झांसी रेलवे वर्कशॉप ने तैयार किया नया डस्टबिन, 20 गुना ज्यादा कचरा समेटने का दावा

खबर सार :-

झांसी रेलवे वर्कशॉप ने नया डस्टबिन डिजाइन तैयार किया है, जिसमें पुराने डस्टबिन से 20 गुना ज्यादा कचरा समेटने का दावा है। RDSO की मंजूरी का इंतजार है।
कोच से सीधे अंडरगियर पहुंचेगा कचरा: झांसी वर्कशॉप का नया डस्टबिन डिजाइन बढ़ाएगा रेल स्वच्छता

खबर विस्तार : -

झांसी: झांसी रेलवे वर्कशॉप ने रेलवे कोचों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक नई पहल की है। वर्कशॉप की ओर से एक नए डिजाइन का डस्टबिन तैयार किया गया है, जिसमें मौजूदा डस्टबिन की तुलना में करीब 20 गुना अधिक कचरा समेटने की क्षमता होने का दावा किया गया है। इस नए डिजाइन को रेलवे कोचों में लगाने से लंबी दूरी की ट्रेनों में बार-बार डस्टबिन खाली करने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।

नए डस्टबिन की सबसे खास बात इसका डिजाइन बताया जा रहा है। इसमें यात्रियों द्वारा डाला जाने वाला कचरा डस्टबिन में जमा होने के बजाय सीधे कोच के अंडरगियर तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इससे डस्टबिन के जल्दी भर जाने और कचरे के कोच में फैलने की समस्या को कम किया जा सकेगा। झांसी वर्कशॉप ने इस नए डस्टबिन का डिजाइन रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) को भेज दिया है। आरडीएसओ रेलवे की तकनीकी अनुसंधान, परीक्षण और मानक तय करने वाली प्रमुख संस्था है, जिसका मुख्यालय लखनऊ में है। डिजाइन को आरडीएसओ की मंजूरी मिलने के बाद इसे रेलवे के एलएचबी कोचों में लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

मंजूरी के बाद देशभर के एलएचबी कोच में लगने की उम्मीद

रेलवे में किसी भी नए उपकरण, तकनीक या डिजाइन को सीधे देशभर की ट्रेनों में लागू नहीं किया जाता। पहले संबंधित तकनीक की तकनीकी जांच, परीक्षण और मानकीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाती है। आरडीएसओ इसी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि नए डस्टबिन के डिजाइन को आरडीएसओ से मंजूरी मिल जाती है तो इसे देशभर में संचालित एलएचबी कोचों में लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे रेलवे कोचों में कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मौजूदा डस्टबिन की क्षमता सीमित

वर्तमान में एलएचबी कोचों में केबिन स्तर पर आम तौर पर दो डस्टबिन उपलब्ध होते हैं। इन दोनों की कुल क्षमता करीब 15 से 20 लीटर तक बताई जाती है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों की संख्या अधिक होने और यात्रा कई घंटे तक चलने के कारण ये डस्टबिन जल्दी भर जाते हैं। डस्टबिन भरने के बाद कचरा कोच में फैलने लगता है, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है और कोच की साफ-सफाई भी प्रभावित होती है। इसके अलावा, रेलवे कर्मचारियों को यात्रा के दौरान डस्टबिन को बार-बार खाली करना पड़ता है। लंबी दूरी की ट्रेनों में यह प्रक्रिया अतिरिक्त श्रम और समय की मांग करती है।

नए डिजाइन वाले डस्टबिन में कचरे को सीधे अंडरगियर तक पहुंचाने की व्यवस्था होने के कारण इस समस्या में कमी आने की उम्मीद है। इससे डस्टबिन के भीतर कचरा जमा होने की अवधि बढ़ेगी और यात्रियों के इस्तेमाल वाले हिस्से में कचरा फैलने की संभावना कम होगी।

यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता पर जोर

झांसी रेलवे वर्कशॉप पहले भी कई तकनीकी और उपयोगी पहल के लिए पहचान बना चुका है। इसी क्रम में तैयार किए गए इस नए डस्टबिन को यात्रियों की सुविधा और रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने कहा कि झांसी वर्कशॉप की यह पहल यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।

अब इस डिजाइन पर आरडीएसओ की तकनीकी मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद इसके व्यापक स्तर पर इस्तेमाल का रास्ता खुल सकता है। यदि योजना सफल रहती है तो लंबी दूरी की ट्रेनों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और कोचों को अधिक समय तक साफ-सुथरा रखने में रेलवे को मदद मिल सकती है।

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