गुजरात के हर जिले और शहर में अब एंटी-नारकोटिक्स विंग, 7 दिन में शुरू होगा काम

खबर सार :-

गुजरात के हर जिले और शहर में एंटी-नारकोटिक्स विंग बनेगी। 7 दिन में यूनिट काम शुरू करेंगी और ड्रग नेटवर्क, पेडलर्स व हॉटस्पॉट पर कार्रवाई करेंगी।
गुजरात: एक्शन में एंटी-नारकोटिक्स विंग, 7 दिन में शुरू होगा काम

खबर विस्तार : -

अहमदाबादः गुजरात को नशा-मुक्त बनाने की दिशा में राज्य पुलिस ने ड्रग नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात पुलिस ने अब राज्य के हर जिले और शहर में विशेष एंटी-नारकोटिक्स विंग (ANW) गठित करने का निर्णय लिया है। इन यूनिट्स को अगले सात दिनों के भीतर काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

गुजरात पुलिस की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ड्रग्स के खिलाफ अभियान को अधिक प्रभावी और संगठित बनाने के लिए राज्य पुलिस प्रमुख ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने राज्य स्तर पर काम कर रही एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की तर्ज पर जिला और पुलिस कमिश्नरेट स्तर पर एएनडब्ल्यू यूनिट बनाने के निर्देश दिए हैं।

केवल नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों पर फोकस

अभी तक जिले और शहरों में एलसीबी, एसओजी और स्थानीय पुलिस की टीमें नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में कार्रवाई करती रही हैं। अब इन टीमों के साथ विशेष एंटी-नारकोटिक्स विंग भी ड्रग्स से जुड़े अपराधों पर कार्रवाई करेगी। एएनडब्ल्यू को एक स्पेशलाइज्ड टास्क फोर्स के तौर पर काम करना होगा। इन यूनिट्स को एनडीपीएस से जुड़े अपराधों के अलावा कोई अन्य जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इससे पुलिस की विशेष टीम लगातार ड्रग तस्करी, बिक्री और नेटवर्क से जुड़े मामलों पर ध्यान केंद्रित कर सकेगी।

पिछले पांच वर्षों में गुजरात पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 3,700 से अधिक मामले दर्ज किए हैं और 5,346 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान करीब 13,600 करोड़ रुपये मूल्य के 1.36 लाख किलोग्राम से अधिक नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। पुलिस के अनुसार, इन कार्रवाइयों से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क पर भी असर पड़ा है।

हर यूनिट में 8 पुलिसकर्मी होंगे

हर एंटी-नारकोटिक्स विंग में आठ अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए जाएंगे। टीम में एक पुलिस इंस्पेक्टर, एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर, दो एएसआई या हेड कॉन्स्टेबल और चार पुलिस कॉन्स्टेबल शामिल होंगे। प्रत्येक यूनिट के लिए अलग वाहन और ड्राइवर की व्यवस्था भी की जाएगी। जिला स्तर पर एएनडब्ल्यू यूनिट पुलिस अधीक्षक की सीधी निगरानी में काम करेगी। वहीं अहमदाबाद शहर में दो, सूरत शहर में दो, वडोदरा शहर में एक और राजकोट शहर में एक यूनिट बनाई जाएगी। ये यूनिट संबंधित ज्वाइंट या एडिशनल पुलिस कमिश्नर की निगरानी में काम करेंगी।

ड्रग पेडलर्स और हॉटस्पॉट पर रहेगी नजर

एएनडब्ल्यू को एएनटीएफ की ओर से चिन्हित किए गए ड्रग पेडलर्स और हॉटस्पॉट्स पर लगातार नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा नशीले पदार्थों के आदी अपराधियों के खिलाफ पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत एहतियाती कार्रवाई के लिए सीआईडी क्राइम को प्रस्ताव भेजने का काम भी यह यूनिट करेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य ड्रग नेटवर्क की पहचान से लेकर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तक पुलिस की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क और ड्रग हॉटस्पॉट की जानकारी जुटाकर उन पर लगातार निगरानी रखने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

गुजरात में ड्रग रिवॉर्ड और आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन नीति

गुजरात पुलिस के अनुसार, राज्य ने ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई में पुलिसकर्मियों और मुखबिरों को प्रोत्साहित करने के लिए ड्रग रिवॉर्ड पॉलिसी लागू की है। इसके साथ ही नशे के खिलाफ अभियान में अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के लिए आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन की नीति भी लागू की गई है। पुलिस के मुताबिक, गुजरात देश का पहला राज्य है जिसने इस तरह की प्रोत्साहन व्यवस्था लागू की है। इसका उद्देश्य ड्रग तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों और सूचना देने वाले मुखबिरों को प्रोत्साहित करना है।

डार्क वेब और फाइनेंशियल ट्रेल पर भी नजर

ड्रग नेटवर्क के बदलते तरीकों को देखते हुए गुजरात पुलिस तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है। पुलिस के अनुसार, डार्क वेब गतिविधियों, फाइनेंशियल ट्रेल्स और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। इसके साथ ही अदालतों में मामलों की सजा दर यानी कन्विक्शन रेट बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि नई एएनडब्ल्यू व्यवस्था से राज्य में ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को जमीनी स्तर पर और मजबूत किया जा सकेगा।

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