बलरामपुर के होनहारों का हाल, 967 कुपोषित बच्चों को मिलेगा पौष्टिक लड्डू

खबर सार :-

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वर्चुअल माध्यम से एक खास पहल की शुरुआत की है। यह उन बच्चों से जुड़ी हुई है, जो कुपोषण का शिकार हुए हैं। इन बच्चों के बारे में पता करना चाहिए कि इनको आज से पहले खाने में क्या दाल, सब्जी और दूध नसीब हो पाता था।
बलरामपुर: दाल-सब्जी को तरए गए बच्चे, कुपोषित हुए तो पाएंगे मेवे के लड्डू

खबर विस्तार : -

बलरामपुर, कमजोर हुए या कुपोषित हुए बच्चों को में यह जानने की जरूरत है कि वह खाने में क्या पाते हैं? यह सभी जानते हैं कि बच्चे किसी योजना के सहारे पुष्ट नहीं हो पाएंगे। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में एक ऐसी खास योजना लाई गई है। जिसमें बच्चों के अंदर से कुपोषण दूर कर दिया जाएगा। बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए अधिरियों के कहने पर ‘बालभोग’ कार्यक्रम शुरू किया है।

योजना के बारे में समझना जरूरी है। दरअसल, शंकरगढ़ विकासखंड के 967 बच्चों को कुपोषित बच्चों की गिनती में शामिल किया गया था। यह योजना तत्काल तो नहीं बनी, क्योंकि कार्यक्रम बड़े स्तर पर किया गया। इसमें बताया गया कि इन बच्चों को रोजाना रागी, श्रीअन्न और सूखे मेवों से तैयार पौष्टिक लड्डू खिलाए जाएंगे। जिन बच्चों को दाल, सब्जी और दूध-दही नहीं नसीब होगा, वह कुपोषण के ही शिकार हो जाएंगे।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों की प्रगति का आकलन करेंगी

बुद्धिजीवी दबी जुबान सवाल कर रहे हैं कि यह लड्डू रास्ते में बदल तो नहीं जाएंगे? किन कारणों से कुपोषण तक बच्चों को घिर जाना पड़ता है? क्योंकि आर्थिक परिस्थितियां ही जब दयनीय बन जाती हैं, तब परिवार के बच्चों को पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इन बच्चों को लेकर बुधवार को ग्राम चिरई-जशवंतपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री लरंग साय की प्रतिमा अनावरण के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वर्चुअल माध्यम से इस पहल की शुरुआत की। सरकार कह रही है कि वह तीस ग्राम का लड्डू खिलाकर कुपोषण दूर करेगी। उनके स्वास्थ्य और पोषण स्तर पर नजर भी रखी जाएगी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

FAQ

1.  योजना का क्रियान्वयन किस तरह से होगा ? 

सरकार की ओर से बताया गया है कि प्रत्येक चिन्हित बच्चे को प्रतिदिन 30 ग्राम लड्डू दिया जाएगा। यह काम आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में होगा। लड्डू को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाज का इस्तेमाल कर बच्चों के आहार में पोषक तत्व बढ़ाने के लिए बनवाया जाएगा।

2.  पोषण की जानकारी देंगी आंगनबाड़ी महिलाएं  ?

सरकार का तो यही कहना है कि अभिभावकों को संतुलित भोजन, नियमित आहार तथा बच्चों की देखभाल के संबंध में जानकारी आंगनबाड़ी महिलाएं देंगी। महिला एवं बाल विकास विभाग और मैदानी अमले के सहयोग से कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। महिलाओं का कहना है कि बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ घर पर भी बेहतर पोषण मिल सके।

3.  कैसे आएगा इन बच्चों में बदलाव ?

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी की ओर से एक बयान जारी किया गया है। इनका कहना है कि जिले में हर बच्चे को स्वस्थ रखने के प्रयास होेंगे। सुपोषित बचपन उपलब्ध कराना प्रशासन का पहला प्रयास होगा। फिलहाल बालभोग अभी इनको देना शुरू किया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों का स्वास्थ्य सुधारा जाएगा। अतिरिक्त पोषण देकर बदलावों का आश्वासन दे रहे हैं। वह कहते हैं कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बच्चों को पूरक आहार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनके पोषण स्तर में सुधार लाकर उन्हें स्वस्थ विकास के अवसर देना है। बहरहाल, योजना ओर कुपोषित बच्चों व उनके परिवारों की स्थिति समय के साथ सामने आएगी।

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