किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के न्यूरोसर्जरी विभाग ने पूरे किए 32 वर्ष, एलुमनाई मीट में जुटे देश भर के विशेषज्ञ

खबर सार :-

केजीएमयू लखनऊ के न्यूरोसर्जरी विभाग के 32वें स्थापना दिवस और एलुमनाई मीट की विस्तृत कवरेज। जानिए लाइव वर्कशॉप और ओरेरेशन से जुड़ी मुख्य बातें।
केजीएमयू न्यूरोसर्जरी विभाग का 32वाँ स्थापना दिवस और एलुमनाई मीट

खबर विस्तार : -

लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के न्यूरोसर्जरी विभाग ने अपने स्थापना के तीन दशक से अधिक का सफर पूरा कर लिया है। इस उपलक्ष्य में विभाग की ओर से दो दिवसीय 32वें स्थापना दिवस और एलुमनाई मीट समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पिछले 65 वर्षों से संस्थान में दी जा रही न्यूरोसर्जरी सेवाओं और शैक्षणिक उत्कृष्टता को समर्पित रहा। इस गरिमामयी आयोजन में देश भर के प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन, संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर और विभाग के पूर्व छात्र शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न शैक्षणिक और चिकित्सकीय सत्रों के साथ हुई, जहाँ चिकित्सा क्षेत्र की नवीनतम जानकारियों पर मंथन किया गया।

स्थापना दिवस समारोह और प्रतिष्ठित ओरेरेशन

समारोह के दौरान आयोजित उद्घाटन सत्र में केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री प्रो. (डॉ.) सोनिया नित्यानंद, प्रति-कुलपति प्रो. अंजू अग्रवाल, चिकित्सा संकाय के डीन प्रो. वीरेंद्र आतम और न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. बी. के. ओझा उपस्थित रहे। इस अवसर पर विभाग की वार्षिक रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें पिछले वर्षों की सफलताओं और भविष्य की चिकित्सा योजनाओं का विवरण दिया गया। समारोह का मुख्य आकर्षण एम्स नई दिल्ली के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष सूरी द्वारा दिया गया 'डेव न्यूटन ओरेरेशन' रहा। उन्होंने 'सेरेब्रोवैस्कुलर एवं स्कल बेस न्यूरोसर्जरी' विषय पर व्याख्यान देते हुए इस क्षेत्र की सर्जिकल बारीकियों और जटिल प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया।

लाइव ऑपरेटिव कार्यशाला और व्यावहारिक प्रशिक्षण

कार्यक्रम के पहले दिन, 23 अक्टूबर को प्रो. आशीष सूरी के निर्देशन में एक विशेष स्कल बेस न्यूरोसर्जरी लाइव ऑपरेटिव कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस सत्र में शल्य चिकित्सा से जुड़े जटिल मामलों पर गहन विचार-विमर्श किया गया और लाइव सर्जिकल प्रदर्शन भी दिखाए गए।

पूर्व छात्रों का सम्मान और सतत चिकित्सा शिक्षा

संस्थान के साथ पुराने संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 1993 बैच के दो विशिष्ट पूर्व छात्रों, डॉ. अतुल रस्तोगी और डॉ. कुलवंत सिंह को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। कुलपति ने दोनों चिकित्सकों को संस्थान के प्रति उनके समर्पण और योगदान के लिए सम्मानित किया। इसके बाद “एलुमनाई के लिए और एलुमनाई द्वारा” थीम पर आधारित सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम संपन्न हुआ। इसमें पूर्व छात्रों द्वारा संचालित शैक्षणिक सत्रों, प्लेनरी चर्चाओं और न्यूरोसर्जरी क्विज़ के माध्यम से चिकित्सा जगत के अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।

विभाग की प्रतिबद्धता और भविष्य की दिशा

दो दिवसीय यह आयोजन न केवल विभाग की गौरवशाली परंपरा और गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव रहा, बल्कि इसने उन्नत न्यूरोसर्जिकल प्रशिक्षण के नए मार्ग भी प्रशस्त किए। इससे वर्तमान रेजिडेंट चिकित्सकों को आधुनिक तकनीकों को सीखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के आयोजनों से संकाय सदस्यों और पूर्व छात्रों के बीच का आपसी सहयोग और संवाद मजबूत होता है। यह आयोजन एक बार फिर यह साबित करता है कि केजीएमयू का न्यूरोसर्जरी विभाग उत्कृष्ट रोगी देखभाल और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के लिए प्रतिबद्ध है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) उत्तर प्रदेश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है। यहाँ का न्यूरोसर्जरी विभाग दशकों से उत्तर भारत में गंभीर और जटिल मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी से जुड़े विकारों के इलाज का प्रमुख केंद्र रहा है, जहाँ हर साल हजारों मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सीय सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

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