अमेठी के अस्पतालों का हाल: अच्छी आंख कागज पर खराब प्रमाणित, शिकायत पर जेल भेज देने की धमकी

खबर सार :-

अमेठी में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है । इसमें दाहिनी आंख के स्थान पर प्रमाण पत्र में बाईं आंख को खराब लिख दिया है। अब इस कृत्य  से स्वास्थ्य विभाग पर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं।
अमेठी के स्वास्थ्य विभाग का कारनामा , प्रमाण पत्र में अच्छी आंख को खराब बताया

खबर विस्तार : -

लखनऊ, डाक्टर की गलती से किसी की जान नहीं जा सकती है? यह सवाल इसलिए है, क्योंकि एक कारनामा स्वास्थ्य विभाग का सामने आया है। इस कारण उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इसे पूरी तरह से जानकर आप हैरान रह जाएंगे। पिंडोरिया गांव निवासी रामऔतार की दाहिनी आंख से दिखाई नहीं देता।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से एक प्रमाण पत्र बनवाया है। इसे स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दिव्यांग प्रमाण पत्र में उनकी बाईं आंख को खराब दर्शाया गया है। 11 अप्रैल 2023 को प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी किया गया है। इस प्रमाण पत्र में दिव्यांगता का प्रतिशत भी महज 30 फीसदी दर्ज है। राम अवतार का कहना है कि उन्हें आंख से पूरी तरह से नहीं दिखता है। इससे वह सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहा हैं। वह योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।

बड़ी समस्या यह है कि जो आंख सही है, उसे दिव्यांग में दिखाया है। दरअसल, राम अवतार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। वह पढ़े लिखे भी नहीं हैं। इसलिए दौड़भाग करने में वह कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। जब राम अवतार को प्रमाण पत्र मिला, तब वह बहुत खुश हुए। जब इसके उपयोग की जरूरत हुई तो समस्याएं आकर खड़ी हो गईं और वह हैरान परेशान हो गए।  उन्हें जानकारी नहीं थी कि दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर पेंशन, बस यात्रा में रियायत समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

 दिव्यांग प्रमाण पत्र पर मिलता है योजनाओं का लाभ

करीब तीन साल बाद जब किसी ने उन्हें, इन सुविधाओं के बारे में बताया तो वह प्रमाण पत्र लेकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे। जब उन्होंने अपना प्रमाण पत्र अधिकारियों को दिखाया तो पूछताछ शुरू हुई। इसमें भेद खुला की जो आंख खराब है, वह कागज पर दर्ज नहीं है। अधिकारियों को कुछ आशंका महसूस होने लगी उन्होंने और पूछता शुरू कर दी तो राम अवतार डर गया। राम अवतार पहली बार ब्लॉक गए, वहां अधिकारियों से मिले और इस प्रमाण पत्र को दिखाया, उस दौरान ब्लॉक के अधिकारियों ने राम अवतार को दबाव में ले लिया और कहा यह प्रमाण पत्र फर्जी है।

बातचीत चली तो धमकी देने लगे। कहा कि तुम्हें जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी। इससे वह डर गए और अपना प्रमाण पत्र लिए खड़े रहे रहे। थोड़ी देर में मौका मिलते ही अपने घर वापस लौट आए। बाद में लोगों के कहने पर वह जिला के अधिकारियों के पास गए और उन्हें सर्टिफिकेट दिखाया। अधिकारियों ने सर्टिफिकेट देखकर हैरानी जताई और उसे सही बताया। जांच पड़ताल शुरू हुई तो राम अवतार की आंख का मिलन सर्टिफिकेट पर नहीं था। इसके बाद अधिकारियों ने बताया कि सरवर में त्रुटि आ गई थी, इसलिए कागज पर चढ़ते समय गलती हो गई। 

40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता का प्रमाण आवश्यक 

दरअसल अमेठी कहीं बाहर नहीं है। यहां भी नियमानुसार, दिव्यांगजन को 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता का प्रमाण पत्र आवश्यक होता है। लोगों के कहने पर वह बाद में जिला के अफसर के पास पहुंचे और वहां उनको न्याय मिल। अधिकारियों ने पूरी बात सनकर सर्टिफिकेट सही करवाया। पूरे मामले पर जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को बुलाकर जानकारी ली।

अब सवाल यह है कि ऑनलाइन जारी प्रमाण पत्र में हुई इस त्रुटि को ठीक कराकर रामऔतार को नियमानुसार दिव्यांगता का सही आंकलन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा या नहीं?सरकार अस्पतालों की हालत बहुत ही दयनीय है। जहां कहीं भी देखो, गड़बड़ियां ही मिल रही है। हालांकि कई नामचीन हो गए। इन प्रतिष्ठित अस्पतालों में बराबर देखरेख चलती रहती है। चिकित्सक भी बराबर पेशेंट को ध्यान देते रहते हैं। अब जाने क्यों आपरेशन में कई बार पेट के आपरेशन के समय ब्लेड तक छोड दिया। बाद में फिर आपरेशन के बाद निकाला गया।

दिव्यांग शब्द का शाब्दिक अर्थ “दिव्य अंग” है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2015 में श्मन की बात कार्यक्रम के दौरान विकलांगता डॉट कॉम पर उल्लेख करते हुए विकलांग शब्द की जगह दिव्यांग या दिव्यांगजन शब्द का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों के प्रति समाज के नकारात्मक या दया वाले दृष्टिकोण को बदलकर उन्हें सम्मान, आत्मसम्मान और सकारात्मक पहचान देना है।

ये भी पढ़ें: युवाओं में तेजी से पैर पसार रहा गठिया, बुंदेलखंड आयुर्वेद कॉलेज में लगेगा शिविर

अन्य प्रमुख खबरें