शेखर त्रिपाठी के अनुसार क्षेत्र में अभी अभियान चलाते रहेंगे, क्योंकि रामनगर, हल्द्वानी, काशीपुर, पुलिस बल की मदद से यहां 250 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यानी बड़े पैमाने पर बिजली की चोरी की जा रही थी।

मुख्यमंत्री तक को है बिजली चोरी की जानकारी

 मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी हुई की जितनी बिजली चोरी में जा रही है, वह अगर मिल जाए तो विकास कार्यों में उसे खपाया जा सकता है। इससे बिजली की संबंधित दिक्कतंे भी दूर हो जाएंगी। अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उत्तराखंड  आंकड़ों के अनुसार, गदरपुर में 30.58 प्रतिशत, जसपुर में 27 प्रतिशत, खटीमा में 53 प्रतिशत, लक्सर में 27 प्रतिशत, लंढौरा में 69.40 प्रतिशत, मंगलौर में 47.62 प्रतिशत और सितारगंज में 27.25 प्रतिशत वितरण हानि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि आर्थिक नुकसान सरकार और आम उपभोक्ता दोनों पर प्रभावित करता है। इस नुकसान से हमें बचाना बचाना है। उधर निगम के बिजली चोरी के पहचान करने के लिए तकनीकी उपाय भी शुरू कर दिए हैं।

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