ज्ञानेश कुमार और वोट चोरी तो है बहाना, अराजकता कर तख्तापलट का इरादा

खबर सार :-

लोकतंत्र अपनाओ-अराजकता हटाओ का नारा लगाकर विपक्षी दलों को चेता दिया गया है। सड़कों पर सरकार और निर्वाचन आयोग के समर्थन में लोग जुटने लगे हैं। संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर प्रहार एवं देश में अराजकता फैलाने के प्रयासों के विरोध में अभाविप का प्रदर्शन गोरखपुर की सड़कों पर किया गया।
जेनजी के बल पर सत्ता परिवर्तन की इच्छा छोड़ दें, जनता का मूड समझिए

खबर विस्तार : -

गोरखपुर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), गोरक्ष प्रांत द्वारा शुक्रवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में देशविरोधी मुहिम को ललकार मिल गई। लोकतंत्र अपनाओ-अराजकता हटाओ के नारे लगाते हुए बडी संख्या में युवक सड़कों पर आ गए। इन लागों ने चुनाव आयोग के कार्यों में बाधा बन रहे नेता और समाज सेवकों को चुनौती दी है। इनके साथ व्यापक प्रदर्शन किया गया। दीक्षा भवन से सैकड़ों कार्यकर्ताओं की सहभागिता हुई और कतारों में युवक प्रदर्शन यात्रा के लिए निकल पड़ें।

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मुख्य द्वार से होते हुए छात्रसंघ चौराहे पर यात्रा संपन्न 

कला संकाय एवं विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से होते हुए छात्रसंघ चौराहे पर यात्रा संपन्न हुई। यहां पर वक्ताओं ने अपनी बात भी रखी। कहा कि राजनीति ओर देश संविधन के बल पर चलेगा। दादागीरी, गुंडागर्दी और डराने से सत्ता नहीं बदल जाती है। यहां जेनजी का प्रयोग नहीं चल पाएगा। यहां संस्कारों जीने वालों की संख्या आपके मंसूबे से कई गुना ज्यादा है। सड़कों पर मुख्य निर्वाचन आयोग और सरकार के समर्थक उतर आए तो आपका प्रदर्शन हवा हो जाएगा।

यही दिखाने के लिए प्रदर्शन के माध्यम से अभाविप ने देश की संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं, विशेषकर निर्वाचन आयोग और न्यायालय की गरिमा को धूमिल करने पर आपके आंदालन का विराध शुरू कर दिया। उनकी कार्यप्रणाली पर निराधार प्रश्नचिह्न खड़े करने तथा उनके प्रति जनमानस में अविश्वास उत्पन्न करने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। गोरखपुर के युवाओं ने कहा आप इवीएम और बैलेटपेपर की मांग कर सकते हैं। इसके लिए देश की जनता के सामने की सड़क चौराहे बंद नहीं कर सकते हैं।

लोकतंत्र के चुनाव में जीत और हार लगा रहता

अभाविप ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए हिंसा एवं अराजकता का सहारा लेना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। हम अगर यही करने लगे तो देश का मान घट जाएगा। अभाविप कार्यकर्ताओं ने कहा कि भारत का निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जो संवैधानिक प्रावधानों एवं निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप देश में निष्पक्ष निर्वाचन संपन्न कराने के लिए उत्तरदायी है।

संविधा ने उनको मान्यता दी है। निर्वाचन प्रक्रिया अथवा चुनावी सुधारों से संबंधित किसी भी प्रकार की आपत्ति के समाधान के लिए संविधान एवं कानून के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाएं और वैधानिक मंच उपलब्ध हैं। अदालत को चाहिए कि इस पर गाइडलाइ जारी करें। जरूरत पडे तो यह लोग विश्वास के लिए करा सकते हैं।

नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) जैसी प्रक्रिया के दौरान यदि किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाता है, तो नियमानुसार दावा प्रस्तुत करने एवं नाम जुड़वाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया उपलब्ध है। मुख्य निर्वचना आयुक्त कह चुके हें कि जिसके नाम कटे हैं, वह अपने नाम जुड़वा ले। लोकतंत्र में जीत और हर लगा रहता है। किसी के हाथ जीत आती है तो किसी के हाथ हर आती है। इसका मतलब यह नहीं की संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं को कुचल दिया जाए।

संविधान के अंतर्गत जो प्रक्रिया है वह यही है। देश में कोइ न कोई कहीं भी किसी प्रकार से कब्जेदार बनकर बैठ जाता है। चुनावी सुधारों की प्रक्रियाओं को गलत स्वस्थ और तत्परक चर्चा लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। इसलिए सोचना चाहिए कि जो सुधार की प्रक्रिया है, उनको निर्वाचन आयुक्त तक पहुंचाएं।

कम से कम इतना काम तो करना ही होगा। तभी राजनीतिक सहभागिता के नाम पर हिंसा व्यवस्था और अराजकता जैसी अनावश्यक बातें नहीं होगी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कहा कि भारत जैसी सशक्त लोकतंत्र में किसी भी विषय पर विरोध दर्ज करने के लिए संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध है।

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