बिहार में बाढ़ का कहर: सीएम सम्राट चौधरी ने प्रभावित इलाकों का किया दौरा, अधिकारियों को दिए राहत के निर्देश

खबर सार :-

बिहार में बाढ़ के बीच सीएम सम्राट चौधरी ने भागलपुर और नवगछिया का दौरा किया। अधिकारियों को राहत-बचाव में तेजी और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बिहार बाढ़ः सीएम सम्राट चौधरी ने दिए अधिकारियों को सख्त निर्देश

खबर विस्तार : -

पटना: बिहार में लगातार बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को भागलपुर और नवगछिया के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ पीड़ितों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने प्रशासन को राहत कार्यों में तेजी लाने के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपने दौरे की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भागलपुर एवं नवगछिया क्षेत्र का सर्वेक्षण कर बाढ़ की स्थिति का आकलन किया गया। इस दौरान प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा भी की गई।

‘राहत और बचाव कार्यों में कमी न रहे’

सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक इंतजाम और एहतियाती कदम समय पर सुनिश्चित किए जाएं। राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने प्रशासन को आम लोगों की सुरक्षा के लिए पूरी तत्परता से काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

डिप्टी सीएम ने कंट्रोल कमांड सेंटर से की निगरानी

इधर, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने सिंचाई भवन स्थित कंट्रोल कमांड सेंटर पहुंचकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के विभिन्न संवेदनशील स्थलों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बाढ़ की मौजूदा स्थिति, तटबंधों की निगरानी और राहत कार्यों की जानकारी हासिल की।

डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को तटबंधों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों को संवेदनशील माना गया है, वहां पूरी सतर्कता के साथ काम किया जाए। किसी भी तरह की आपात स्थिति सामने आने पर समय पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी स्थिति में प्रत्येक संवेदनशील स्थल पर सतर्कता और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। प्रशासनिक अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

कटिहार के मनिहारी में करीब 10 हजार लोग प्रभावित

दूसरी ओर, कटिहार के मनिहारी क्षेत्र में भी बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। अमदाबाद ब्लॉक में कई गांव और स्कूल जलमग्न हो गए हैं। एसडीएम त्रिलोकी नाथ सिंह के मुताबिक, बाढ़ से करीब   10,000 लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण सड़क संपर्क प्रभावित होने के चलते कई इलाकों में नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। स्थानीय प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन प्रभावित लोगों की परेशानियां कम होती नजर नहीं आ रही हैं।

प्रभावित लोगों ने बताई परेशानी

बाढ़ प्रभावित कुछ लोगों ने प्रशासन की ओर से राहत सामग्री नहीं मिलने की शिकायत की। उनका कहना है कि मौजूदा समय में वे अपनी जमा पूंजी से किसी तरह परिवार का गुजारा कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित श्रीकांत ने बताया कि लोगों को रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है और खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है। वहीं, एक अन्य युवक ने बताया कि घर में पानी भर जाने के कारण चूल्हा तक नहीं जल पा रहा है। उसके मुताबिक, परिवार को खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में काफी परेशानी हो रही है। उसने आरोप लगाया कि अभी तक सरकार की ओर से उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिल रही है।

नाव बनी आवागमन का सहारा

बाढ़ के कारण कई गांवों में लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाव से आने-जाने के लिए भी करीब   20 रुपये   खर्च करने पड़ रहे हैं, जो बाढ़ की मार झेल रहे परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन गया है। बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन के सामने राहत और बचाव अभियान को प्रभावी तरीके से चलाने की चुनौती बनी हुई है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री, सुरक्षित आवास, भोजन और आवागमन की सुविधाएं पहुंचाने पर प्रशासन का फोकस है। वहीं, स्थानीय लोगों की शिकायतों के बीच सरकार के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि राहत योजनाओं का लाभ वास्तव में बाढ़ प्रभावित परिवारों तक समय पर पहुंचे।

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