हिंसक संघर्ष करके तख्ता पलट करने का इरादा आज सामने आया :सुधांशु त्रिवेदी

खबर सार :-

नई दिल्ली: पिछले महीना दिल्ली के जंतर मंतर में हुए कॉकरोच पार्टी के धरना प्रदर्शन के दौरान दिल्ली को अशांत करने की कोशिश की गई थी। उसके बाद संसद नहीं चलने दिया गया। मुद्दा एक ही था, परीक्षा में धांधली और उसके लिए कार्रवाई चल रही थी। सरकार ने सबकी बात मान ली थी। इसके बाद भी संसद को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। वह भी अनिश्चितकाल के लिए। एक बार अब उनके मुंह से अंदर की बात सामने आ गई।
रिजीम चेंज शब्द षड्यंत्र का प्रतीक, कांग्रेस इंडी गठबंधन को जन समर्थन नहीं: सुधांशु त्रिवेदी

खबर विस्तार : -

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी कहते हैं कि इंडिया गठबंधन और वामपंथी दलों का की मंशा अब जग जाहिर हो गई है। दिल्ली के जंतर मंतर में प्रदर्शन के दौरान उनकी इरादा क्या थे? आज खुलकर सामने आ गए हैं। उनके कनॉट प्लेस में हुए कथित आंदोलन को फ्लाफ बताते हुए इस विदेशी साजिश और रिजीम चेंज की राजनीति बताया है। सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा है कि कांग्रेस इंडिया गठ बंधन के दलों और विलुप्त होते वामपंथी दलों के निरंतर समाप्त होते जन समर्थन का प्रयास आज सामने रहा है।

राजनीतिक दृष्टि में सफलता कहीं नहीं 

इनके निरंतर नैतिक पतन से जब उन्हें राजनीतिक दृष्टि में सफलता कहीं नहीं दिखाई पड़ी, तब हिंसक संघर्ष और षड्यंत्र के बल पर विदेशी शक्तियों के सहारे उनसे हाथ मिलाकर भारत में तख्ता पलट करने के लिए रिजीम चेंज जैसे शब्दों का प्रयोग करना पडा। भारत की राजनीति में दिखाई पड़ रहा है। सुधांशु त्रिवेदी ने इसके व्याकरण की निहित भी बताए हैं। उन्होंने कहा कि इनकी कोशिश है कि रिजीम चेंज मतलब सत्ता परिवर्तन लेकिन इसका मेन उद्देश्य क्या है? उन्होंने बताया कि यह समाधान का प्रयास न करिए यह तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया है मैं। कहता हूं कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है और ऐसा आप चाहते भी नहीं र्है।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि गवर्नमेंट चेंज और रिज्यूम चेंज में बहुत अंतर है। इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि हम लोकतांत्रिक प्रक्रिया स्थापित करना चाहते हैं और इसमें चुनाव के द्वारा सरकार बनती है। इसी प्रक्रिया के तहत सरकार बदलती है, लेकिन जो रिजीम चेंज शब्द होता है, वह षड्यंत्र हिंसक संघर्ष के द्वारा सत्ता पलट करने का प्रयास होता है। बहुत गंभीर बात यह है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुनी गई सरकार जिसको देश की जनता चुनती है, उसको तख्तापलट करके यानि संघर्ष करके हटाने का षड्यंत्र कर रहे हैं। वह इस देश के लोग विदेशी ताकतों के सरपरस्त बने हुए हैं।

इनर सर्कल को राजीव चौक कहते हैं

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस सिंडिकेट बंधन बाम पंथी और कुछ अन्य संगठनों द्वारा कनॉट प्लेस में जो तथाकथित विराट आंदोलन की घोषणा की गई थी वह तो चंद्र मुट्ठी भर लोगों में ही सिमट गई। राजनीतिक दृष्टि में सफलता कहीं नहीं दिखाई पड़ी हैं। और इनर सर्कल को राजीव चौक कहते हैं जो निश्चित रूप से स्वर्गीय इंदिरा और स्वर्गीय राजीव वहां से बैठकर उनका सिर शर्म से झुक गया होगा। आज क्या स्थिति हो गई? उन्होंने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं की एकत्र होकर कुछ ऐसा किया जाए जो सत्ता हाथ में आ जाए, भाजपा सांसद ने युवाओं से अपील करते हुए कहा है कि देश के युवाओं को बरगलाने की कोशिश की जा रही है।

उनको गलत रास्ते पर ले जाने के लिए लालच दिए जा रहे हैं। यह लोग देश के किशोर और नौजवानों को उनकी दिशा से भड़काना चाहते हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वह समझदारी से काम लें। सभी युवाओं से चाहे वह आंदोलन में शामिल हो या बाहर से देख रहे हा, बस मैं यही कहना चाहता हूं कि किसी और के खेल में मोहरा ना बनो। आज जो सुधांशु त्रिवेदी मोहरा की बात कर रहे, उसमें तो यह स्पष्ट है कि जो आंदोलन अकेले दम पर नहीं चलाया जा रहा था। आज उसमें पूरे देश के नेता एकजुट हुए हैंं हाल ही में हाल ही में इसी नेट से कई दलों के लोग कटे कटे नजर आ रहे थे। आज रिज्यूम चेंज जैसे शब्द का भी उद्बोधन यहां पर किया गया हैं।

चार महीने के भीतर पूरा ध्यान उस तरफ चला गया

इसके इस्तेमाल पर सुधांशु कहते हैं की चार महीने के भीतर ही पूरा ध्यान उसे तरफ चला गया। उन्होंने याद दिलाया कहा की परीक्षा सुधार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि एक उदाहरण देखिए की परीक्षा सुधार जैसे मुद्दे पर जो सच में सभी के दिल के करीब था आपकी भावनाओं का फायदा उठाया गया और 4 महीने के भीतर ही पूरा ध्यान उसे तरफ चला गया जो मेरे हिसाब से उनका असली मकसद था।

यानी की यह जो परीक्षा नीट परीक्षा का मामला था और हिंसक झड़प हुई थी। उसी समय भी रिज्यूम चेंज की भावना को लेकर जानबूझकर किया गया उपद्र था। सुधांशु कहते हैं की कनॉट प्लेस में भीड़ को लेकर सवाल उठाए गए। वहां इनर साइकिल में अपना प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे। जबकि यहां फ्राइडे के दिन दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं। शुक्रवार की शाम उनका वीकेंड कनॉट प्लेस में स्वाभाविक रूप से भीड़ रहती है। 

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