अस्पतालों को सीधे इलाज का पैसा, उत्तर प्रदेश में 5.99 करोड़ आयुष्मान कार्ड

खबर सार :-

सरकारी आंकड़ा कह रहा है कि आयुष्मान कार्ड योजना पर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। यहां अब तक 97.75 लाख से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है।
up :97.75 लाख मरीजों को मुफ्त इलाज मिला, अभी और बढ़ेगा दायरा

खबर विस्तार : -

लखनऊ, आयुष्मान भारत योजना के जरिए उत्तर प्रदेश में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दायरे में काफी बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदेश में जो लोग पात्र हैं, उनको पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। यहां अब तक 97.75 लाख से अधिक मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है। 
पुराने आंकड़े बदल रहे हैं। इस बार भी नई जानकारी में प्रदेश में अब तक रिकॉर्ड 5 करोड़ 99 लाख आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। इस योजना से 6,497 सरकारी और निजी अस्पताल जुड़े हुए हैं। सरकारी आंकड़ा कह रहा है कि योजना पर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।

मरीज सीधे इलाज के हकदार बने

 आयुष्मान भारत (साचीज) के स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. मनोज श्रीवास्तव से जानकारी मिली है कि आयुष्मान योजना के तहत अब तक प्रदेश के 97.75 लाख से अधिक मरीज लाभ ले चुके हैं। सरकारी योजना होने के कारण यह बेहद पारदर्शी है। सरकार की ओर से इस योजना के तहत 16 हजार 214 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की है। जिन मरीजों को योजना का लाभ दिया गया है, वह सीधे इलाज के हकदार बने। इनकी बीमारी के आधार पर इलाज के खर्च का पैसा सीधे अस्पतालों को भेजा गया। बड़ी संख्या में मरीजों का निःशुल्क और वह भी सफल उपचार किया जा चुका है। इलाज कराने वाले मरीजों में अधिकांश रोगी हृदय, किडनी और न्यूरो जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित रहे। 

अधिवक्ता और रसोइया को भी फायदा

इस योजना में अभी भी लोगों को जोड़ा जा रहा है। हर क्षेत्र के कर्मचारियों को इस योजना से जोड़ा गया है। शिक्षक, पीआरडी जवान, अधिवक्ता, रसोइयां और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के परिवार कैसलेश इलाज के हकदार हुए हैं। सरकार ने हाल में प्रांतीय रक्षक दल के 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को भी योजना में शामिन किया है। नई घोषणा में पंचायत सहायकों को भी शामिल करने की बात चल रही है। प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त कैशलेस इलाज का फायदा इनके परिवरों को देने की योजना है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री व सहायिकाओं और उनके परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कह चुकी है। साथ ही परिषदीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयों को भी कैशलेस चिकित्सा से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा ंमहाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का लाभ मिल रहा है। 

आशा बहुओं को योजना के लाभ की मांग

योजना के दूरगामी परिणाम बताते हुए संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री योगेश उपाध्याय ने मांग की है कि एनएचएम के 01 लाख स्वास्थ्य कर्मियों एवं 2.25 लाख आशा बहुओं को भी इस योजना में शामिल किया जाए। जो स्वास्थ्यकर्मी दूसरों का इलाज करते हैं, उन्हें भी स्वास्थ्य सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। योजना के तहत लाभ देने के लिहाज से प्रदेशभर में 78 लाख से अधिक लाभार्थियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराई गई है।

जिनको सरकारी योजना का लाभ मिल चुका है, उनकी एक लिस्ट पोर्टल पर लोड करना है। राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) के निदेशक महेन्द्र बहादुर सिंह ने जिलाधिकारियों और जिला नगरीय विकास अभिकरणों को ऐसे निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार ने 14 सितम्बर को अधिवक्तओं के लिए भी कैसलेस इलाज की सुविधा की घोषणा की है। यह योजना उन अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी जो अपने पेशे में संघर्ष कर रहे हैं। सरकारी योजना का लाभ देने के लिए पटरी दुकानदारों को भी जोड़ा जाएगा।

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