किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में नर्सिंग छात्रा की मौत के बाद छात्रों का प्रदर्शन, उपस्थिति और छुट्टी के नियमों पर उठे गंभीर सवाल

खबर सार :-

केजीएमयू में नर्सिंग छात्रा की मौत के बाद छात्रों ने अटेंडेंस के दबाव और मेडिकल लीव न मिलने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
केजीएमयू नर्सिंग छात्रा की मौत पर हंगामा, छात्रों के गंभीर आरोप

खबर विस्तार : -

Lucknow : उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के कैंपस में उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया जब 2025 बैच की नर्सिंग छात्रा दिव्यांशी यादव के निधन की खबर सामने आई। इस दुखद घटना के बाद हॉस्टल और विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बीमारी की स्थिति में भी मृत छात्रा को अवकाश नहीं दिया गया, जिसके चलते वह गंभीर बुखार और डेंगू से पीड़ित होने के बावजूद कॉलेज आने के लिए विवश रही।

उपस्थिति का दबाव और कक्षाओं की अनिवार्यता

छात्रों ने बताया कि पाठ्यक्रम के दौरान क्लिनिकल ड्यूटी और कक्षाओं में शत-प्रतिशत उपस्थिति को लेकर अत्यधिक सख्ती बरती जाती है। एक छात्रा ने जानकारी दी कि यदि कोई छात्र किसी भी परिस्थिति में अनुपस्थिति दर्ज कराता है, तो उसे अपनी डिग्री पूरी होने के चार साल बाद रुककर उसका हर्जाना या क्षतिपूर्ति करनी पड़ती है। इसी कड़े प्रावधान के भय से छात्र अस्वस्थ होने पर भी लगातार संस्थान पहुँचते हैं ताकि उनकी पढ़ाई में कोई विलंब न हो।

मौखिक धमकियां और परीक्षा की चेतावनी

एक अन्य साथी छात्रा ने साझा किया कि मृतका पर इलेक्टिव मॉड्यूल में शामिल होने का भारी दबाव था। उसे मौखिक रूप से यह चेतावनी दी गई थी कि यदि वह इस मॉड्यूल में उपस्थित नहीं रही तो उसकी छह महीने की बैक लग सकती है। इसी मौखिक दबाव के कारण तेज बुखार और शारीरिक कमजोरी होने के बावजूद वह निरंतर कक्षाएं ले रही थी और अपनी सेहत की उपेक्षा करने के लिए मजबूर हुई।

छुट्टियों के नियमों पर सवाल और हॉस्टल में खौफ

हॉस्टल में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों का कहना है कि पिछले दो दिनों से पूरे परिसर में डर और गुस्से का माहौल है। साथियों ने कॉलेज के अवकाश नियमों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि देश के अन्य शैक्षणिक संस्थानों और एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में भी चिकित्सीय अवकाश को मान्यता दी जाती है, परंतु केजीएमयू के इस विशिष्ट पाठ्यक्रम में मेडिकल लीव आसानी से स्वीकृत नहीं की जाती है।

छुट्टी का वह आखिरी संघर्ष

छात्रा के अंतिम दिनों के घटनाक्रम को याद करते हुए उसकी सहपाठियों ने बताया कि उसने 17 सितंबर की शाम को अवकाश के लिए आवेदन किया था और 20 सितंबर की वापसी की तिथि तय की थी क्योंकि 21 सितंबर को उनका इलेक्टिव सत्र अनिवार्य था। जाने से पहले उसने अपनी दुविधा व्यक्त करते हुए कहा था कि उसे हर हाल में सोमवार तक कॉलेज लौटना होगा अन्यथा उसकी अनुपस्थिति दर्ज कर ली जाएगी। जब उसकी तबियत अत्यधिक बिगड़ गई, तब वह अपने घर रवाना हुई, जहाँ घर पहुँचने के ठीक एक दिन बाद उसकी मृत्यु हो गई। अब प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने पूरी व्यवस्था में बदलाव लाने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग उठाई है।

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